🖊️
नीर में क्षीर समाकर ज्यों,
उसको निज-रूप बनाता है,
ज्यों मल्हार का प्रेम मेघ को,
तत्क्षण खींच के लाता है।
ज्यों पलाश में रंग बसंत के,
स्वागत में खिल उठते हैं,
ज्यों चकोर के नयन, सोम संग,
रात-रात भर चलते हैं।
.
.
.
♥️
𓂃✍︎ आदि.
#A_4_AD
⬇️
ज़ेहन में नहीं बाकी
जगह कोई
किसी ग़ैर का
मसर्रत-ए-विसाल रखने को,
जाने जाँ
तू बेशक़ न हो लेकिन
तेरा एक ख़्याल ही मुक़म्मल है
मेरी कैफ़ियत का ख़्याल रखने को........!!
दिल के कोने-कोने से दर्द को निकालना पड़ता है
रूह के उस रिसते रोम-रोम को तड़पाना पड़ता है
आँंखो से क़तरा-क़तरा आँंसू भी बहाना पड़ता है
काँपती कलम को चलने पे विवश करना पड़ता है
जहन से बीती यादो का ज़खीरा खोलना पड़ता है
तब जा कर एक कोमल कविता का श्रृँगार होता है
𝐆𝐨𝐩𝐚𝐥𓂃✍︎
न दृष्टि भ्रमित नेत्रों की
न दशा हूंँ मन के मोह की
न मरीज़ कोई इश्क़ का
न दरियाँ हूँ इन अश्कों का
न छाँव हूंँ पल-भर की
न ही धुप कोई पतझड़ की
न आँधी हूँ सावन की
न ही उलझन किसीं राह की
मैं तो झील हूंँ झेलम
प्यासी प्रेम के दो शब्दों की!
𝐺𝑜𝑝𝑎𝑙𓂃✍︎
वो गुजरा हर पल खास रहेगा
उन पलों में प्रेम का वास रहेगा
वक़्त को कुछ और मंजूर रहा
मगर ये शख़्स तेरे पास रहेगा
कितना जीये ये जरुरी तो नहीं
ताउम्र ये बटोही तेरा दास रहेगा
मिले या ना मिले हम फिर कभी
उम्मीदों में तू सदा "काश" रहेगा
𝐆opa𝐥𓂃✍︎
🖊️
उसी से मिल गई आँखें, निगाहें जिसकी नश्तर सी,
अगर दीवान हूं मैं इक, तो वो है इसके अक्षर सी,
उसी की ओढ़नी की शाम में, ढलता है दिन मेरा,
सफ़र में ज़िन्दगी के, उस की बाहें हैं मेरे घर सी.
♥️
𓂃✍︎ आदि.
#A_4_AD#बज़्म
रिश्ता दिल का यूँ ही न जोड़ों किसी से,
कि खामोशी छीन ले लफ्ज़ तुम्हारी,
तुम बिखरो टुकड़ों में
और फ़िर रह जाओ ताउम्र खुद को समेटते!
.
.
जिन आँखों में, इश्क था कल तुम्हारे लिए
मुमकिन है आज वहीं अपनी नाम तक रह जाओ ढूंढते!
___माला@Its__Mala