ये पूरा वीडियो वो सबूत है जिसमें दिल्ली पुलिस ने BJP के लोगो को सिविल ड्रेस में डंडा देकर लगा रखा था। जिस लड़की के निजी अंग में डंडा घुसाने की शर्मनाक कोशिश किया उस घटना में भी वो पुलिस वाला और वो BJP का आदमी दोनों का प्लानिंग था। ये देखिए वीडियो पूरा। इस शर्मनाक कृत्य का जवाब @narendramodi@AmitShah@LtGovDelhi@DelhiPolice को देना चाहिए।
📍 मिराज–पुणे स्पेशल एक्सप्रेस | महाराष्ट्र
ट्रेन में सफर कर रही एक मुस्लिम महिला की चोरी-छिपे तस्वीरें खींचकर AI से उसकी फेक न्यूड तस्वीरें बना रहा हिंदू युवक पकड़ा गया।
एक सहयात्री ने पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर रेलवे पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। पुलिस ने वीडियो रिकॉर्ड करने वाले शख्स से वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न करने को कहा, लेकिन पीड़िता की मां ने इस घटना को लोगों तक पहुंचाने की अपील की है।
बुर्क़ा भी अब सुरक्षा की गारंटी नहीं रहा। AI का ऐसा घिनौना इस्तेमाल महिलाओं की निजता और सम्मान पर सीधा हमला है।
ईरान जंग और गज़ा के नरसंहार के समय भारत ने इजराइल को हथियारों की सप्लाई जारी रखी।
भविष्य में ईरान के साथ संबंधों और पश्चिमी एशिया के देशों में भारत के प्रति विश्वास टूटेगा।
सरकार सफाई दे रही है कि भारत ने इजराइल की गोला-बारूद बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई की।
उधर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे अपराध की श्रेणी में रखने की बात की है।
भारत सरकार ने मानवता के विरुद्ध जाकर यह कदम उठाया है, जो भारतीय विदेश नीति और राष्ट्रीय सोच के पूरी तरह विरुद्ध है।
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चलती ट्रेन से मौलाना तौसीफ रज़ा को धक्का देने वाला पंकज सिंह राजपूत घटना के डेढ़ महीने बाद गिरफ़्तार हुआ. पहले पुलिस ने इस वारदात को एक्सीडेंट बताया, लेकिन बाद में इस मामले की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने हत्या का खुलासा किया. देखिए क्या था पूरा मामला
आज हालात यह हैं कि कम खर्च में भेजे गए ड्रोन, सामने वाले देश को भारी आर्थिक बोझ उठाने पर मजबूर कर देते हैं।
यह कहानी सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों में नवाचार और रणनीति की भी है।
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ड्रोन तकनीक में ईरान इतना मजबूत कैसे बना? इसकी शुरुआत बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि कॉलेज के छात्रों के छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स से हुई थी।
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धीरे-धीरे यह तकनीक विकसित हुई ‘मुहाजिर’ जैसे ड्रोन बने और आगे चलकर ‘शाहेद-136’ जैसे आधुनिक ड्रोन सामने आए।
ईरान की रणनीति अलग रही—महंगे हथियारों की बराबरी करने के बजाय कम लागत में ज्यादा संख्या में ड्रोन बनाकर विरोधी की रक्षा प्रणाली पर दबाव बनाना।
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पिछले बारह वर्षों में विपक्षी नेताओं का बीजेपी की ओर जाना इतना आम हो गया है कि अब यह चौंकाने वाली बात नहीं रही। असल हैरानी तो उन नेताओं को देखकर होती है, जो दबाव, छापों और तमाम चुनौतियों के बावजूद अपने दल में टिके रहते हैं।
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जो नेता पार्टी बदलकर बीजेपी में जा रहे हैं, उन्हें भी पता है कि कुछ समय बाद यह मुद्दा ठंडा पड़ जाएगा—दलबदल पर सवाल उठना बंद हो जाएंगे और सब कुछ सामान्य हो जाएगा।
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ऐसे तनावपूर्ण माहौल में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ईरान और अमेरिका आमने-सामने बैठकर बात कर पाएंगे? और इस पूरे घटनाक्रम में इज़राइल की अगली चाल क्या होगी?
यह सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि आने वाले समय की दिशा तय करने वाला मोड़ हो सकता है।
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ईरान का अमेरिका पर अविश्वास काफी बढ़ चुका है। ट्रम्प के बयानों पर भरोसा नहीं किया जा रहा, और यह आशंका भी जताई जा रही है कि बातचीत के नाम पर दबाव या बड़े कदम की तैयारी हो सकती है।
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