"ये कश्मीर की पहचान भी है और इसकी रूह भी है।"
PASHMINA - हमारी KASHMIR Documentaries ki pehli peshkash, Humari कश्मीर की कहानियों को आप तक पहुँचाने की एक कोशिश...
Bharat By Jai Hind Project - https://t.co/lXX2wO2o3K
#handmadeheritage#pulwama#indiawins
भारत को जानना है...
तो सिर्फ़ headlines नहीं, लोगों की असली कहानियाँ भी देखनी होंगी।
‘THE NORTHEAST YOU DON'T SEE’
उत्तर-पूर्व भारत के पहाड़ों में बसे समुदायों की कहानियाँ।
अब BHARAT पर | Jai Hind Project
Documentary Link👇
https://t.co/akF0S4tGzj
जय हिंद! 🇮🇳
#DimaHasao
भारत को समझना है…
तो सिर्फ़ खबरें नहीं, लोगों की ज़िंदगियाँ भी देखनी होंगी।
पश्मीना के पीछे छुपी कश्मीर की कहानियाँ।
Coming soon on BHARAT | The Jai Hind Project
TRAILER out now 👇
https://t.co/L3RpkuZiyJ
#Pashmina#StoriesOfIndia#Kashmir
‘जय हिंद प्रोजेक्ट’ द्वारा प्रायोजित ‘भारत’ प्रस्तुत करता है “एक भारतीय के जीवन का एक दिन” —
मोहम्मद काशिफ़ के संघर्ष और दृढ़ संकल्प ने उनकी और उनके समुदाय की तक़दीर बदल दी। हर कदम एक नई उम्मीद को जन्म देता है।
https://t.co/LyCJc9fPpG
#Bharat#JaiHindProject#ADayInTheLife
‘जय हिंद प्रोजेक्ट’ द्वारा प्रायोजित ‘भारत’ प्रस्तुत करता है एक नई डॉक्यूमेंट्री, "सुंदरबन में जीवन का संघर्ष”।
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में, मनुष्य और प्रकृति के बीच संघर्ष को देखिए जहां बढ़ते जलस्तर और बाघों का खतरा लोगों को चुनौती देता है।
https://t.co/cxWBvkc45B
‘Bharat’ by Jai Hind Project presents “Wheels of Hills”.
In this episode, meet the rickshaw-puller community in Mussoorie. Some are as old as in their 70s. What keeps them going? Let’s see how their lives are in today’s world!
https://t.co/7kp3xBe25V
ग्लैड भारत फाउंडेशन हाशिए पर पड़े समुदायों को मासिक धर्म स्वच्छता सिखाकर, पर्यावरण की रक्षा करके, तथा आत्मनिर्भर समाज के निर्माण के लिए कौशल प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करके मदद करता है।
उनकी कहानी यहाँ देखे - https://t.co/xRfRXjhHAI
भारत की 50% से ज़्यादा नदियाँ अत्यधिक उपयोग, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण सूख रही हैं। निरंजना नदी पुनर्भरण मिशन, झारखंड और बिहार में सूख रही निरंजना नदी को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित है।
उनकी कहानी यहाँ देखे - https://t.co/47Ziee99nt
भारत में घरेलू कामगार, जो अक्सर 2,500-5,000 रुपये प्रति माह कमाते हैं, उन्हें भारी शोषण और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है।
यह जयंती की कहानी है, जो अपनी उम्र के बावजूद, गुजारा चलाने के लिए घरेलू सहायिका के रूप में अथक परिश्रम करती है - https://t.co/VxG8DUhN9V
2022 में दलितों के खिलाफ अपराध के मामलों में 13.1% की बढ़ोतरी हुई, जो 50,900 से बढ़कर 57,582 हो गए। सृष्टि सेवा संस्थान शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के कार्यक्रमों से हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाने में जुटा है।
उनकी कहानी यहाँ देखे - https://t.co/Ruv25KpP0x
2022 में दलितों के खिलाफ अपराध के मामलों में 13.1% की बढ़ोतरी हुई, जो 50,900 से बढ़कर 57,582 हो गए। सृष्टि सेवा संस्थान शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के कार्यक्रमों से हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाने में जुटा है।
उनकी कहानी यहाँ देखे - https://t.co/mSCbeWivnb
महादलित दलित समुदाय के सबसे वंचित समूहों में से एक हैं। मुसहर, जो मुख्य रूप से भूमिहीन खेतिहर मज़दूर के रूप में काम करते हैं, गंभीर गरीबी से पीड़ित हैं और अक्सर सामाजिक गतिविधियों से दूर रहते हैं। उनकी कहानी यहाँ देखें - https://t.co/8HqrUHclgL
क्या आप जानते हैं कि भारत में 27% से ज़्यादा घरों में छुआछूत की प्रथा आज भी जारी है? इससे दलितों को शिक्षा और पानी तक पहुँच जैसे बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जाता है। देखें कि भीमा फाउंडेशन किस तरह से उन्हें उनके अधिकारों का एहसास कराने में मदद कर रहा है-https://t.co/zRbW1G8Sip
भारत में लगभग 30% महिलाएँ शारीरिक हिंसा का सामना करती हैं, और हर साल महिलाओं के खिलाफ़ 400,000 से ज़्यादा अपराध दर्ज किए जाते हैं।
हर हक महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों का दावा करने के लिए ज़रूरी ज्ञान और उपकरण देकर इस मुद्दे से निपट रहा है।
https://t.co/t4p4ps80V8
क्या आप जानते हैं कि भारत का 90% कार्यबल अनौपचारिक क्षेत्र में है? इनमें से 20-30 लाख मोची हैं, जिनमें से कई के पास औपचारिक वित्तीय सहायता तक पहुँच नहीं है। यह कहानी है ऐसे ही एक मोची नीरज की - https://t.co/6uNO40XuRy
उत्तराखंड में 2015 से 2023 के बीच 12,000 से ज़्यादा भूस्खलन हुए हैं, और ये लगातार बढ़ते जा रहे हैं!
उत्तराखंड के गुमनाम नायक द्वारिका प्रसाद सेमवाल का परिचय, जो जंगलों को बचाकर और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए वृक्षारोपण परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहे है- https://t.co/V5cD1iEptI
देश के 90% दिहाड़ी मज़दूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। उन्हें नौकरी की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता है।
कोविड-19 जैसी महामारियों के दौरान ये मज़दूर सबसे ज्यादा असुरक्षित होते हैं। यह कहानी है ऐसे ही एक दिहाड़ी मज़दूर दिनेश की - https://t.co/bQlI1RIAoI
ग्रामीण भारत में, कक्षा 3 से 5 तक के केवल 72.5% बच्चे ही बुनियादी स्तर पर पढ़ सकते हैं। ‘समानता फाउंडेशन’ हाशिए पर रहने वाले समूहों पर ध्यान केंद्रित करते हुए उत्तराखण्ड के दूरदराज़ इलाक़ों में इन बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रहा है। यहाँ देखें उनकी कहानी- https://t.co/fzdZ2CkXdY