देश को एक माला के सूत्र में पिरोने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे लौहपुरुष, भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन ।
#SardarPatel
सभी देशवासियों को संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया गया इसके बाद 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू किया गया।
हमें हमारे संविधान पर गर्व है, इसमें निहित मूल्यों को बचाये रखने के लिए हम अपनी वचनबद्धता दोहराते हैं।
#ConstitutionOfIndia
"This dam has been built with the unrelenting toil of man for the benefit of mankind and therefore is worthy of worship. May you call it a temple or a gurdwara or a mosque, it inspires our admiration and reverence"
गांधी जी ने कहा था कि “अंग्रेज रहें, उनकी सभ्यता चली जाए, वह तो मुझे मंजूर है, परंतु अंग्रेज चले जाएं और उनकी सभ्यता यहां राज करती रहे, यह मुझे मंजूर नहीं, इसे मैं स्वराज नहीं कहूंगा”
महात्मा गांधी की जयंती पर शत-शत नमन
#महात्मागांधी#MahatmaGandhi#GandhiJayanthi
“ उनसे अपनी सारी असहमतियों के बावजूद जहाँ तक मेरा सवाल है, वे ( गांधीजी) मेरे देश के निर्विवाद नेता हैं। यदि किसी को जानना है कि भारत क्या चाहता है तो उसे जाना उन्हीं के पास होगा।”__ जवाहरलाल नेहरू, 25 सितंबर 1935.
In his first speech to the UN 70 years ago, J.Nehru had stressed on the need for peace, saying hatred & violence wouldn't solve the world's problems. On 3 November 1948, At U.N Assembly for the first time as the prime minister of independent India.
#InternationalDayOfPeace
भारत रत्न,सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर श्रद्धांजलि।वे भारत के बेहतरीन इंजीनियर,विद्वान,राजनेता और मैसूर के दीवान थे।
देश उनकी याद में हर साल उनकी जयंती 15 सितंबर को इंजीनियर दिवस के रूप में मनाता है।
#HappyEngineersDay#JawaharlalNeharu
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1912 में बांकीपुर अधिवेशन में पहली बार एक प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लिया था। यह जन सहयोग और विश्वास ही था, जिसके बल पर नेहरू जी ने प्रतिनिधि से भारत के प्रथम प्रधानमंत्री तक का सफर पूरा किया।
#DeshKiDharohar#JawaharlalNeharu
The non-alignment policy propounded by Nehru as early as 1946 not only arose from India's struggle for freedom but also carved an independent path for developing nations at the world stage attempting to protect their sovereignty.
1903 से 1964 तक के बीच का जवाहर लाल नेहरू वांग्मय 100 वॉल्यूम में अब ऑनलाइन मौजूद होगा. 20सदीं के भारतीय इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को इन्हें जरूर पढ़ना चाहिए.
ऑनलाइन उपलब्ध हुआ नेहरू वांग्मय का 100वां खंड, जयराम रमेश ने कहा ट्रोल्स भी पढ़ें
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