राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय दलित नाबालिग बच्ची के साथ बंधक बनाकर 32 लोगों द्वारा किए गए सामूहिक दुष्कर्म की घटना अत्यंत भयावह और मानवता को शर्मसार करने वाली है।
पीड़िता के अनुसार, उसके साथ कभी तीन से चार और कभी इससे अधिक लोगों ने मिलकर दुष्कर्म किया।बार-बार होने वाले हमलों से जब भी उसे दर्द होता था, तो उसे शराब पीने के लिए मजबूर किया जाता था। यह अपराध क्रूरता की सभी सीमाओं को पार करने वाला है।
इससे भी अधिक शर्मनाक और आक्रोशजनक बात यह है कि घटना के खुलासे के 15 दिन बाद भी इस मामले में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। यह सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, आखिर आधा महीना बीत जाने के बाद भी बाकी दरिंदे पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं?
हम @RajGovOfficial से मांग करते हैं कि 24 घंटे के भीतर फरार चल रहे सभी आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। इस पूरे मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराई जाए और सरकार मजबूत पैरवी करते हुए दोष सिद्ध होने पर सभी आरोपियों को कठोरतम सजा दिलाना सुनिश्चित करे। पीड़ित दलित परिवार को तत्काल सुरक्षा, न्याय और उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।
सोचकर तकलीफ़ होती है मोदी जी आप इतने निर्मम कैसे हो सकते हैं?
@Wangchuk66 जैसे पढ़े लिखे शख़्स पेपर लीक के ख़िलाफ़ पिछले 11 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं, उनकी हालत बिगड़ रही है, उनका वजन 7 किलो घट चुका है, मोदी को तो उनकी बात सुनने की फुर्सत नहीं, आप तो जंतर मंतर पहुँचिये।
#jantar_mantar
हम फिर उसी दौर में लौट रहे हैं जहाँ राजा का मूड ही क़ानून होता था।
ना अदालत की ज़रूरत, ना संविधान की क़द्र– बस चेहरा पसंद नहीं आया, तो ED भेज दो।
- नेता विपक्ष राहुल गांधी जी
#RahulGandhi#Congress
जंतर मंतर पर देश का युवा पेपर लीक के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहा है. इस संघर्ष को पूरी हिम्मत से लड़ने वाली जाबांज़ लड़की दानिश की तबीयत बिगड़ी, शुगर 46 के नीचे चला गया, उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. ऐसा लगता है कि सरकार की संवेदना मर चुकी है. सभी को @Wangchuk66, @abhijeet_dipke और दानिश का हौसला बनना होगा, घरों से निकलना एक मात्र रास्ता है. लड़ना ज़रूरी है, आप सभी अपने घरों से निकलिए, इंक़लाब की आवाज़ बुलंद करिए.
मुझे तो खुशी इस बात की है कि दलित वर्ग से आने वाला एक व्यक्ति अमेरिका से आता है और मनुवादियों की हवा टाइट कर देता है, पुलिस को तुरंत परमिशन और सुरक्षा देनी पड़ी,
जय भीम के नारों से जंतर मंतर को गूंजा दिया, यही ताकत बाबासाहेब के विचारों की है, जय भीम 🔥
"मेरी माँ को बहुत डर था की मुझे ये सरकार जेल में डाल देगी। इस देश में उस हर माँ को ये डर होता है जब उनका बच्चा इस सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है।
कब तक हम इस सरकार से डर कर जियेंगे?"
@Cockroachisback
CJP ने "हिट" की धमकी को ही पलट दिया 🔥
रिपोर्टर: लोग कह रहे हैं कि अगर कॉकरोच हैं, तो हिट स्प्रे भी होगा।
सौरव 🎯: तो फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ-साफ कह दीजिए कि आप इस देश के 65% युवाओं पर हिट स्प्रे करना चाहते हैं।
रिपोर्टर: CJP के फॉलोअर्स के पाकिस्तानी या बांग्लादेशी होने की बात का क्या?
सौरव 🔥: अभिजीत ने इंस्टाग्राम का रियल-टाइम डेटा दिखाया। 99% फॉलोअर्स भारत से हैं। तो अगर यही आपका तर्क है, तो कह दीजिए कि 99% भारतीय पाकिस्तानी हैं।
सैल्यूट है सर🫡
कोई तो सेलिब्रिटी है जो आम जनता की आवाज़ उठाता है,
वरना बाकी सारे तो बस फिल्मों में हीरो बनते हैं पर रियल लाइफ में कुछ नही करते.
@FanClubV1SH4L
“अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा।”
लखीमपुर खीरी के 21 साल के ऋतिक मिश्रा के ये आख़िरी शब्द थे। तीसरी बार NEET देने वाला यह बच्चा, परीक्षा रद्द होते ही टूट गया।
गोवा में भी एक NEET अभ्यर्थी ने जान दे दी।
ये बच्चे परीक्षा से नहीं हारे, इन्हें एक भ्रष्ट तंत्र ने मारा है।
यह आत्महत्या नहीं - यह सिस्टम द्वारा हत्या है।
आंकड़े देखिए:
2015 से 2026 तक - 148 परीक्षा घोटाले।
87 परीक्षाएँ रद्द, 9 करोड़ बच्चों का भविष्य प्रभावित।
148 घोटालों में सज़ा हुई - सिर्फ़ 1 को।
CBI ने 17 मामले लिए, ED ने 11 - किसी को सज़ा नहीं।
NEET, AIPMT और अन्य मेडिकल परीक्षाओं में अकेले 15 घोटाले।
और सबसे शर्मनाक बात:
इन घोटालों में जिम्मेदार किसी अधिकारी या मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं हुआ। हटाए जाते हैं - फिर चुपके से बड़े पद पर बैठा दिए जाते हैं। चोरी कराने वालों को इनाम मिलता है, और परीक्षा देने वाले बच्चे जान गँवाते हैं।
मोदी जी - कितने ऋतिक चाहिए आपकी जवाबदेही जगाने के लिए?
मेरे युवा साथियों, आपका दर्द मेरा दर्द है। आपकी मेहनत मेरी मेहनत है। आपका भविष्य चुराने वालों को जवाब देना ही होगा। चाहे जितना वक्त लगे, किसी को बख्शा नहीं जाएगा - ये मेरा वादा है।
यह लड़ाई हम साथ लड़ेंगे - और जीतेंगे भी।
पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Mamata Banerjee ने एक ऑडियो बातचीत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भवानीपुर सीट की मतगणना के दौरान काउंटिंग सेंटर में गड़बड़ी हुई। उनका दावा है कि वहां “गुंडों” ने घुसकर माहौल बिगाड़ा, अधिकारियों और एजेंटों को डराया-धमकाया और उनके साथ मारपीट तक की गई।
ममता बनर्जी का कहना है कि शुरुआती राउंड्स में वह आगे चल रही थीं, लेकिन अचानक हालात बदल गए। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान पारदर्शिता नहीं रखी गई और उनके एजेंटों को भी अंदर से हटाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ समय के लिए बिजली कटौती और अव्यवस्था के बीच नतीजों पर असर पड़ा।
इस पूरे मामले को लेकर Election Commission of India की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, इस सीट से Suvendu Adhikari की जीत ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
अब यह मुद्दा सिर्फ एक चुनावी हार-जीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस बन गया है। ममता बनर्जी ने साफ कहा है कि इस मामले को कानूनी तौर पर चुनौती दी जाएगी और सभी सबूत पेश किए जाएंगे।
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थलपति विजय ने एक रैली के दौरान छात्रों से "आंबेडकर और पेरियार" को पढ़ने का आग्रह किया था।
एक बात तो तय हैं कि TVK जीते या DMK तमिलनाडु में संघी विचारधारा कभी भी शासन नहीं कर पाएगी।
यह सत्य है और यही निश्चित है 🔥🔥🔥
ये क्या हो रहा है इस देश में?
ममता बनर्जी अभी भी बंगाल की मुख्यमंत्री हैं उनके ऊपर हमला हो रहा है, लात मारी जा रही है।
मुझे लगता है BJP के ख़िलाफ़ पूरे देश में सड़क का संघर्ष तेज करना होगा।
BJP की गुंडागर्दी का जवाब देना होगा।
चुनाव हारने का ये मतलब नहीं की जीतने वाला हिंसा करे।
BJP की धमकी कि “अब पंजाब का
अगला नंबर है”, उससे पंजाब डरने वाला नहीं है।
अभी उनके 2 विधायक हैं, अगली बार ZERO भी हो सकता है।
— @BhagwantMann, मुख्यमंत्री, पंजाब
आज सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट और ओडिशा के कई ट्रायल कोर्ट द्वारा दलित एवं आदिवासी समुदाय के व्यक्तियों की जमानत के समय पुलिस स्टेशनों में दो महीने तक लगातार सुबह 6:00 से 9:00 बजे तक साफ-सफाई करने की जातिगत भेदभावपूर्ण शर्तों को बेहद शर्मसार करने वाला फैसला बताया।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू महोदया, आप इसी ओडिशा राज्य और उसी आदिवासी समुदाय से आती हैं, जिसे आज न्याय व्यवस्था से ही जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
ओडिशा हाई कोर्ट के निर्देशों पर गंभीर एतराज जताते हुए आज चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इन शर्तों को जातिगत भेदभाव को दर्शाने वाला बताया और कहा कि, "हम बहुत निराश और हताश हैं, और ओडिशा राज्य की न्यायपालिका जिस तरह से ऐसी भारी, अपमानजनक और बेइज्जती भरी शर्तें लगाकर असल में एक पुरानी सोच की ओर लौट गई है, उससे हम पूरी तरह नाराज हैं, जो साफ तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करती हैं। ऐसी शर्तें न्याय को आगे बढ़ाने के बजाय आरोपी की गरिमा पर चोट करती हैं और दोषी होने के आधार पर कार्रवाई करती हैं, जो कानून में पूरी तरह गलत है।"
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हमारा मानना है कि किसी भी राज्य की न्यायपालिका को ऐसी जाति-आधारित और दमनकारी शर्तें नहीं लगानी चाहिए, जिनसे गंभीर सामाजिक टकराव पैदा होने का खतरा हो"। साथ ही, आदेश की एक प्रति देशभर के सभी हाई कोर्ट को भेजने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी शर्तों से यह प्रतीत होता है कि ओडिशा राज्य की न्यायपालिका जातिगत भेदभाव से ग्रसित है, क्योंकि सभी आरोपी पिछड़े समुदायों से थे।
सुनवाई के दौरान ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य को संबोधित करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा: "दुर्भाग्य से, ओडिशा में हाईकोर्ट और कुछ ट्रायल कोर्ट ऐसी जमानत शर्तें लगा रहे हैं, जो अनुचित हैं और जाति के आधार पर भेदभाव दर्शाती हैं तथा न्यायपालिका की छवि को धूमिल कर रही हैं।"
जानकारी में आया है कि ओडिशा राज्य में मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच जातिगत भेदभाव वाले ऐसे आठ आदेश पारित किए गए, जिनमें से छह आवेदक दलित समुदाय के थे और दो आदिवासी समुदाय से थे।
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