एक तरफ छात्रों से फीस लेकर कोचिंग चलाना और दूसरी तरफ उसी भर���ती विवाद को लगातार हवा देकर खुद को बड़ा नेता साबित करना—यह छात्रों की लड़ाई कम और *निजी हित का खेल ज्यादा* लगता है। छात्रों को ऐसे लोगों को पहचानना होगा।
@YNOS99861140 छात्रों को अब भावनाओं में नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर सोचना होगा। कुछ *कोचिंग माफिया* छात्रों की भीड़ और गुस्से को अपने प्रचार का माध्यम बना रहे हैं। असली लड़ाई न्याय की होनी चाहिए, किसी की दुकान चमकाने की नहीं।
@SHASHIB10875185 छात्रों को अब भावनाओं में नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर सोचना होगा। कुछ *कोचिंग माफिया* छात्रों की भीड़ और गुस्से को अपने प्रचार का माध्यम बना रहे हैं। असली लड़ाई न्याय की होनी चाहिए, किसी की दुकान चमकाने की नहीं।
@sukhnathoraon13 छात्रों को अब भावनाओं में नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर सोचना होगा। कुछ *कोचिंग माफिया* छात्रों की भीड़ और गुस्से को अपने प्रचार का माध्यम बना रहे हैं। असली लड़ाई न्याय की होनी चाहिए, किसी की दुकान चमका���े की नहीं।
चित भी मेरा, पट भी मेरा!
किताब भी यही बेचेंगे,
पढ़ाएंगे भी यही।
सेटिंग भी यही करेंगे,
सीट भी यही बेचेंगे।
रद्द भी यही करवाएंगे,
फिर आंदोलन में भी यही बैठेंगे।
कोर्ट भी यही दौड़ेंगे,
तस्वीरें भी यही खिंचवाएंगे,
जंतर-मंतर के आंदोलन को भी यही कोसेंगे।
मतलब खेल भी इनका, नियम भी इनके, फैसला भी इनका और फायदा भी इनका।
आप बस तैयार रहिए
भीड़ बनने के लिए। @JmmJharkhand@HemantSorenJMM
विद्यार्थियों की आवाज़ मजबूत होनी चाहिए, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि वह सही तथ्यों और सही उद्देश्य पर आधारित हो।
भीड़ का हिस्सा बनने से बेहतर है कि सोचें, समझें, सवाल करें और अपने भविष्य के लिए सही फैसला लें। 📚✊