कबीर साहेब प्रकट दिवस
* वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए। कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा हैं।
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#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
हिन्दू धर्म के धार्मिक ग्रंथ ऋग्वेद मंडल 9
सूक्त 1 मंत्र 9 में लिखा है कि,
परमेश्वर जब भी शिशु रूप में पृथ्वी पर आते हैं तो उनका पालन पोषण कुंवारी गायों के दूध से होता है।ये बात हमारे ग्रंथों में लिखी थी। लेकिन अभी तक हमको नहीं बताया गया।
#GodMorningSunday
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण,
वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं।
#GodMorningSunday
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
"कबीर साहेब प्रकट दिवस" वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया।
जीव उदारन तुम को तारन,
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं।
2Days Left Kabir Prakat Diwas
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। उस🙏🙏।
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अजन्मा परमेश्वर, जन्म-मृत्यु से परे कबीर साहेब
कबीर साहेब के न कोई माता-पिता हैं, न उनका जन्म-मृत्यु का कोई बंधन है। वे अविनाशी और सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा हैं,जो हर युग में जीवों के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर प्रकट होते हैं
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
संत गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी अमरवाणी में स्पष्ट किया है कि जिसके जन्मदाता कोई माता-पिता नहीं हैं और जिसके जन्म का कोई प्रमाण नहीं है वह केवल पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब है।
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♦️ जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं। संत रामपाल जी महाराज की पावन
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर परमात्मा आज से 600 वर्ष पहले काशी शहर में लहरतारा तालाब में सशरीर प्रकट हुए थे कमल के फूल पर और आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के रूप में धनाना आश्रम में विराजमान है दुनिया वालों पहचाना हो तो पहचान लो।
2Days Left Kabir Prakat Diwas
#संतरामपालजी_का_वरदान#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान
खारे व गर्म पानी के अभिशाप से मुक्त हुआ गांव बिधलान
1500 फुट गहरे सरकारी ट्यूबवेल के हानिकारक खारे व गर्म पानी से चर्म रोगों से पीड़ित ग्रामीणों के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
भव्य निमंत्रण 🙏🏻
आप एवं आपका पूरा परिवार सादर आमंत्रित हैं।
संत रामपाल जी महाराज जी की असीम कृपा से आयोजित 629वें कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस के पावन उत्सव में सपरिवार पधारकर इस दिव्य आध्यात्मिक आयोजन का लाभ प्राप्त करें।⤵️🙏
2Days Left Kabir Prakat Diwas
#संतरामपालजी_का_वरदान#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान
जींद के मेहरड़ा गांव में 3.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर और समसिंबल पंप लगवाकर संत रामपाल जी महाराज ने 30 साल पुरानी जल किल्लत का स्थायी समाधान किया।
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सच्चे समाज सुधारक
संत रामपाल जी महाराज दहेज प्रथा उन्मूलन
समाज को सबसे बड़ी बीमारी 'दहेज प्रथा' से मुक्त करने का ऐतिहासिक कार्य संत रामपाल जी महाराज कर रहे हैं।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
600 साल पुराना रहस्य, आज भी काशी की धरती गवाह है!
कबीर साहेब अविनाशी परमात्मा है जो हर युग मे जन्म नही लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते है।
कलियुग मे काशी के लहरतारा तालाब मे कमल के फूल पर, सन् 1398 की ज्येष्ठ पूर्णिमा को सशरीर प्रकट हुए । ⤵️⤵️
#संतरामपालजी_का_वरदान
खारे व गर्म पानी के अभिशाप से मुक्त हुआ गांव बिधलान 1500 फुट गहरे सरकारी ट्यूबवेल के हानिकारक खारे व गर्म पानी से चर्म रोगों से पीड़ित ग्रामीणों के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा शुद्ध पेयजल अभियान के तहत नहर पर मीठे पानी के .
#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं। कलियुग में वे काशी के लहरतारा तालाब में, कमल के फूल पर, विक्रमी संवत् 1455 की ज्येष्ठ पूर्णिमा को सशरीर प्रकट हुए जिन्हें संत रामपाल जी महाराज ने उजागर किया है।
#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए।
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