मोदी जी ने सोनम वांगचुक को राहुल गांधी के जंतर-मंतर पहुँचने से पहले ही गायब कर दिया। यह बहुत गलत बात है।
थोड़ा-बहुत फ़ेम बेचारे वो भी ले लेते, तो क्या हो जाता?
CHAMPIONS! 🏆🇮🇳
Minerva Academy defeats Brazil's RS Sports Soccer to lift the Gothia Cup.
Indian football's future is brighter than ever.
Respect to Ranjit Bajaj and the young champions. 👏⚽
Dear X Algorithm,
my feed looks like Messi's LinkedIn profile.
Have some mercy on Ronaldo fans and stop this recommendation. My cardiologist has advised me to avoid Messi edits.
डिंपल जी, धरने में आना अच्छी बात है।
लेकिन शिक्षा पर अपना पुराना रिपोर्ट कार्ड भी साथ लेकर आइए, ताकि बेचारे छात्र आपका काम देखकर थोड़ा संतुष्ट हो जाएँ और 2029 में आपकी पार्टी को वोट देने का भी विचार करें।
#WATCH | Delhi: SP MP Dimple Yadav arrives at Jantar Mantar to meet activist Sonam Wangchuk who has been on a hunger strike here for the 19th consecutive day today.
कुछ लोग कह रहे हैं कि सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके के आंदोलन में वामपंथी और सरकार-विरोधी लोग आ गए हैं, इसलिए वे इस आंदोलन का समर्थन नहीं करेंगे।
मान लिया, आपकी यह आपत्ति सही है।
लेकिन फिर एक सवाल का जवाब भी दीजिए।
2018 में प्रो. जी. डी. अग्रवाल (स्वामी सानंद) 111 दिनों तक गंगा बचाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे थे।
- न उनकी माँग देश-विरोधी थी।
- न उस आंदोलन को वामपंथियों ने हाईजैक किया था।
फिर भी उनकी प्रमुख माँगों पर उनके जीवनकाल में ठोस समाधान नहीं निकला।
तो सवाल आज भी वही है
अगर समस्या सिर्फ़ "लेफ्टिस्टों की मौजूदगी" है, तो जी. डी. अग्रवाल जी के साथ समय रहते संवाद और समाधान क्यों नहीं हुआ?
अंत में बस इतना कहना है
अगर आपको सोनम वांगचुक या अभिजीत दिपके का तरीका पसंद नहीं है, तो अपनी अलग आवाज़ उठाइए, अपना अलग आंदोलन कीजिए, सरकार पर अपने तरीके से दबाव बनाइए।
लेकिन शिक्षा का यह मुद्दा किसी भी कीमत पर हल होना चाहिए। क्योंकि आज नहीं तो कल, हो सकता है कोई फर्जी डॉक्टर, फर्जी इंजीनियर या फर्जी प्रोफेशनल बनकर आपके ही परिवार की ज़िंदगी से खिलवाड़ करे। तब यह किसी आंदोलन का नहीं, आपके अपने घर का सवाल होगा।