पहले जब जनसंवाद केंद्र @jharkhand181 कार्यरत था तब ऐसे कॉल आने पर तुरंत फॉलो अप कर सहायता पहुंचाना सुनिश्चित किया जाता था। लेकिन, जनहित में कार्य कर रही उस व्यवस्था को भी बंद कर दिया गया। कहाँ जाए जनता अपनी समस्या लेकर। क्या मृत्यु होने के उपरांत सहायता मिलेगी ?
सिर्फ #भाजपा शासित राज्यों को #कोसने से काम नही चलेगा। अगर #व्यवस्था को #बेहतर बनाना चाहते हैं तो आवाज तो हर उस मुद्दे पर #समस्त_सरकारों के #विरोध में उठानी पड़ेगी जहां जहां #गलत हो रहा है।
खैर झारखंड की राजधानी रांची में स्थापित राज्य के सबसे बड़े अस्पताल #रिम्स का ये हाल हैं
कभी-कभी पेट भरने के लिए नहीं अपनी दिल की तसल्ली के लिए भी इन गरीब लोगों से कुछ खरीद लिया करें कुछ खा लिया करें यह लोग पैसा कमाने के लिए नहीं अपनी जिंदगी चलाने की जंग लड़ रहे हैं इनकी सहायता जरूर करें जिससे इन बुजुर्गों के साथ हमारी आपकी इंसानियत भी जिंदा रहे।
बहुत ही उम्दा सर। ये कार्य सरकार का है लेकिन आज सरकार मूक दर्शक बने हुए है। झारखंड के युवाओं की रोजगार की चिंता न तो सरकार (@JmmJharkhand@INCJharkhand )को है और न ही विपक्ष @BJP4Jharkhand को। हम भी प्रयास कर रहे हैं कि आपकी ही तरह लोगों की सहायता करें। 🙏🙏
प्रशासन को जवाब देना चाहिए कि आज तक इन्हें लाभ क्यों न मिला? किस प्रमाण पत्र का इंतजार किया जा रहा था अब तक? @RupeshKSingh85 भाई आपको साधुवाद, आप इनकी आवाज बने। आप जैसे लोगों पर गर्व है।
यह 50% दिव्यांग आदिवासी दुमका प्रखंड कार्यालय का लगभग 2 साल से चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक इनका दिव्यांग पेंशन नहीं बना है। ये दुमका प्रखंड के राजबांध पंचायत के मोहुलबुना गांव के रहनेवाले शिव चरण हांसदा है।
मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी, कृपया इनकी मदद करें। 1/2
@DumkaDc
माननीय मंत्री @MithileshJMM जी ये सड़क पलामू जिले के मेदिनीनगर नगर निगम (सेमरताड़-कल्याणपुर मुख्य पथ) की है। जो विगत 10 सालों से जर्जर है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। सड़क इतनी जर्जर है कि पैदल चलना भी मुश्किल है। ध्यान दें।
काम हो... और दुरुस्त हो ! यही हमारी सरकार एवं माननीय मुख्यमंत्री.@HemantSorenJMM जी का संकल्प है। आगामी वर्ष गढ़वा सहित संपूर्ण राज्य के लिए एक नई कार्य संस्कृति लेकर आएगा.....ऐसा विश्वास दिलाता हूं। जोहार 🙏🙏.
@HemantSorenJMM@JharkhandCMO
@BJP4Jharkhand सरकार अपने कार्यकाल में ही इन्हें स्थायी कर देती तो आज ये दिन न आता। शायद उस सरकार में दूरदर्शिता की कमी थी। ऐसे कई और फैसले हैं जो तत्कालीन सरकार लेती तो आज उसे सत्ता से नहीं जाना होता।
अपनी नौकरी बचाने के लिए झारखण्ड सरकार से इंसाफ मांग रहे सहायक पुलिसकर्मियों पर की गई बर्बरतापूर्ण कार्रवाई दूर्भाग्यपूर्ण है। .@BJP4Jharkhand सरकार ने इन्हें बहाल किया था। इनकी सेवा ली थी। नक्सल विरोधी अभियान और चुनाव में इनका सहयोग रहा और वर्तमान सरकार इन्हें हटाने पर अड़ी है।
आप बेबाकी से सच्चे जनप्रतिनिधि का काम कर रही हैं। प्रशासन को भी संवेदनशील होकर जल्द से जल्द जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए। तब जाकर नया झारखंड हम सब के सामने होगा।