We do not need anyone's support. Whatever we have to do, we have to do it on our own and we do not need anyone's help in this because we will do what we say.
"बहन मायावती जी अपने वायदे से मुकर गईं।"
अभी कल बहन जी ने कहा था कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लेते हैं तो आकाश आनंद को BSP में पुनः पद के साथ काम करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
आज सुबह अशोक सिद्धार्थ जी ने राजनीति से संन्यास ले लिया। उन्होंने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और पद तक का त्याग कर दिया, लेकिन उनके संन्यास के बाद बहन जी अपने ही कहे हुए वादे से पीछे हटती दिखाई दे रही हैं। अब उनका तर्क है कि अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद की नीयत में अभी भी खोट है।
इसके लिए आपने दो तर्क दिए हैं;
पहला, अशोक सिद्धार्थ ने कल के पोस्ट के तुरंत बाद राजनीति से संन्यास क्यों नहीं लिया? चूंकि उन्होंने आज सुबह संन्यास लिया, इसलिए कुछ घंटों की देरी को उनकी नीयत में खोट और राजनीतिक अभिलाषा बरकरार रहने का प्रमाण माना गया।
लेकिन क्या किसी व्यक्ति को अपनी जिंदगी के इतने बड़े फैसले पर कुछ घंटे सोचने और शांत होकर परिस्थितियों को समझने का भी अधिकार नहीं है? राजनीति से संन्यास लेना कोई सामान्य घोषणा नहीं है। वर्षों की राजनीतिक यात्रा को एक झटके में समाप्त करने का फैसला है। इसके बावजूद उन्होंने कुछ ही घंटों में संन्यास ले लिया और कहा कि संन्यास तो बहुत छोटी चीज है, बहन जी के लिए तो जान भी हाजिर है।
दूसरा, आकाश आनंद ने बहन जी के कल के पोस्ट को रीट्वीट नहीं किया। इसलिए यह निष्कर्ष निकाल लिया गया कि उन्हें पार्टी और मूवमेंट से अधिक अपने रिश्तों की चिंता है।
बहन जी, आप देश की इतनी बड़ी नेता हैं। फिर भी इतना हल्का और बचकाना तर्क? क्या किसी व्यक्ति की पार्टी के प्रति निष्ठा अब किसी पोस्ट को रीट्वीट करने से तय होगी? सिर्फ आपका पोस्ट रीट्वीट न करने के कारण आपने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया। हद होती है। कोई व्यक्ति दुख में हो सकता है, आहत हो सकता है, चुप रह सकता है। हर चुप्पी विद्रोह अथवा साजिश नहीं होती है।
बहन जी, शायद आपको अंदाजा भी नहीं है कि आप जिस तरह बार-बार आकाश आनंद को सार्वजनिक रूप से जलील कर रही हैं, वह Human Dignity के खिलाफ है। कोई भी व्यक्ति लगातार ऐसी परिस्थितियों में मानसिक रूप से टूट सकता है। आप स्वयं कल्पना कीजिए कि आकाश आनंद कितनी वेदना, पीड़ा और घुटन में जी रहे होंगे। ऐसे समय में उनसे ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सक्रिय रहने की उम्मीद करना ही अपने आप में असंवेदनशील है।
मुझे दुख इस बात का है कि करोड़ों बहुजनों की आदर्श नेता होने के बावजूद इतनी गंभीर परिस्थिति में इतनी छोटी-छोटी बातों पर आकाश आनंद को जलील कर रही हैं।
असली खेल धूर्त पदाधिकारियों का है, जो वर्षों से बहन जी को गुमराह करके पार्टी को खोखला करने में लगे हुए हैं। बहन जी को यह समझना ही होगा कि जो पदाधिकारी हर बात को अपने हिसाब से छानकर नेतृत्व तक पहुंचाते हैं, जो अपने हित के मुताबिक दूसरों को अच्छा-बुरा साबित करते हैं, दरअसल वही लोग पार्टी और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच दीवार बने हुए हैं। और संगठन को सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं लोगों से है।
अपने आसपास के उन धूर्त पदाधिकारियों को पहचानिए, जो अपनी कुर्सी, प्रभाव और अकूत धन की लूट को बचाए रखने के लिए जानबूझकर पार्टी को पारिवारिक कलह में धकेल दिए हैं। अगर कोई व्यक्ति पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत करने के बजाय आंतरिक कलह से अपना प्रभाव मजबूत कर रहा है, तो वह पार्टी का हितैषी नहीं हो सकता।
करोड़ों बहुजनों की पहुंच बहन जी तक डायरेक्ट होनी चाहिए, लेकिन अफसोस कि आज वह धूर्त पदाधिकारियों के चंगुल में फंस चुकी हैं। ये वही लोग हैं, जो हर उस मिशनरी की बात को तोड़-मरोड़कर बहन जी तक पहुंचाते हैं, जो पार्टी में कुछ अच्छा करने और मूवमेंट को आगे बढ़ाने की कोशिश करता है। जब ये लोग भूखे गिद्धों की तरह आकाश आनंद का राजनीतिक करियर नोचने पर आमादा हैं, तो सोचिए हम जैसे सामान्य कार्यकर्ताओं की बिसात ही क्या है।
इन मक्कार पदाधिकारियों की कुर्सी बचाना आसान है, लेकिन एक पूरी पीढ़ी के राजनीतिक भविष्य को नुकसान पहुंचने के बाद उसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।
बहन जी, आपके आसपास के पदाधिकारी आते-जाते रहेंगे, लेकिन यह आंदोलन और करोड़ों बहुजनों की उम्मीदें स्थायी हैं। इसलिए किसी भी पदाधिकारी को आपके और बहुजन समाज के बीच दीवार मत बनने दीजिए। जिस दिन आम मिशनरी अपनी बात सीधे आप तक पहुंचा सकेगा और आप बिना किसी फिल्टर के जमीनी सच्चाई सुन पाएंगी, उसी दिन आपको पता चलेगा कि ये धूर्त एवं मक्कार पदाधिकारी आपको क्या बता रहे थे और जमीन पर वास्तव में क्या हो रहा है। इस चंगुल से बाहर निकलना अब सिर्फ आपकी मजबूरी ही नहीं, बल्कि बहुजन आंदोलन के भविष्य की जरूरत भी है। आपको इस चंगुल से बाहर निकलना ही होगा।
आपका शुभचिंतक: सूरज कुमार बौद्ध
@Mayawati@AnandAkash_BSP
परम आदरणीय बहन जी सादर चरण स्पर्श!
माननीया बहन जी आपको अवगत कराना है कि, मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज़ से बढ़ कर है। आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं। आपके मार्गदर्शन में, मैं बीते पैंतीस वर्षों से बीएसपी और मान्यवार साहेब श्री कांशीराम जी और बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहा हूं। आपने आज तक जो भी जिम्मेदारी दी है उसे अपने पूरे सामर्थ्य के साथ निभाने की कोशिश की है। आप मेरी राजनैतिक गुरू हैं, मेरी बड़ी बहन हैं, आपने मुझ जैसे अदने से व्यक्ति को क्या कुछ नहीं दिया, आपकी वजह से ही मैं विधान परिषद और राज्य सभा तक का सदस्य रहा हूँ । आपने मुझे इस लायक समझा कि आपने मुझ जैसे मामूली से कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया। ये आपका ऋण है, जो मैं इस जीवन में चुका भी नहीं सकता।
परमपूज्य आदरणीय बहन जी, मेरे आराध्य तथागत भगवान गौतम बुद्ध और मेरे राजनीतिक आदर्श मान्यवर साहेब श्री कांशीराम जी की क़सम खाता हूँ , कि मैंने कभी भी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया और आपके खिलाफ कुछ भी करने का तो मैं सपने में भी सोच नहीं सकता हूं। मेरा और मेरे परिवार का ये पूरा जीवन आपका ऋणी है। आदरणीय बहन जी, आपकी एक-एक नसीहत और आदेश मेरे लिए अंतिम शब्द हैं।
आदरणीय बहन जी, माननीय आकाश जी को सलाह देना तो दूर बीते कई महीनों से मेरी उनसे मुलाकात भी कुछ एक अवसर पर तब हुई जब उनके कार्यक्रम उन राज्यों में लगे जिनकी जिम्मेदारी आपने मुझे दी हुई थी।
मान० बहन जी हमारी पार्टी के ही कुछ साथी मुझे आपसे मिले सम्मान के कारण मुझ पर ये आरोप लगाते हैं कि मैं पार्टी पर कब्जा करना चाहता हूं, मैं माननीय आकाश आनंद जी को गुमराह करने की कोशिश कर रहा हूं...इसमें लेशमात्र भी सच्चायी नहीं है! आदरणीय बहन जी मैं आपसे विनम्र निवेदन के साथ कहा रहा हूं कि ये मेरे राजनैतिक विरोधियों की साजिश है ,जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं, जिसकी सच्चाई एक न एक दिन आपके सामने ज़रूर आ जाएगी।
आदरणीय बहन जी, मेरी आपसे हाथ जोड़ कर विनती है कि मेरे सन्यास लेने को आप आकाश जी की वापसी से मत जोड़िए, माननीय आकाश आनंद जी मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे हैं, और आदरणीय आनंद भाईसाहब के बेटे हैं। उनके अंदर आपका खून बहता है, उन्होने जीवन के दो दशक आपकी छत्र छाया और देख-रेख में बिताए हैं, मेरे जैसा मामूली सा कार्यकर्ता भला उनको क्या ही गुमराह कर पाएगा। उनका अच्छा-बुरा आप किसी और से ज्यादा बेहतर समझती हैं, उनको वापस जिम्मेदारी देना या ना देना ये आपका फैसला है !🙏 इसे मेरे सन्यास लेने से जोड़ कर आप मुझ जैसे मामूली कार्यकर्ता को उसकी हैसियत से ज्यादा महत्त्व दे रही हैं।
आदरणीय बहन जी, आप खुद में त्याग और दया की मूर्ती हैं, जब बात समाज के हित की आई तो आपने मुख्य मंत्री की कुर्सी और राज्यसभा के सदस्य पद को भी ठोकर मार दी, आदरणीय बहन जी, आप हमारी मार्गदर्शक ही नही हमारी आदर्श भी हैं, और अगर आज आपको लगता है कि मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से हमारे संतो , गुरुओं और महापुर्षों के बनाए हुए बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो मैं अभी इसी वक्त राजनैतिक और सामाजिक जीवन से सन्यास ले रहा हूं। आदरणीय बहन जी, मेरा ये जीवन आपका ऋणी है, ऐसे में सन्यास तो बहुत छोटी चीज है आपके लिए अगर मुझे कभी अपनी जान भी देनी पड़े तो वो भी मेरे लिए फक्र की बात होगी।
ससम्मान , जय भीम!! जय भारत!!!
जय बहुजन समाज!
आपका कार्य कर्ता
अशोक सिद्धार्थ
नोट- देरी के लिए क्षमा प्रार्थी!!!
मैं आकाश आनंद भाई के साथ हूं।
राजनीति में जब कोई व्यक्ति मुश्किल दौर से गुजर रहा होता है, तब उसके साथ खड़ा होना सबसे कठिन होता है। लेकिन मैं उन लोगों में से नहीं हूं, जो किसी के अच्छे दिनों में उसके साथ खड़े रहें और बुरे दिनों में उससे किनारा कर लें।
मैं आकाश आनंद के साथ इसलिए हूँ, क्योंकि मैंने उनमें बहुजन समाज के लिए कुछ करने की बेचैनी देखी है। मैंने देखा है कि किस तरह उन्होंने युवाओं के बीच जाकर BSP की बात रखी, नई पीढ़ी से संवाद किया और यह बताने की कोशिश की कि मान्यवर कांशीराम एवं माननीया बहन जी का संघर्ष केवल अतीत की गौरवगाथा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई भी है।
अगर उनसे कुछ गलती हुई भी है तो उन्हें समझाइए। अगर वह जल्दबाजी करते हैं तो उन्हें रोकिए। अगर उनमें कमी है तो उन्हें सिखाइए। लेकिन उन्हें बार-बार अपमानित करते हुए सार्वजनिक रूप से यह मत कहिए कि वह "इमैच्योर" हैं या कुछ कर ही नहीं सकते। जहां तक पब्लिक डोमेन में उपलब्ध बातों का सवाल है, मुझे आकाश आनंद बहुत ही परिपक्व, योग्य एवं बेबाक नेता लगते हैं। धूर्त पदाधिकारियों के बहकावे में आकर बहन जी द्वारा ससुर और ससुराल के बहाने पग-पग पर उनके पांव रोकना हरगिज जायज नहीं है।
कांशीराम साहब ने भी बहन जी को एक दिन में तैयार नहीं किया था। उन्होंने उन्हें अवसर दिया, जिम्मेदारी दी, समझाया और समय के साथ तराशा। बहन जी स्वयं इस बात की सबसे बड़ी मिसाल हैं कि एक युवा कार्यकर्ता को अगर सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वह इतिहास बदल सकता है। इसलिए आकाश आनंद को भी सीखने और खुद को साबित करने का अवसर मिलना चाहिए।
माननीया बहन जी को समझना होगा कि आज AI के इस दौर में युवाओं के सवाल अलग हैं, उनकी भाषा अलग है, उनके माध्यम अलग हैं और उनके सपने अलग हैं। अगर बहुजन आंदोलन को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है, तो उसके नेतृत्व को भी उस पीढ़ी से संवाद करना पड़ेगा। इसीलिए बहुजन आंदोलन को नई पीढ़ी चाहिए।
BSP को सिर्फ पुराने 15-20 धूर्त पदाधिकारियों की पार्टी बनाकर नहीं रखा जा सकता। इनमें से अधिकांश पदाधिकारी धूर्त, स्वार्थी एवं बहन जी से मिलाने एवं टिकट दिलाने के नाम पर अकूत धन ऐंठने वाले हैं। ऐसे में पार्टी को हर उस युवा तक भी पहुंचना होगा, जो मोबाइल पर राजनीति देखता है, सोशल मीडिया पर बहस करता है और अपने भविष्य को लेकर सवाल पूछता है। आकाश आनंद ने इस दिशा में शानदार कोशिश की थी। वह इसमें कुछ हद तक सफल भी रहे।
आज अगर आकाश के साथ खड़े होने का मतलब यह है कि मैं अकेला दिखाई दूंगा, तो भी मुझे मंजूर है। क्योंकि राजनीति में समर्थन सिर्फ तब नहीं दिखना चाहिए, जब आपके नेता के पास पद हो, मंच हो और हजारों लोग उसके आसपास खड़े हों। असली समर्थन तब होता है, जब उसके पास कुछ भी न बचा हो और फिर भी आप कहें; "भाई आप संघर्ष करें, हम आपके साथ हैं।"
आज जब आकाश आनंद बार-बार मुश्किल परिस्थितियों से गुजर रहे हैं, तब उनके साथ खड़ा होना और भी जरूरी है। अच्छे समय में किसी के साथ खड़े होने वाले बहुत लोग मिल जाते हैं, लेकिन जब वही व्यक्ति अपमान और अकेलेपन से गुजर रहा हो, तब उसके साथ खड़े होने वाले कम होते हैं। मैं उन कम लोगों में रहना पसंद करूंगा।
आकाश आनंद भाई, यह आपके लिए परीक्षा की घड़ी है। शांत रहना समस्या का समाधान नहीं है। पार्टी के धूर्त पदाधिकारियों ने बहन जी के इर्द-गिर्द जो मकड़जाल बना रखा है, आपको उसे तोड़ना ही होगा। आपको गिराया जा सकता है, रोका जा सकता है, आपकी जिम्मेदारी छीनी जा सकती है, लेकिन इसे अपनी राजनीतिक यात्रा का अंत हरगिज नहीं होने देना है।
भाई आप हिम्मत मत हारना। आपके हिस्से शुरू से ही संघर्ष आया है। आज का समय मुश्किल है, लेकिन इसे अपनी कहानी का अंत मत समझना। राजनीति लंबी यात्रा है। इसमें बहुत से उतार-चढ़ाव आते हैं। यह एक योद्धा की जिम्मेदारी है कि वह इस साजिश को भेदकर बाहर निकले।
इन मुश्किलों से टूटें नहीं, बल्कि इस पूरे अनुभव से और मजबूत होकर निकलें। अपने भीतर के विश्वास को मत खोएं। हम आपके साथ हैं.. किसी पद के लिए नहीं, किसी रिश्ते के लिए नहीं, किसी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि इसलिए क्योंकि मैं इस युवा में बहुजन आंदोलन को आगे बढ़ाने की संभावना देखता हूं।
आपका शुभचिंतक- सूरज कुमार बौद्ध
@Mayawati@AnandAkash_BSP
बहन जी, धूर्त पदाधिकारियों के चंगुल से बाहर निकलें!
आकाश आनंद को फिर से जिम्मेदारी से हटाए जाने की खबर से करोड़ो युवा आहत हैं। बहन जी द्वारा आकाश को बार-बार पार्टी से बाहर करना और सार्वजनिक रूप से 'इमैच्योर' बताकर जलील करना Human Dignity के खिलाफ है।
बहन जी, आपने 40 साल तक अपने शासन, प्रशासन और अनुशासन से समाज में जो सम्मान और पहचान बनाई है, आपके इन फैसलों से आपकी बहुत नकारात्मक छवि बन रही है। इतना तो कोई अपने दुश्मन को भी जलील नहीं करता। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि आपका का यह फैसला BSP और बहुजन हितों के खिलाफ है।
यकीनन आपने बहुजन समाज के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया है। तमाम विरोध के बावजूद BSP को सत्ता के शिखर तक पहुंचाया। इसलिए हमें विश्वास है कि आप उपलब्ध जानकारी और अपने विवेक के आधार पर ही निर्णय लेती हैं। लेकिन अगर आप ही 'कान की कच्ची' हो जाएंगी, तो आसपास बैठे धूर्त लोग सूचनाओं को तोड़-मरोड़कर पेश करके कुछ भी करवा सकते हैं। इन बेईमानों का क्या है? वे तो प्रभारी बनकर टिकट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये लूटकर चले जाएंगे, लेकिन नुकसान किसका होगा? पार्टी का, आपका और पूरे बहुजन समाज का।
बसपा समर्थकों के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि जिस युवा चेहरे ने वर्षों से निष्क्रिय पड़ी BSP में नई ऊर्जा पैदा की, उसी आकाश आनंद को बार-बार जिम्मेदारी से दूर क्यों किया जा रहा है? पिछले कुछ वर्षों में BSP को राजनीतिक नैरेटिव से बाहर समझा जाने लगा था, लेकिन आकाश आनंद के सक्रिय होने के बाद युवाओं में फिर से उम्मीद जगी।
उन्होंने युवाओं से संवाद किया, बेबाकी से अपनी बात रखी और यह एहसास कराया कि बहुजन आंदोलन सिर्फ अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की लड़ाई भी है। इसलिए आकाश आनंद को सिर्फ एक पदाधिकारी या बहन जी के रिश्तेदार के रूप में नहीं, बल्कि उस युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में देखिए, जो बहुजन आंदोलन को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाना चाहता है।
आकाश आनंद कोई परिपूर्ण व्यक्ति नहीं हैं। उनसे भी गलतियां हो सकती हैं। युवा नेतृत्व से गलतियां होंगी तो उन्हें समझाया जा सकता है, सुधारा जा सकता है। लेकिन हर गलती का जवाब उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करके बाहर करना ही क्यों?
कांशीराम साहब ने भी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को तैयार किया था। बहन जी स्वयं उसी प्रक्रिया की सबसे बड़ी मिसाल हैं। साहब कांशीराम ने उन्हें तराशा, गलतियों पर समझाया और उन्हें बहुजनों के इतिहास की सबसे स्वाभिमानी नेताओं में स्थापित किया। अगर उस समय उन्हें भी सिर्फ उनकी गलतियों के आधार पर रोक दिया जाता, तो शायद बहुजन समाज की राजनीति आज जिस मुकाम पर है, वहां नहीं पहुंचती।
धूर्त पदाधिकारी आते-जाते रहेंगे, लेकिन आंदोलन और उसका विजन किसी व्यक्ति या पदाधिकारी से बड़ा होता है।
आज जरूरत है कि बहन जी धूर्त पदाधिकारियों के प्रभाव से बाहर निकलें। उनके और आकाश आनंद के बीच कोई दीवार न हो। बहन जी तक कार्यकर्ताओं और जनता की वास्तविक आवाज सीधे पहुंचे। क्योंकि BSP का भविष्य सिर्फ वर्तमान पदाधिकारियों का सवाल नहीं है। यह उस पूरी बहुजन पीढ़ी का सवाल है, जो इस आंदोलन को आगे लेकर जाएगी।
मुझे सबसे ज्यादा चिंता आकाश आनंद को लेकर होती है। उन्होंने बहुजन आंदोलन को नई ऊर्जा देने का सपना तो देखा, लेकिन शुरू से ही अपने हर कदम पर धूर्त पदाधिकारियों की साजिशों से घिरे हुए हैं। उन्हें हर पग पर अपमान ही झेलना पड़ा है। न जाने उसके भीतर कितनी बातें होंगी, कितनी पीड़ा होगी लेकिन वह अपनी पीड़ा कहें किससे? कितनी बार वह खुद को समझाता होगा कि सब ठीक हो जाएगा। जिस उम्र में उसे संगठन को मजबूत करने, युवाओं को जोड़ने और अपनी राजनीतिक पहचान बनाने का अवसर मिलना चाहिए, उस उम्र में उसे बार-बार ससुर और ससुराल के बहाने अपमान का घूंट पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। आखिर वह भी इंसान है, उसके भी सपने हैं, भावनाएं हैं और आत्मसम्मान है।
अतः माननीया बहन जी, आकाश आनंद को तोड़िए मत, उसे तराशिए। उसे अकेला मत कीजिए, उसे सहारा और मार्गदर्शन दीजिए। क्योंकि किसी युवा को बार-बार जलील करके तोड़ देना बहुत आसान है, लेकिन उसके भीतर की उम्मीद बचाकर उसे एक सक्षम नेतृत्व में ढालने में पूरी पीढ़ी लग जाती है।
आपका शुभचिंतक: सूरज कुमार बौद्ध
@Mayawati@AnandAkash_BSP
आकाश आनंद का सबसे विवादित भाषण ये है जिसमें आपा खोते हुए अपशब्द बोल गए थे।
अगले ही सेंटेंस में मैनेज करते हुए कहते हैं किसी का गूदा तो नहीं निकाल सकते हो ये सिर्फ आपका गुस्सा हो सकता है।
अपना गुस्सा आप वोट करके दिखा सकते हो, इन्हें सत्ता से हटाकर दिखा सकते हो। बाबा साहब ने जो अधिकार दिए हैं उसका फायदा उठा सकते हो।
ये शानदार कवर है,
इससे समझ में आता है आकाश आनंद बेहतरीन कम्युनिकेटर हैं। मेच्योर लीडर हैं।
जिस मुद्दे पर 2024 में आकाश आनंद आग बबूला हो गए थे उसी मुद्दे पर 2026 में देशभर का युवा जंतर मंतर पर आ गया सरकार बैकफुट पर चली गई।
सोचो कितना विजनरी स्टैंड रहा होगा।
जिस तेवर के साथ अभी अगस्त 2026 में कैंपेन शुरू किए थे, साल 2 साल में बहुत कुछ बदल सकता था मगर फिर से इमेच्योर बताकर हटा दिए गए हैं।
दरअसल बहनजी की लड़ाई किसी आकाश या किसी व्यक्ति से नहीं है, वाद विवाद संवाद की सहज धारा से है, जो कुछ सरल है उसके खिलाफ है।
कुछ पॉजिटिव अच्छा या सुखद ना हो जाए इस अनुभूति के खिलाफ है।
वैदिक काल में इस्तेमाल हुई संस्कृत की जलेबी अभी कहीं देखने को मिलती है तो बहन जी के सेंटेंस में।
आम लोग नहीं समझते, बहुजन समाज के लोग तो ये संस्कृत पाठ बिल्कुल नहीं समझते।
वो तो उनका लगाव उनका समर्पण है कि सबकुछ पढ़कर समझने की कोशिश करते हैं।
आकाश को एक दो शब्द के ग़लत इस्तेमाल के लिए रोका टोंका जा सकता है मगर संवाद की भाषा स्वाभाविक है, युवाओं की इच्छाओं आकांक्षाओं के अनुरूप है।
इसलिए कहूंगा फिर कभी मौका मिलेगा तो भी यही तेवर रखना @AnandAkash_BSP सही शब्दों के साथ।
सियासी फैसले इमैच्योर हो सकते हैं मगर मिशनरी ज़ुबान नहीं, इस दृढ़ निश्चय के साथ।✊🔥
संत रविदास, साहू, फूले, पेरियार, आंबेडकर, साहब कांशीराम से होते हुए बहन जी तक लाया गया है इन संतों गुरुओं के विचारधारा को जिंदा रखा और आगे बढ़ाया यकीन मानिए बहन जी के बाद श्री आकाश आनंद जी को ही आगे बढ़ाना है बहन जी सिर्फ उत्तर प्रदेश के लिए श्री आकाश की नहीं तैयार कर रही बल्कि पूरे देश के लिए तैयार कर रही है अगर उन्हें सीमित ही रखना होता तो ये बात 1 सितंबर को भी बता सकती थी।
आकाश आनंद जी की वापसी 9 अक्टूबर को होगी और पूरे ताकत से होगी।
@Mayawati@AnandAkash_BSP
युवा समाज यूपी की जनता के साथ-साथ देश की जनता bsp को फिर से अपनी नजरों से देख रही थी जिस नजर से उत्साह होकर लोग सपोर्ट में आ रहे थे परंतु अपने ऐसे decision लेकर अचानक लोगों को दिमाग से छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं जो दुख है.@Mayawati@bspindia
BSP यदि शून्य प्रतिशत वोट और शून्य सीट भी लाती है, तब भी मैं BSP के साथ रहूँगा। BSP बहुजन समाज को जो देती है, वह दूसरी पार्टियाँ लाख कोशिश करने के बाद भी नहीं दे सकतीं।
हमारे बाप-दादाओं के पास कोई सत्ता या राज-पाट नहीं था। न हम कोई नवाब थे कि शून्य हो जाने पर हमारे पास से कुछ चला जाएगा।
खोने के लिए जिनके पास कुछ नहीं है, उनके पास पाने के लिए सब कुछ है।
इसलिए चुनाव की तैयारी कीजिए। 2027 में सरकार बनानी है।
बम्पर बेइज्जती है भाई। भारतीय तो भारतीय अब नेपाली भी गोदी मीडिया कहने लगे। अब विदेश में तो कुछ कर भी नहीं सकते। हंसते हुए स्वीकार करना पड़ता है कि हां हम हैं गोदी।
बसपा में भयंकर टूट :
बसपा के कद्दावर दलित समाज के नेता मनकापुर विधानसभा के पूर्व बसपा प्रत्याशी श्याम नारायण कोरी, गौरा विधानसभा के पूर्व बसपा के कद्दावर प्रत्याशी निगार उस्मानी और देवीपाटन मंडल के पूर्व मुख्य कोऑर्डिनेटर राजिक उस्मानी बसपा छोड़ सपा में हुए शामिल,
इनके साथ देवीपाटन मंडल के बसपा संयोजक दलित समाज के कद्दावर नेता गंगा प्रसाद चौधरी और आजाद समाज पार्टी के मनकापुर विधानसभा अध्यक्ष विनोद कोरी भी सपा में शामिल हुए।
इन नेताओं के साथ 194 अन्य कार्यकर्ताओं ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की। सभी कार्यकर्ताओं ने सपा मुख्यालय में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली। सपा लोहिया वाहिनी के प्रदेश सचिव लाल चंद्र गौतम के नेतृत्व में यह जॉइनिंग कराई गई।
कई महीने से चल रही थी तैयारी
लाल चंद्र गौतम पिछले कई महीनों से इन नेताओं को सपा में शामिल कराने के प्रयास में जुटे थे।
आज दिनांक 30-08-2026 को जनपद अम्बेडकरनगर में पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ सेक्टर बूथ समीक्षा के संदर्भ में एक अतिमहत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई जिसमें शामिल हुआ।
#जयभीम#मिशन_2027#BSP#अंबेडकरनगर
🏗️ विकास की हर पहल हो गुणवत्तापूर्ण, योजनाओं का लाभ पहुंचे अंतिम पात्र तक
मा० राज्य मंत्री श्री संजीव कुमार गोड़ जी की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय विकास कार्य अनुश्रवण समिति ‘दृष्टि’ की बैठक में जनपद की विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण से प्रत्येक पात्र परिवार को पारदर्शी ढंग से लाभान्वित करने, सम्पर्क मार्ग एवं विद्युतीकरण कार्यों की तकनीकी जांच कराने तथा निर्माण कार्यों का नियमित स्थलीय निरीक्षण कर गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव धरातल पर दिखे और विकास का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचे—इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्यों को गति देने के निर्देश दिए गए।
@gaur_charchit@ChiefSecyUP@CMOfficeUP@UPGovt@InfoDeptUP@myogiadityanath@myogioffice
1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीने में (अर्थात विधानसभा आमचुनाव तक) एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा हालाँकि विलम्ब से उठाया गया सही किन्तु चुनावी क़दम ज़्यादा लगता है, फिर भी वे नियुक्तियाँ पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि के अभिशाप से मुक्त समय से पूरा हो जायें तो यह सही होगा ताकि यह चुनावी छलावा ना साबित हों, जबकि इसके साथ ही एससी, एसटी व ओबीसी समाज के आरक्षित पदों के बैकलाग पर भर्तियों के बारे में भी सरकारी घोषणा की लोगों को उत्सुकता से प्रतीक्षा है।
2. इतना ही नहीं बल्कि यहाँ 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर इन वर्गों के 6,800 अभ्यार्थी अपनी नियुक्ति के लिये भूखे-प्यासे लगातार आन्दोलनरत हैं, उनके बारे में भी सरकार को पूरी सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर सोचना चाहिये, क्योंकि उन्हें वास्तविक राहत सरकार ही दे सकती है।
3. इसके साथ ही, बी.एस.पी. यूपी सहित पूरे देश भर में स्कूली शिक्षा की बदहाल व्यवस्था को समुचित तौर पर बेहतर बनाने की माँग लगातार करती रहती है, किन्तु संभवतः ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ के दबाव में जो थोड़ी अनचाही हलचल सरकारी स्तर पर देखने को मिल रही है वह मामूली ही सही परन्तु स्कूली शिक्षा में सुधार करने की सही नीयत से हो तो यह उचित होगा और इस क्रम में यहाँ लगभग 30 हज़ार जो सरकारी स्कूल बंद कर दिये गये हैं उन्हें दोबारा अच्छे तरीके से सक्रिय करने की व्यवस्था सरकार अविलम्ब करे तो यह भी जनहित में होगा।
4. इसके अलावा, बुजुर्ग महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा आदि की व्यवस्था से कहीं अधिक महिलाओं को हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार, उत्पीड़न आदि से बचाने के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व आत्मनिर्भरता के बारे में भी सरकारों को सही नीयत व नीति से कार्य करने की ज़रूरत है।
मूर्ख सपाइयों देख लो आकाश आनंद जी ने आज सारा फोकस भाजपा पर ही किया है फिर भी तुम्हें लगता है की बसपा भाजपा की B टीम है, तो तुमसे ज्यादा धूर्त इस दुनिया में कोई नहीं है।
और हां चंद्रशेखर के चमचों तुम भी देख लो भीड़ इसे कहते हैं फिर बाद में तुम रैली होने के बाद खाली कुर्सियां गिनते ही रह जाओगे😂