अखैगढ़ किला
राजा बदन सिंह के पुत्र अखाई सिंह को नाम की वतन जागीर दी गई थी। वे नाम के पहले ठाकुर थे,बाद में उन्होंने अखाईगढ़ किले और शहर का निर्माण कराया,जो एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बन गया।अब अखाईगढ़ किला अच्छी हालत में नहीं है,इसका उपयोग सरकारी स्कूल के रूप में किया जाता है
@manphoolsaran7 इसमें राजस्थान और बिश्नोई भाई कहां बीच में आ गए ? खैरा साब ने अपनी बात विद प्रूफ कही है अगर वो गलत हुए तो कार्यवाही होगी लेकिन ये जो डेढ़ होशियारी कर रहे हो ये महंगी पड़ जाएगी
@SauDeependra@SachinPilot ये गायत्री जी कौन हैं,पंजाब सरकार के कामकाज को चलाने में उनकी आधिकारिक भूमिका क्या है?वह पंजाब सरकार के बंगले में क्यों रह रही हैं?पंजाब सरकार के बंगलों में कितने अन्य हृदय रोगियों को रहने की अनुमति है ? पंजाब के लोगों को इसका जवाब तो देना पड़ेगा केजरीवाल को
@SauDeependra@SachinPilot सुखपाल खैरा साहेब ने जो भी कहा है वो प्रूफ के साथ कहा है,इन्होंने कोठी नंबर 961 दिखाया है जबकि उन्होंने 960 का बताया था खैर जो भी हो अगर वो गलत निकलें तो उनपे कार्यवाही हो
@Kapil_Jyani_ सुखपाल खैरा साहेब ने जो भी कहा है वो प्रूफ के साथ कहा है,इन्होंने कोठी नंबर 961 दिखाया है जबकि उन्होंने 960 का बताया था खैर जो भी हो अगर वो गलत निकलें तो उनपे कार्यवाही हो
महाराजा सूरजमल ने 1757 में अब्दाली को लिखे पत्र में यह संकल्प लिया था:
"मैंने अपने जीवन के 50 पड़ाव पार कर लिए हैं, फिर भी अपनी जाट कौम को एकजुट करने और अपनी ज़मीन की रक्षा करने का मेरा संकल्प अडिग है।"
महाराजा सूरजमल के समय से ही,जिन पुत्रों को सिंहासन विरासत में नहीं मिला,
उन्हें 'राव राजा' की उपाधि और जागीरें प्राप्त हुईं। कई राव राजा परिवार हैं। उनमें सबसे प्रसिद्ध राव राजा रघुनाथ सिंह का परिवार है, जिन्हें लोकप्रिय रूप से 'काकाजी' कहा जाता है
ठाकुर रतन सिंह का किला
ठाकुर रतन सिंह जी नाहरवार ,वैर तहसील के गाँव सलेमपुर परगना के जागीरदार थे और बहुत ही मजबूत और शक्तिशाली जाट जागीरदार रहे, इनकी पुत्री का विवाह महाराजा सूरजमल के साथ किया गया था जिनका नाम महारानी हसिया जो आज भी इतिहास में दर्ज है
- नाहरा/नाहरवार जाट ❤️🙏
ठाकुर राम किशन सिनसिनवार को महलोनी की जागीर उनके पिता, डीग के राजा बदन सिंह द्वारा दी गई थी। ठाकुर राज सिंह वर्तमान में इस परिवार के मुखिया हैं।
महलोनी बाग रिसॉर्ट ❤️
@Bhagwan1000@SauDeependra@hanumanbeniwal असली वाले हम ही हैं तुम लोग तो लोकतंत्र की मजबूरियों का फायदा उठाकर जबरदस्ती के जाट बनके घूम रहे हो,हमारे सरनेम तो उठा लिए लेकिन उनकी जिम्मेदारी नहीं सीखी, इसलिए तुम्हारे नेता भी तुम्हारी तरह के होते हैं,जो जाट बुजुर्गों और बहन बेटी की इज्जत नहीं कर सकते उन्हें हम जाट नहीं मानते
@Jat_Ethnic इन्हें नॉर्थ के जाट जो इनकी बोली खान पान कल्चर वाले हैं वो तो पराए लगते हैं और बिहारी भइय जो जेनेटिक और सांस्कृतिक तौर पर भी इनसे अलग हैं वो अपने लगते हैं ये तो छोटा स्कैम है जल्दी ही कोई बिहारी खुद को राजपूत बोलकर इनका कोटा खायेगा और ये उसके जाट विरोधी होने पर लहालोट हों लेंगे
@Jat_Ethnic इन्हें समझाया भी है कई बार कि खानदानी राजपूत कभी जाट विरोधी नहीं होगा लेकिन पता नहीं क्या इनसिक्योरिटी इनमें है जो जाट विरोधी दिखते ही उसे पक्का राजपूत मान लेते हैं और उसपे स्खलित हो जाते हैं उम्मीद है ऐसी घटना से सबक मिलेगा