विकास तिवारी @BastarTalkies के नाम से एक यू ट्यूब चैन�� चलाते हैं।
वही बस्तर जो टंगिया, तुम्बा, ढ़ोल, मुर्गा, लंगोट, आग, मचान औऱ घोटूल से ज्यादा- माओवादी आतंकियों के लिए पहचाना जाता रहा है।
औऱ जहां रिपोर्टिंग औऱ पत्रकारिता, आत्महत्या क�� अनिच्छुक कामना से अलग कुछ भी नहीं, वहाँ विकास ने पत्रकारीय कर्म को उस साहस, औऱ उस गरिमा से निभाया है,
जो इस देश के बड़े बड़े नामचीन पत्रकारों मे दुर्लभ है।
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दिल्ली के किसी कार्यक्रम मे उनके उदबोधन का एक वीडियो निगाह मे आया।
कौतूहल वश देखना शुरू किया, तो अंत तक पूरा सुनने से खुद को रोक नहीं पाया। आप भी सुने। पूरा..
उनके चैनल का लिंक इस वीडियो से लें। औऱ कुछ नहीं, तो एक थम्स अप तो कर ही सकते है���
https://t.co/hoKcf3eio6
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विकास भाई, हम एक दूसरे को नहीं जानते। मगर आपके काम को सलामी कबूल करें। इस शानदार उद्बोधन के लिए भी।
❤️🙏
ये न्याय का पहला कदम है- केस दर्ज किया गया है।
साहिल के शरीर और आंख में छर्रे हैं। इनके दिल के पास भी छर्रे लगे हैं, एक आंख से दिखाई नहीं दे रहा है।
हम सुबह 11:30 बजे FIR करवाने आए थे, लेकिन करीब 06:45 बजे FIR दर्ज की गई है।
सोचने वाली बात है कि जब दिल्ली के बीच मौजूद पुलिस स्टेशन पर न्याय मिलने में इतना समय लग रहा है, तो गांव और छोटे शहरों के पुलिस स्टेशन में क्या होता होगा।
हमने हिंदुस्तान के एक नागरिक और उसके परिवार के लिए न्याय मांगा और उसमें भी करीब साढ़े सात घं��े लग गए।
जब होम सेक्रेटरी और अमित शाह ने फाइनल परमिशन दी, तब जाकर पुलिस ने FIR दर्ज की। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि FIR रोक कौन रहा था।
पुलिस FIR करना चाहती थी, लेकिन 'ऊपर' से न्याय पर ब्रेक लगा दी गई थी।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
जंतर मंत��� पर पुलिस किसी को भी अंदर नहीं जाने दे रही है? क्यों- इस समय क्या हो जाएगा?
Unlawful Assembly 5 लोगों की होती है- हम पाँच लोग नहीं है? फिर पुलिस क्यों नहीं जाने दे रही?
ऊपर वे ऑर्डर है!
और अधिकतर पुलिस ऑफि��र ने नाम के बिल्ले भी नहीं लगाए है ! पुलिस अपनी ड्यूटी कर रही है पर करवाने वालों को शर्म नहीं आ रही है?
गजब है इस देश में कानून का हवाला देकर कैसे कानून की धज्जियाँ उड़ाई जाती है!
#NEET #JantarMantar #Delhi #StudentsVoice
जंतर मंतर –
RAF ने फिर प्रदर्शनकारी छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े। छात्र भी एकदम भिड़ गए। कई पुलिसवालों से उनके डंडे छीन लिए। छात्र इतने आक्रामक थे कि दिल्ली पुलिस और RAF को पीछे हटना पड़ा।
22 जुलाई, रात 8.30 बजे
महात्मा गांधी को कुली कहकर अंग्रेज़ों ने ट्रेन से बाहर फेंक दिया था। इस अपमान का बदला भारत ने अंग्र��ज़ों को खदेड़कर लिया। आज भारत के युवाओं को कॉकरोच कहा गया है, देश भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकेगा।
@Jairam_Ramesh @Pawankhera
मोदी ही नहीं चाहिए ये clear हो गया है.. मोदीजी आप क्यों ज़बरदस्ती लोगों के मम्मी पापा मसीहा बने हो, लोग नहीं चाहते है आपको.. इतना मौज काट लिया है झूठ फरेब करके, अब देश को बख्स दो न प्लीज
बहुत से लोग सवाल कर रहे हैं. राहुल गांधी CJP के प्रोटेस्ट में क्यों नहीं जा रहे.
मतलब यहां भी सवाल मोदी से नहीं किया जा रहा, चालाकी से निशाना राहुल गांधी को बनाया जा रहा है.
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल कर रहे हैं. उनकी मांग सरकार से है, जवाबदेही भी सरकार की है. मोदी की है.
राहुल गांधी वहां जाएं या न जाएं ये सवाल ही नहीं होना चाहिए.
आपका फोकस ये होना चाहिए कि मोदी सरकार कितनी क्रूर है कि आपकी सुन नहीं रही.
बाकी जो लोग सवाल पूछ रहे हैं - सवाल उनसे भी है. सोनम वांगचुक भारत जोड़ा यात्रा में क्यों नहीं जुड़े.
जब EVM, वोट चोरी, SIR के खिलाफ राहुल गांधी आवाज उठा रहे थे, तब सोनम वांगचुक ने साथ क्यों नहीं दिया.
तब तो किसी ने नहीं पूछा कि सोनम खामोश हैं, इसका मतलब है कि वो राजनीति कर रहे हैं.
सबकी लड़ाई अपनी है, सोनम वांगचुक और CJP की लड़ाई अपनी है.
आपने अपने प्रदर्शन की शुरूआत ही इससे की है कि विपक्ष खराब है.
अब जब भीड़ नहीं जुट रही, लोग साथ नहीं आ रहे तो आप उसी विपक्ष को अपने साथ आने को कह रहे हैं.
उल्टा धमका भी रहे हैं कि आपको लोग जान जाएंगे. जबकि आपको अपनी ये धमकियां मोदी के लिए रखनी चाहिए- जिसका नाम भी आप लोग नहीं लेते.
धर्मेंद्र प्रधान अपनी कुर्सी पर अपने मन से नहीं बैठा, मोदी ने बैठा रखा है, इसलिए सही जगह टारगेट कीजिए.
विपक्ष को खराब बताकर आप मोदी को ही मजबूत करने में लगे हैं. फिलहाल तो ऐसा ही लगता है.
आप एक तरफ अपने आंदोलन को "अराजनीतिक" बनाना चाहते है।
खुद को राजनीति से दूर रखना चाहते है। किसी की आवाज में आवाज मिलाना नही चाहते, कि पेंट न कर दिये जायें। समान स्वर में पक्ष विपक्ष को गरियाते है,
और नई पीढ़ी को "तटस्थ बुद्धिजीवी" का स्वांग रच��े की धूर्तविद्या सिखाते हैं।
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औऱ फिर चाहते है कि वही राजनीतिक शख्सियतें आकर आपकी आवाज को वजन दें?? काहे भई?
एकतरफा चलता है क्या?
पोलटिकल पार्टी, पब्लिक के हाथ का टूल होती है। अगर आप मुद्दों पर अडिग है, तो फिर उस मुद्दे से मैच करने वाली पार्टी के साथ हो। दौर बदला, रीति नीति बदली, अब दूसरी कोई पार्टी उस सवाल पर आपके विचार से मैच कर रही है, तो पार्टी बदल दीजिये।
नागरिक का विचार अडिग रहना चाहिए।
पार्टी नही।
नागरिक की तटस्थता लोकतंत्र का जहर है। लेकिन यहाँ त��� एक तरफ भक्त है, दूसरी तरफ कमबख्त हैं। भक्त रोज अपना स्टैंड बदलते है, मगर पार्टी नही।
दूसरी तरफ कमबख्त तटस्थ हैं, सुपरलेटिव डिग्री राजनीतिक बकलोल हैं। न उनके स्टैंड का पता, न राजनीतिक चॉइस का। सोनम भी उसी श्रेणी के हैं।
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आंदोलन, खुद एक पोलिटिकल एक्ट है। लेकिन जनता को बिना पॉलिटिक्स, बिना पॉलिटकल पार्टी को साथ लिए, पॉलिटकल एक्ट करना है..
तो करके भरजो�� देख ले।
यह लड़ाई, लड़ने के पहले आपने किसी से कोई कोऑर्डिनेशन किया नही। जब अकेले लड़ने की आपकी चॉइस थी, तो बहुत बड़ा बड़प्पन था?? ठीक है।
तो अब मुंह काहे चियार रहे?? अकेले ही लड़िये। जितनी दूर तक जाये, जाने दीजिये। रील, लाइक्स, सोशल मीडिया पर दुर्गर्ष सपोर्ट तो मिल ही रहा है न।
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बहरहाल, सोनम की रिहाई के लिए कई पोस्ट की है। मेरी सहानुभूति है, उन्हें पसन्द करता हूँ। इसलिए उनकी चिंता भी है। उनके साथियों को उन्हें जूस वूस पिलाकर, झटपट बस में लादकर लद्दाख रवाना करना चाहिए।
जिंदगी रही साहब, तो फिर लड़ लेंगे।
साल 2020 में जब बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने जेएनयू पहुँच कर लेफ्ट के छात्रों का समर्थन किया था।
इस प्रोटेस्ट में दूसरे संगठन से जुड़े कुछ लोगों ने लेफ्ट के छात्रों पर हमला कर दिया था , जिसके बाद दीपिका वहां पहुंची थीं🔥🔥
और मौन रह कर छात्रों का समर्थन की थी।
क्या आज के समय में कोई बॉलीवुड का एक्टर या एक्ट्रेस इस तरह दुबारा विपक्ष के साथ खड़ा होने की हिम्मत जुटा पाएगा ?
शायद नहीं !