श्री सोनम वांगचुक जी से हमारा अति विनम्र आग्रह और सविनय अपील है कि वो अपना अनशन तोड़ दें। उनका जीवन समस्त विश्व के लिए अनमोल है क्योंकि उसमें मानवता और पर्यावरण के लिए उतनी ही प्रतिबद्धता है जितनी की लोकतंत्र के लिए।
जिस भाजपा सरकार को जगाने के लिए वो आमरण अनशन पर हैं वो तो एक सिद्धांतहीन, भ्रष्ट तंत्र है, उसकी असंवेदनशीलता और हृदयहीनता में किसी के भी त्याग का कोई महत्व नहीं है अत: भाजपाइयों से सदाचार और हृदय-परिवर्तन की कोई भी अपेक्षा निरर्थक है। भाजपाइयों के लिए किसी के जीवन का कोई भी मोल नहीं है। उनके लिए धन ही प्रधान है। वो भ्रष्टाचार से कमाए पैसों के घमंड में चूर हैं। उनमें बदलाव की आशा करना ही व्यर्थ है। जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता। ‘सत्याग्रह’ का महत्व वो क्या जानें जो ‘सत्ताग्रह’ के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं। उन्हें न युवाओं के भविष्य से कुछ लेना-देना है, न उनके माता-पिता और अन्य परिजनों के सपनों से, वो तो ख़ुदगर्ज़ लोग हैं।
लोकतंत्र का गला घोंटनेवाली महापापी-अधर्मी भाजपा और उसके भूमिगत अपंजीकृत संगी-साथियों के गिरोह को हराने और सदैव के लिए हटाने के लिए आपके मनोबल और नैतिकता की महाशक्ति हर सच्चे भारतीय की प्रेरणा बनती रहे और आप देशवासियों, युवाओं, लोकतंत्र और पर्यावरण के संघर्ष के लिए नकारात्मक ताक़तों के ख़िलाफ़ सदैव प्रकाश स्तंभ बने रहें, यही हम सबकी चाह है और प्रार्थना भी।
@Wangchuk66
हर दौर में सत्ता चाहती है कि जनता उन सवालों पर कम बोले, जिनसे उसकी जवाबदेही तय होती है।
लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर कुछ युवा बार-बार याद दिला रहे हैं कि शिक्षा और रोजगार किसी भी लोकतंत्र की सबसे बुनियादी कसौटी हैं।
बारिश, भूख और थकान के बीच भी उनका धैर्य एक सवाल बनकर खड़ा है - क्या युवाओं की आवाज़ सुनी जाएगी, या फिर हर पीढ़ी को अपने भविष्य के लिए इसी तरह सड़क पर बैठना पड़ेगा?
जंतर मंतर पर कई दिनों से CJP का प्रदर्शन चल रहा है। सोनम वांगचुक जी कई दिनों से वहाँ भूख हड़ताल पर बैठे हैं। हम उनकी मांगों का समर्थन करते हैं। धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए।
मेरी सोनम वांगचुक जी से अपील है कि अपनी भूख हड़ताल अब बंद कीजिए। आप देश की धरोहर हैं। मैं परसों, 16 जुलाई को शाम 5 बजे जंतर मंतर जाकर उन्हें अपना समर्थन दूंगा।
"समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध"
17 दिन से आमरण अनशन पर बैठे @Wangchuk66 के लिए "ना मोदी बोलेगा - ना गोदी बोलेगा" आप अपनी अंतरात्मा से पूछिए आप कब तक खामोश रहेंगे ?
क्या आप किसी अनहोनी का इंतजार कर रहे है ?
BJP सरकार का नया जादू 👇
मध्य प्रदेश में 'अदृश्य कॉलेज' पाया गया है।
ये कॉलेज कागजों में तो सारी सुविधाओं से लैस है, लेकिन असलियत में वहां सिर्फ 'खाली जमीन' है।
इस खाली जमीन पर कॉलेज कैम्पस नहीं है, मगर हर साल करीब 150 शिक्षक यहां से ट्रेनिंग लेकर निकलते हैं।
यानी- भ्रष्टाचार चरम पर है और BJP सरकार शिक्षा माफियाओं के साथ मिलकर युवाओं के भविष्य में पलीता लगा रही है।
निर्माण घटिया होगा तभी तो दुर्घटनाएँ होंगीं! सूखा मसाला भरकर पिलर ढाला जा रहा है.
क्या रेलवे के इंजीनियर और ठेकेदार अपने घरों का पिलर भी इसी तरह ढलवाते हैं?
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
सभी बहुत चिंतित हैं। सरकार को बात करनी चाहिए। सरकार नहीं करती है तो समाज को आगे आना चाहिए। सोनम के साथ-साथ छात्र भी अनशन पर बैठे हैं। कितने साल तक परीक्षाओं में चोरी और धांधली को यह देश स्वीकार करेगा। 13 साल बीत गए फिर भी परीक्षाएँ विश्वसनीय नहीं हो सकी हैं। बात केवल परीक्षा की नहीं है, पढ़ाई के मामले में भी जो नुकसान हुआ है, वहाँ से वापसी करना संभव नहीं है।
इसी अवसर पर गंगा की सफाई और अविरलता को लेकर प्रो जी डी अग्रवाल के अनशन को याद करने की ज़रूरत है। 2018 में 109 दिनों के अनशन के बाद उनकी मौत हो गई थी। तब काफी सवाल उठे थे। मीडिया की पुरानी रिपोर्ट आप देख सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को तीन तीन पत्र लिखे। उन पत्रों को निकाल कर पढ़ सकते हैं। गंगा के लिए प्रो जी डी अग्रवाल ने जान दे दी और गंगा के नाम पर राजनीति करने वालों ने उन्हें भुला दिया। गंगा की समस्याओं का समाधान करने के बजाए गंगा के घाट पर आरती का आयोजन कर लोगों के सवालों की धारा मोड़ दी गई। अच्छा होता कि प्रो जी डी अग्रवाल को सुना जाता, गंगा भी साफ होती और तब उसके किनारे आरती की शोभा और दिव्य होती। जो मीडिया जंतर मंतर नहीं जा पा रहा है वह गंगा के नाम पर प्रो जी डी अग्रवाल के अनशन की कहानी के पन्ने फिर से पलट सकता है। गंगा के लिए तो बोल ही सकते हैं।
ये हमारे लिए शर्म की बात है कि सोनम वांगचुक जैसे टैलेंट इस देश में सामान्य न्याय के लिए भूखे मर रहे हैं और अमित शाह-मोदी जैसे लोग प्रधानमंत्री, गृहमंत्री बने घूम रहे हैं। सोनम वांगचुक को कुछ हुआ तो सरकार से संभाले नहीं संभलेगा। हम सोनम वांगचुक के साथ हैं। सोनम वांगचुक ज़िंदाबाद।
सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को 15 दिनों से ज़्यादा हो चुके हैं।
एक नागरिक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कह रहा है। उसकी सेहत लगातार गिर रही है। उसके साथी भी भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। लेकिन सत्ता की चुप्पी अब सिर्फ़ चुप्पी नहीं, लोकतांत्रिक संवेदनशीलता पर एक बड़ा सवाल बन चुकी है।
यह सिर्फ़ शिक्षा मंत्री की जवाबदेही का सवाल नहीं है। यह पूरी मोदी सरकार की जवाबदेही का सवाल है। जब शिक्षा से लेकर रोज़गार, परीक्षा व्यवस्था, संस्थाओं की निष्पक्षता और शासन की पारदर्शिता तक लगातार सवाल उठ रहे हों, तब सरकार का दायित्व जवाब देना होता है, ख़ामोश रहना नहीं।
लोकतंत्र में जनता सवाल पूछती है और सरकार जवाब देती है। अगर सवाल पूछने वालों को लगातार अनसुना किया जाएगा, विरोध की आवाज़ों को नज़रअंदाज़ किया जाएगा और जवाबदेही की जगह सिर्फ़ सत्ता का अहंकार दिखाई देगा, तो यह किसी भी लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
आज ज़रूरत किसी एक व्यक्ति के साथ खड़े होने की नहीं, बल्कि उस लोकतांत्रिक अधिकार के साथ खड़े होने की है, जो हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार देता है।
अगर आज भी जनता अन्याय, जवाबदेही की कमी और लोकतांत्रिक आवाज़ों की अनदेखी पर चुप रही, तो कल सवाल पूछने की जगह भी धीरे-धीरे सिमट सकती है।
सरकारें जनता से बड़ी नहीं होतीं। लोकतंत्र की असली ताक़त जनता है। इसलिए आवाज़ उठाइए, सवाल पूछिए और जवाबदेही माँगिए - क्योंकि लोकतंत्र तभी मज़बूत रहता है, जब नागरिक ख़ामोश नहीं रहते।
CJP नेताओं को हर हाल में समाज के बड़े-बुजुर्गों से बात करके सोनम वांगचुक जी का अनशन तुड़वाना चाहिए। जितना प्रतिरोध जताना था आप उसमें जीत चुके हैं। हिटलर प्रवृति के नेताओं के आगे अनशन करके मर जाना बहुत समझदारी नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान महत्वपूर्ण नहीं है आपकी लड़ाई लंबी है।
59 साल के @Wangchuk66 देश के करोड़ों युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए 14 दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं, उनकी हालत बिगड़ रही है, 9 किलो वजन कम हो चुका है, लेकिन मेलोडी मोदी पर घंटों ख़बर चलाने वाला निर्दयी गोदी मीडिया की आत्मा मर चुकी है उसको करोड़ों युवाओं के मुद्दे से कोई मतलब नही।
तुम कब जागोगे युवा शक्ति?
पहुँचो जंतर मंतर।
आख़िर प्रभु श्री राम के मंदिर से 6 किलोमीटर दूर चंपत राय बंसल ने आलोक बंसल मनीष बंसल और तानवी बंसल से 86 करोड़ रुपये की ज़मीन क्यों खरीदी?
इसी के पास की ज़मीन योगी सरकार ने किसानो से 4 लाख रुपये बिस्वा ली, जबकि चंपत राय बंसल ने 47 लाख रुपये बिस्वा ख़रीदी।