2012–17 का उत्तर प्रदेश आज भी कई गंभीर घटनाओं और का��ून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के कारण राजनीतिक बहस का विषय है।
DSP ज़िया-उल-हक की हत्या, मुजफ्फरनगर हिंसा, बदायूं की दो बहनों का मामला, पत्रकार जगेंद्र सिंह की म��त, मथुरा का जवाहरबाग कांड, बुलंदशहर हाईवे गैंगरेप और तत्कालीन मंत्री गायत्री प्रजापति पर लगे गैंगरेप के आरोप—इन घटनाओं ने उस दौर की शासन-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए।
मुजफ्फरनगर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन राज्य सरकार की शुरुआती लापरवाही पर टिप्पणी की थी, जबकि जवाहरबाग मामले की जांच CBI को सौंपी गई। गायत्री प्रजापति मामले में भी सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के ���ाद FIR दर्ज हुई।
इतिहास को राजनीतिक नारे की तरह नहीं, रिकॉर्ड की तरह देखना चाहिए।
सवाल आज भी वही है—उस दौर की सरकार इन घटनाओं और कानून-व्यवस्था के अपने रिकॉर्ड को कैसे देखती है, और उससे क्या सबक लिया गया?