जिस देश में ओलंपिक प्लेयर को ऐसे सिस्टम से लड़ना पड़ता है , सोचो डिस्ट्रीक लेवल स्टेट लेवल पर तो ये जिसको चाहे उसका कैरियर खत्म कर दे, किस लेवल पर शोषण कर सकते है ये
@SwiggyCares@harshamjty why your team can’t talk or except their mistake in public. I have DMed & got 150 coupon now I don’t want to. I’m still hungry with no food & lesser money. @IRCTCofficial@eCateringIRCTC
@SwiggyCares@harshamjty this is the answer I got from your fool. 150 coupon after paying 250 for a garbage food without plat or spoon. I am still in train & do not have food.
@apnarajeevnigam In Guna (MP) father of 4 died in front of district hospital due to simple fever because he could not buy Rs. 5 slip to get to see Dr & get his free Rx. And they want 10000 from everyone.
Kisi ke pas chodha he 10000
(मैं अपने ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत ये X पोस्ट कर रहा हूं क्योंकि मेरे पास @DDNewsHindi जैसा प्लेटफ़ॉर्म नहीं है जिसका बेजा इस्तेमाल करते हुए @sudhirchaudhary ने मुझे टारगेट किया है)
सुनो सुधीर चौधरी,
तुम एक घटिया पत्रकार ही नहीं घटिया इंसान भी हो। जानता तो पहले से था, आज ये कहने को इसलिए मजबूर हुआ हूं क्योंकि तुमने मेरे साथ फिर एक घटियापन किया है। दूरदर्शन के प्रोग्राम में ‘समोसे जलेबी’ वाली स्टोरी का ज़िक्र कर तुमने मुझ पर निशाना साधा है। और ये तुमने पहली बार नहीं किया है। पहली बार तो तुमने तब किया था जब तुम ज़ी न्यूज़ में थे और तुमने प्रधानमंत्री मोदी का एक लल्लो चप्पो वाला इंटरव्यू किया था। 2019 चुनाव से पहले। और फिर जब तुम्हारी जगहंसाई शुरु हुई तो फिर तुमने अपना चेहरा बचाने के लिए एक DNA कार्यक्रम पूरी तरह मुझे और राजदीप सरदेसाई को समर्पित कर बनाया था। तब मेरी रिपोर्ट की क्लिपिंग्स भी लगायी थी। ख़ैर। तुम्हारा चेहरा तब भी नहीं बचा था। अब तो तुम्हारे पास कोई चेहरा है ही नहीं। तुमने हमेशा सरकारों की गोद में बैठ कर ही पत्रकारिता की है। कांग्रेस कार्यकाल में भी तुम जैसे पत्रकार ही बहुत बड़े चापलूस थे। यहां पर एक प्रदेश की कांग्रेस सरकार का ज़िक्र करना बेमानी होगा जिसके बूते तुम तब पत्रकारिता में पले बढ़े।
क़रीब सवा मिनट के क्लिप से तुम्हारा चेहरा बचता है तो बचा लो, जनता के टैक्स के पैसे से 15 करोड़ का सरकारी पैकेज जस्टिफ़ाई कर रहे हो कर लो। और ऐसा करने के लिए ही तुमने इस क्लिप के नीचे लिखे ‘राजनीति के हल्के फुल्के पल’ को नज़रअंदाज़ किया। क्योंकि तुम संपादक नहीं चंपादक हो। अरे वो एक मोमेंट था फील्ड रिपोर्टिंग का जब राहुल गांधी यूपीए सरकार के दौरान कथित घोटाले से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दे रहे थे। फिर मैंने यही पूछना शुरु किया। इसकी डिटेलिंग फिर कभी। यहां तुमको सफ़ाई के तौर पर नहीं दूंगा।
मैं जानता हूं कि तुम मुझसे सिर्फ़ इस बात का बदला ले रहे हो कि मैंने 2003 में एनडीटीवी में मेरी नौकरी लगने में तुम्हारी मदद नहीं कर पाया। 2002-03 में सहारा में तुम्हारे साथ मैंने चंद महीने काम किया था। तब तुम शेखी बघारा करते थे कि मैं तो एनडीटीवी जाने वाला हूं मेरी बात हो गई है। लेकिन तुम शेखी बघारते ही रहे लेकिन जा नहीं पाए। जब तुम्हें पता चला कि मेरी नौकरी वहां लग गई है तो पहले तो सहसा तुम्हें भरोसा नहीं हुआ... फिर तुमने कहा कि जब जा ही रहे हो तो मेरे लिए भी बात करना कि मामला कहां अटका है। मैंने कोशिश भी की और राजदीप सरदेसाई से अनुरोध भी किया था तुम्हारे लिए। लेकिन क्योंकि संस्थान में मैं ख़ुद नया था इसलिए तुम्हारे लिए ज़ोर नहीं डाल पाया था। तुम्हारी नौकरी वहां लगा नहीं पाया। आई एम सॉरी फॉर दैट। पर तुम अब कभी डीडी से निकाले जाओ तो एनडीटीवी जा सकते हो। अब माहौल तुम्हारे अनुरुप है वहां।
अंत में एक बात। ये तुम ही हो जिसका 100 करोड़ वाला वीडियो क्लिप आज भी इंटरनेट तैर रहा है। जिस भी तरह तुमने समझौता कर लिया हो लेकिन वो एक ऐसा बदनुमा दाग़ है जो कभी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगा। डीडी पर कभी उस क्लिप की बात भी करो। और हां। लाइव इंडिया में रहते हुए कैसे तुमने स्कूल टीचर को लेकर फर्ज़ी ख़बर चलायी वो भी पत्रकारिता जगत नहीं भूला है आज तक। जिनको नहीं पता वे गूगल का ग्रोक कर सकते हैं। दो बार जेल भी गए तुम। कोई तिहाड़ी शब्द का ज़िक्र करता है तो सभी समझ जाते हैं कि तुम्हारे बारे में कुछ कहा जाता है। और तुम हो कि समोसे जलेबी वाली स्टोरी का ज़िक्र कर महान बनने की कोशिश करते हो! बनो। और क्योंकि तुमने मेरी स्टोरी का ज़िक्र किया है, अगर क़ूवत है तो किसी दिन मुझे इसी डीडी के प्लेटफ़ॉर्म पर बहस के लिए आमंत्रित करो। तुम्हारी और मेरी पत्रकारिता का अंतर तुम्हारे प्रोग्राम के ज़रिए ही पता चल जाएगा। उन दर्शकों को जिनको तुम एक तरफ़ा तरीक़े से गुमराह कर रहे हो। ये मेरा हक़ भी बनता है क्योंकि तुमने मेरी स्टोरी का ज़िक्र किया।
तुम्हारे जवाब का इंतज़ार रहेगा
उमाशंकर सिंह
(पुनश्च: प्रिय पाठकों, सुधीर चौधरी को संबोधित करते हुए मैंने ‘आप’ लिखने की बहुत कोशिश की, लेकिन सहज मानवीय मूल्यों और व्यवहार कुशलता का अनुपालक होते हुए भी ऐसा नहीं कर पाया हूं। इसके लिए मैं पाठकों से बहुत माफ़ी चाहता हूं)