'भारत जोड़ो यात्रा' में मुझे लाखों युवा मिले जो डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, IAS बनना चाहते थे और सेना में जाना चाहते थे।
उस दौरान मेरे मन में सवाल आया कि हमारे देश का एजुकेशन सिस्टम इन युवाओं को सिर्फ 5 ऑप्शन ही क्यों दे रहा है? फिर मैंने यात्रा के दौरान कुछ लड़कियों से बात की और पूछा- आप सच में दिल से क्या करना चाहती हैं तो सभी ने इन 5 प्रोफेशन के अलावा अलग-अलग जवाब दिए।
यानी देश का एजुकेशन सिस्टम बच्चों के सपने पूरे नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें ऑप्शन दे रहा है। - नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi जी।
📍 छात्रों की गूंज—कोटा महारैली #ChhatronKiGoonj
जब देश का विद्यार्थी वर्षों की मेहनत के बाद भी पेपर लीक, रद्द परीक्षाओं, अधूरी भर्तियों और बेरोज़गारी की मार झेलने को मजबूर हो, तब उसकी आवाज़ को बुलंद करना सिर्फ़ राजनीति नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी बन जाती है।
इसी जिम्मेदारी को निभाते हुए विपक्ष के नेता @RahulGandhi जी “छात्रों की गूंज” अभियान के माध्यम से देशभर के विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर रहे हैं। वे उन युवाओं की पीड़ा, संघर्ष और सपनों को सुन रहे हैं, जिनका भविष्य बार-बार व्यवस्था की लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।
यह अभियान उन लाखों छात्रों की आवाज़ है, जिनकी परीक्षाएँ रद्द हुईं, जिनके परिणाम अटके, जिनकी भर्तियाँ वर्षों तक अधर में लटकी रहीं और जिनके सपनों को बार-बार कुचला गया। “छात्रों की गूंज” का उद्देश्य केवल समस्याएँ सुनना नहीं, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय बहस का विषय बनाकर जवाबदेही तय करना और युवाओं को उनका अधिकार दिलाना है।
आज देश का युवा दया नहीं, न्याय मांग रहा है। वह भाषण नहीं, अवसर मांग रहा है। वह वादे नहीं, अपने भविष्य की सुरक्षा मांग रहा है।
राहुल गांधी जी की यह पहल उन करोड़ों विद्यार्थियों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास है कि उनकी आवाज़ दबाई नहीं जाएगी, उनके संघर्ष को अनदेखा नहीं किया जाएगा और उनके हक़ की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।
#ChhatronKiGoonj
कल नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी छात्रों और युवाओं के साथ NEET 2026 पेपर लीक तथा अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं को लेकर संवाद करेंगे।
मैं सभी छात्रों और युवाओं से निवेदन करता हूँ कि वे कोटा, राजस्थान में आयोजित इस महत्वपूर्ण संवाद का हिस्सा बनें और अपनी आवाज़ बुलंद करें।
🗓️ 17 जून । 📍दशहरा मैदान, कोटा
Tomorrow in Kota, the LoP Rahul Gandhi ji, will interact with young people and students in particular, regarding the NEET 2026 paper leak and several other important issues concerning their future.
It is deeply concerning that more than 22 lakh students were affected by this paper being leaked. Additionally, lakhs of students suffered due to CBSE evaluation system.
I urge students and young people to join Rahul ji for this important conversation and give strength to the demand for accountability and fairness.
#ChhatronKiGoonj
कार्यकर्ता तैयार हैं
करौली की धरती अपने प्रिय नेता के स्वागत के लिए उत्सुक है!
अब बस इंतज़ार है आदरणीय सचिन पायलट जी के आगमन का...
जनसैलाब उमड़ने को बेताब है
@SachinPilot
हमें धरना देना पड़ा है कल इलेक्शन कमीशन क्या कहता है!
उसके आधार पर निर्णय लेंगे!
यह लोकतंत्र की सरासर हत्या कर रहे हैं निर्वाचन आयोग को हस्तक्षेप करना पड़ेगा 🔥
यूथ आइकॉन "सचिन पायलट जी"
@SachinPilot@priyankagandhi@RahulGandhi
कल दिनांक 10 जून 2026, बुधवार को AICC महासचिव श्री @SachinPilot जी के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं किसान नेता स्वर्गीय राजेश पायलट जी की मूर्ति अनावरण एवं विशाल किसान सम्मेलन में शामिल रहूंगा।
🕙 समय: प्रातः 12:00 बजे
📍 स्थान: चामुंडा माता मंदिर, सकरघाट, करौली (राजस्थान)
मित्रो, आप सहमत हों या असहमत, अपने विचार अवश्य व्यक्त करें कि राजस्थान की राजनीति में यह जो घटित हो रहा है, उस पर आपके मुखर विचार क्या हैं? ख़ासकर इस लेख पर जो आज रशीद किदवई ने दिल्ली से एनडीटीवी पर लिखा है :
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बीते कुछ घंटों में राजस्थान की राजनीति और कांग्रेस के भीतर शुरू हुए नए उद्वेलन को लेकर काफी घटनाएं हुई हैं। सबसे पहले पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने अपने जीवन का सबसे ख़तरनाक़ हमला बोला। उम्मीद थी कि अब पायलट पलटवार करेंगे; लेकिन वे चुप रहे। अब मीडिया में सब लोग अपनी-अपनी उपस्थिति और नेताओं के साथ अपने-अपने कोण के अनुसार तो टिप्पणियाँ कर ही रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसी अनहोनियां हैं, जो हुए ही जा रही हैं। सोमवार रात को उमांशकरसिंह ने एक लंबा पोडकास्ट किया। इस बीच और बहुत कुछ आया। आज प्रमुख पत्रकार और लेखक रशीद किदवई ने राजस्थान के घटनाक्रम पर एक लंबा लेख लिखा है।
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रशीद किदवई वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं। सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली से स्नातक और यूनिवर्सिटी ऑफ लेस्टर से मास कम्युनिकेशन में पीजी हैं। ब्रिटिश एवं कॉमनवेल्थ ऑफिस फेलोशिप पर हैं। SONIA : A Biography, 24 Akbar Road, Neta Abhineta और Ballot जैसी चर्चित पुस्तकों के रचयिता हैं। द टेलीग्राफ, कोलकाता के पूर्व एसोसिएट एडिटर रहे हैं। दैनिक जागरण, अमर उजाला, The Tribune, ThePrint, ABP News सहित दर्जनों हिंदी, अंगरेज़ी व उर्दू प्रकाशनों में नियमित स्तंभकार तथा टीवी-रेडियो पर सक्रिय राजनीतिक टीकाकार हैं। उनका लेख ज़ोरदार है :
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राहुल द्वारा उपेक्षित, पायलट से परेशान: अशोक गहलोत के महापतन की अंदरूनी कहानी
कांग्रेस के कई नेता यह सोच रहे हैं कि गहलोत, जो इंदिरा, संजय, राजीव, नरसिम्हा राव, सीताराम केसरी, सोनिया और राहुल के दौर में पार्टी के साथ टिके रहे, अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम पड़ाव पर क्यों भटक गए। वे पूछते हैं ; "अशोक गहलोत को गुस्सा क्यों आता है?"
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रशीद किदवई . सबसे आगे हैं अशोक गहलोत, 75 वर्षीय, बेताब और पूरी तरह आक्रामक। क्या यह दिल्ली-जयपुर-जोधपुर की गर्मी है, राज्यसभा सीट से वंचित होना है, या पिछले तीन वर्षों से नेहरू-गांधी परिवार का उनसे लंबी, सीधी बातचीत करने से इनकार है, या फिर AICC के प्रमुख पदों जैसे कोषाध्यक्ष, संगठन प्रभारी महासचिव से बाहर रहने की आशंका है, जिसने गहलोत को पिछले कुछ दिनों में बेलगाम कर दिया है?
जयपुर में गहलोत ने खुद ही उस शर्मनाक अध्याय को नया रंग देने की कोशिश की, जब उनके भीतर के आजीवन कांग्रेसी ने सोनिया और पूरी पार्टी को चौंका दिया था राजस्थान कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाने से इनकार करके। उस समय सोनिया ने गहलोत को दिल्ली आकर AICC के 88वें अध्यक्ष का पद संभालने को कहा था। गहलोत ने, यह भांपते हुए कि उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी सचिन पायलट उनके उत्तराधिकारी होंगे, 92 विधायकों को पार्टी हाईकमान के फैसले की अवहेलना करने के लिए तैयार कर लिया। 7 जून 2026 को गहलोत ने इस दावे को खारिज किया कि उन्होंने कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ विद्रोह किया था। उन्होंने कहा कि विधायक पार्टी की आंतरिक गतिशीलता के तहत काम कर रहे थे, न कि केंद्रीय नेतृत्व का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि मीडिया के रवैये ने जनधारणा को प्रभावित किया, जिससे स्थिति की गलत समझ बनी।
'यह एक षड्यंत्र है'
अशोक गहलोत ने कहा कि उनका मानना है कि स्थिति की गलत व्याख्या की गई और यह एक सुनियोजित षड्यंत्र जैसी लगी। उन्होंने कहा, "जो हालात सामने आए... मुझे लगता है यह एक षड्यंत्र था। AICC के पर्यवेक्षक अचानक आए, एक तमाशा हुआ और मेरी बदनामी हो गई।"
गहलोत के इस विस्फोट से यह स्पष्ट नहीं होता कि वे किस पर 'षड्यंत्र' का आरोप लगा रहे हैं राहुल गांधी पर, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर, AICC पर्यवेक्षक अजय माकन पर या AICC के संगठन प्रभारी महासचिव केसी वेणुगोपाल पर?
जानकार सूत्रों का कहना है कि राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात न मिलने से ज्यादा गहलोत को इस बात का डर है कि सचिन पायलट राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में वापस आ सकते हैं। अगर पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा की जगह लेते हैं; जो लगभग छह वर्षों से RPCC अध्यक्ष हैं तो 49 वर्षीय पायलट नवंबर-दिसंबर 2028 में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार बन जाएंगे।
पीछे छूटा हुआ नेता?
गहलोत की दूसरी चिंता पार्टी में उनकी बढ़ती अप्रासंगिकता है। इस अनुभवी चुनावी योद्धा को न तो परामर्श के लिए बुलाया जाता है, न ही किसी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए विचार किया जा रहा है। कमलनाथ की तरह, उनके समर्थकों ने यह कथा फैलाने की कोशिश की कि अगर पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री को राज्यसभा की सीट दी जाए तो वे 24 अकबर रोड लुटियंस दिल्ली का एक टाइप-VIII बंगला अगले छह साल के लिए पार्टी को दे देंगे। कांग्रेस, जो इंदिरा भवन, रौज एवेन्यू में अपने नए मुख्यालय में स्थानांतरित हो चुकी है, पर 24 अकबर रोड खाली करने का दबाव है, जो जनवरी 1978 से फरवरी 2025 तक दशकों तक पार्टी का कार्यालय रहा। लेकिन राहुल गांधी इस घर को 'पार्टी को दान' करने के इशारे के प्रति उदासीन बताए जाते हैं।
'दिग्गी राजा' की कहानी
एक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता की कहानी याद आती है दिग्विजय सिंह। संजय गांधी के जमाने से 50 से अधिक वर्षों के अपने अच्छे मित्र की तरह, 79 वर्षीय दिग्विजय सिंह नेताओं के बीच नेता; राज्यसभा का कार्यकाल हाल ही में समाप्त होने के बाद एक अनिश्चित राजनीतिक भविष्य का सामना कर रहे हैं। सेवानिवृत्ति, बागबानी, संस्मरण लिखना या संगीत सुनना; यह 'दिग्गी राजा' की खुशी का विचार नहीं है। लेकिन पार्टी के खिलाफ शिकायत पालने या षड्यंत्र का आरोप लगाने की बजाय, दिग्विजय ने राहुल, सोनिया और पार्टी नेतृत्व को लोकसभा के दो कार्यकाल और राज्यसभा के दो कार्यकाल देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन की जीत सुनिश्चित करने के लिए वे 'सब कुछ' करेंगे।
राजनीतिक स्तर पर, दिग्विजय, गहलोत की ही तरह, राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में विकल्पों की कमी महसूस कर रहे हैं। उनके पुत्र जयवर्धन सिंह मध्यप्रदेश की राजनीति में अच्छी स्थिति में हैं, जिससे पिता की गृहराज्य में भूमिका सीमित हो गई है। इसी तरह AICC सचिवालय में भी रघोगढ़ के पूर्व राजा, जो प्रसिद्ध सिंधिया वंश से टकराने के इतिहास के लिए जाने जाते हैं, के लिए कोई पद या भूमिका प्रतीक्षारत नहीं है। रोचक बात यह है कि सितंबर-अक्टूबर 2022 की एक त्वरित समीक्षा बताती है कि जब अशोक गहलोत ने कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ विद्रोह किया, तब दिग्विजय AICC के 88वें अध्यक्ष बनने के बेहद करीब थे और अंततः खरगे का नाम इस प्रतिष्ठित पद के लिए सामने आया।
उनके पास योग्यता की कमी नहीं थी
कांग्रेस में ऐसे नेताओं की कोई कमी नहीं जो दिग्विजय को बड़े सम्मान से देखते हैं। उनके अनुसार राहुल गांधी को दिग्विजय को राजनीति से विराम न लेने के लिए मनाने की कोशिश करनी चाहिए। अनौपचारिक स्तर पर राहुल गांधी को सुझाया गया है कि वे दिग्विजय की सेवाओं का उपयोग संतों, गुरुओं और हिंदू धार्मिक संस्थाओं के प्रमुखों से संपर्क के माध्यम के रूप में करें, ताकि बहुसंख्यक समाज को साधा जा सके। दिग्विजय 'सनातन धर्म' के मुखर समर्थक रहे हैं, 'हिंदुत्व' का विरोध करते रहे हैं और अक्सर BJP, VHP, RSS तथा अन्य को 'सच्चे हिंदुत्व की भावना' को परिभाषित करने के विषय पर शास्त्रार्थ या बहस की चुनौती देते रहे हैं।
पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि राहुल गांधी दिग्विजय की उपलब्धियों पर ध्यान दें तो उन्हें कई 'मील के पत्थर' मिलेंगे। फरवरी 2002 में उन्होंने 'दिघौरी सम्मेलन' आयोजित किया था, जिसका उद्देश्य राम जन्मभूमि आंदोलन पर VHP के वर्चस्व को तोड़ना था। जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और डॉ. मुरली मनोहर जोशी मानव संसाधन विकास मंत्रालय संभाल रहे थे, तब कांग्रेस के मुख्यमंत्री के रूप में दिग्विजय ने विश्वविद्यालय शिक्षा में ज्योतिष को एक विषय के रूप में शुरू करने का समर्थन किया था; जिसने कांग्रेस में कई लोगों को चौंका दिया। अक्टूबर 2017 से अप्रैल 2018 के बीच दिग्विजय ने नर्मदा के आसपास एक कठिन पदयात्रा की; 192 दिन चलते हुए मध्यप्रदेश की 230 में से 166 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हुए 3,325 किलोमीटर की दूरी तय की। दिसंबर 2018 के चुनावों में कांग्रेस ने राज्य विधानसभा में BJP को सफलतापूर्वक हराया।
दिग्विजय सिंह उन चंद राजनेताओं में से भी हैं जो तीनों स्तरों नगर पालिका, राज्य विधानसभा और संसद में निर्वाचित प्रतिनिधि रहे हैं। वे नगर निगम के प्रमुख, विधायक, राज्य मंत्री, लोकसभा और राज्यसभा सांसद तथा मुख्यमंत्री रहे हैं, इसके अलावा अनेक पार्टी पदों पर भी रहे हैं। 2012 के उत्तरप्रदेश चुनावों के दौरान वे राज्य के AICC महासचिव प्रभारी थे और राहुल के साथ इतनी निकटता से काम किया कि कई लोग उन्हें राहुल का 'मेंटर' कहने लगे। पुराने लोग याद करते हैं कि जब दिग्विजय 1980 में पहली बार मंत्री बने, तो एक पूर्व राज्य मुख्य सचिव ने उन्हें सलाह दी थी; "राजनीति में पैसा जुटाने के तीन तरीके हैं हरजाना (कराधान), जबरना (जबरदस्ती) और नजराना (उपहार)। अगर कभी जरूरत पड़े तो तीसरा रास्ता चुनना।"
गहलोत, हालांकि, दिग्विजय नहीं हैं। उनके बस की बात नहीं कि पार्टी हाईकमान को अपना भाग्य तय करने दें। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि गहलोत का हालिया विस्फोट पार्टी में अच्छा नहीं लगा। एक पार्टी पदाधिकारी ने तो यहां तक संकेत दिया कि इससे 2028 में उनकी सरदारपुरा सीट भी जा सकती है। कांग्रेस में कई लोग यह सोचकर हैरान हैं कि गहलोत, जो इंदिरा, संजय, राजीव, नरसिम्हा राव, सीताराम केसरी सोनिया और राहुल के पूरे दौर में पार्टी के साथ खड़े रहे, 75 वर्ष की परिपक्व आयु में, अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम पड़ाव पर क्यों भटक गए। वे पूछते हैं :
"अशोक गहलोत को गुस्सा क्यों आता है?"
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यह अंगरेज़ी से हिन्दी का बहुत ही ख़राब अनुवाद है और मेरी समझ के अनुसार किया गया है। यह लेख एक तरह से साभार यूज किया जा रहा है। यह लेख राजस्थान की राजनीति पर है और प्रमुख प्रतिपक्षी दल पर है तो आपके विचार जानना बहुत ही ज़रूरी हैं। मैंने गहलोत साहब के बयान का भी हिस्सा पूरा का पूरा यहाँ दिया था।
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मूल आलेख के लिए एनडीटीवी की वैबसाइट पर जाएं। लिंक ये है :
https://t.co/RZQ2FiPtVD
@ndtvindia@ndtv@rasheedkidwai
@AadeshRawal सर,
श्री अशोक गहलोत जी परेशान लग रहे हैं क्योंकि INDIA जनबंधन मीटिंग के बारे में किसी ने उनसे कॉन्टैक्ट नहीं किया है। उन्हें लगता है कि कांग्रेस पार्टी में वही अकेले "जादूगर" हैं और वे इस मामले में ज़्यादा पहचान और शामिल होने की उम्मीद कर रहे हैं।
Sir,
Shri Ashok Gehlot Ji appears to be upset because nobody has not contacted him regarding the INDIA Janbandhan meeting. He seems to feel that he is the only "magician" in the Congress party and is expecting greater recognition and involvement in the matter.
आखिरकार मेरी हर बात पे मुहर लगाते हुए बौखलाहट में ही सही अपना अलसी चेहरा और रंग दिखा ही दिया... आज सीधे सोनिया गांधी जी और कांग्रेस पार्टी को षड्यंत्रकारी बोलकर अपनी असलियत सबके सामने ले आए... जो बातें बंद कमरे में बैठकर मुझसे किया करते थे, जिस तरह की अभद्र और घटिया बातें राहुल गांधी जी और सोनिया जी के लिए किया करते थे सारी सीमाएं लांघते हुए आज उस सोच को सरेआम कर दिया... अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए तमाम तरह के षड्यंत्र रचकर पार्टी और आलाकमान की पीठ में छुरा घोंपकर आज बोल रहे हैं सोनिया गांधी और कांग्रेस ने मेरे खिलाफ बहुत बड़ी कॉन्सपिरेसी की...
21 सीटें आने के बाद भी आपको मुख्यमंत्री बनाया ये कॉन्सपिरेसी थी...??
तीन बार प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया ये कॉन्सपिरेसी थी...??
या 2020 के सरकार बचाने के झूठे तमाशे के बाद आपको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की मंशा ये कॉन्सपिरेसी थी...??
"मेरा इस्तीफा हमेशा सोनिया गांधी जी के पास रहता है, वो जब चाहें जब उसे स्वीकार कर सकती हैं"
"मुझे तीन बार प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया"
"मैं संतुष्ट नहीं अति संतुष्ट राजनेता हूँ"
"मैं कांग्रेस का अनुशासित सिपाही हूँ, कांग्रेस पार्टी ने मुझे सब कुछ दिया है"
बोलने वाले दोहरे चरित्र वाले छद्म गांधी वेष धारी ने बड़ी बेशर्मी से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को षड्यंत्रकारी कहकर देश के लाखों कांग्रेसियों की भावनाओं को बुरी तरह ठेस पहुंचाई है...
कहते हैं व्यक्ति स्वयं ही अपना दुश्मन होता है उसी कहावत को चरितार्थ करते हुए सचिन पायलट से बेंतहा नफ़रत ने इनका वास्तविक रूप सबके समक्ष ला दिया है..
और आखिर में कह दूँ सचिन पायलट का नुकसान मीडिया वालों ने नहीं सिर्फ आपने किया है...