मोहतरमा का नाम सीमा खन्ना है । ये चुनाव आयोग में IT director हैं और SIR के जरिए नाम हटाने की खुराफात इन्हीं की दिमागी उपज थी ।
ये राष्ट्रद्रोह की प्रबल दावेदारों में शामिल हैं ।
वोट चोर गिरोह ने हरियाणा में वोटिंग के दिन बताया कि 61.19% पोलिंग हुई है
अगले दिन यानी 6 अक्टूबर को बताया कि 65.65% पोलिंग हुई
फिर 7 अक्टूबर को बताया कि 67.9% वोट पड़े और 8 को रिजल्ट आ गया
EVM बंद हो गई। सील करके रखवा दी कई। तो फिर दो दिन बाद, काउंटिंग से 12 घंटे पहले 2.25% वोट कहां से आ गए?
इन डकैतों ने हरियाणा में हर विधानसभा में औसतन 15,175 वोट बढ़ा दिए।
📍दिल्ली, शालीमार बाग
शालीमार बाग की मस्जिद को लेकर एक महिला का दर्द सामने आया।
“किसी के धरम को ऐसे नहीं करना चाहिए… किसी की मस्जिद नहीं तोड़नी चाहिए।”
महिला कहती है कि कल रात खाना बनाया, लेकिन बिल्कुल नहीं चखा और आज पूरे दिन खाना नहीं बनाया।
किसी की इबादतगाह टूटने का दर्द आखिर कितना गहरा होता है, ये इन शब्दों से महसूस किया जा सकता है।
रितिका चोपड़ा से सुनिए गोवा SIR की कहानी
चुनाव आयोग में हुई पूरी गड़बड़ी जानने के लिए देखिए हमारी इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट. इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
'अगर ज्ञानेश कुमार को मोदी की इतनी ही चापलूसी करनी है तो जाकर चपरासी बन जाए मोदी का . CEC की कुर्सी पर ना बैठे '
@abhijeet_dipke ने 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की है .
#CJP#gyaneshkumar_antinational_deshdrohi#GyaneshKumar
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी ने 97 वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए 'चुनाव आयोग' को 7 दिन में 8 मेल किये थे लेकिन नाम नही जोड़े गए
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में खुलासा हुआ
Assalamualaikum warahmatullah wabarakatuhu
🚨 जरूरी सूचना — गुमशुदगी की अपील 🚨
@Anas_Khan46 के मामू हजरत मौलाना मोहम्मद वज़ीहुल्ला कासमी साहब के बेटे हाफिज उबैदुल्लाह आज सुबह से फर्रुखाबाद स्थित अपने घर से लापता हैं।
घर में मां की डांट से नाराज़ होकर वह गुस्से में घर से निकल गए हैं। उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
🙏 सभी भाइयों और दोस्तों से गुजारिश है कि अगर हाफिज उबैदुल्लाह कहीं दिखाई दें या उनके बारे में कोई जानकारी मिले, तो कृपया तुरंत परिवार को सूचित करें।
📍 स्थान: फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश
⏰ कल सुबह से लापता
कृपया इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि वह जल्द से जल्द अपने परिवार तक वापस पहुंच सकें।
अल्लाह उन्हें हिफाज़त के साथ जल्द घर वापस लाए। आमीन।
Video comment me hai aur usme number bhi hai....
चुनाव आयोग के आयुक्त सुखबीर सिंह सिंधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में जो 14 आपत्तियां दर्ज कराई हैं उन्हें मैने एक पोस्टर में पिरोया हैं, आप पढ़कर समझ सकते हैं कि कैसे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने दो सहयोगियों आयुक्त को बिना सूचित किए बड़े बड़े फैसले लेकर लागू करता गया, न ज्ञानेश ने दोनों आयुक्तों को अपने फैसले की खबर होने दी और न ही नियम होने के बावजूद उन्हें सूचित किया, उनकी आपत्तियों को भी नज़रअंदाज़ किया गया और 13 करोड़ मतदाताओं के SIR के ज़रिए वोट काट दिए गए।
इस देश में गोदी में मीडिया ही नहीं चुनाव आयोग भी बैठता है, ज्ञानेश कुमार ने इस देश के इलेक्टोरल प्रोसेस को पूरी तरह न सिर्फ़ ध्वस्त किया है बल्कि इस प्रकिया और देश के नागरिकों के भरोसे का अंतिम संस्कार भी कर दिया है।
ज्ञानेश कुमार में दम है तो मीडिया के सामने खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस करें और अपने सहयोगी चुनाव आयुक्तों को झूठा साबित करके दिखाएं
: अजित अंजुम, वरिष्ठ पत्रकार
शानदार रिपोर्ट है आपकी। भारत का लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है इसका एक और प्रमाण। चुनाव आयोग के भीतर क्या हो रहा है इसकी जाँच होनी चाहिए। सारे चुनावी नतीजों की समीक्षा होनी चाहिए। चुनाव जनता के वोट का नतीजा है या जी-प्रिंटर से निकला नतीजा, इसकी जाँच होनी चाहिए।
ये ‘मुद्दा’ बहुत बड़ा है…
चुनाव आयोग फिर से विवादों में, इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा अन्य जो दो चुनाव आयुक्त हैं सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी उन्होंने बताया कि 10 महीनों तक वो यह बताते रहे हैं कि कुछ फैसले बिना उनकी जानकारी के लिए जा रहे हैं। यहां तक कि इन लोगों ने 14 बार आपत्तियां भी दर्ज कराईं, यही नहीं संधू और जोशी ने फॉर्म 6 में किए गए बदलाव को गैर कानूनी भी बताया और सहमति भी नहीं दी फिर भी बदलाव किए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि कैंसर की एक जरूरी दवा का PTR (Price to Retailer यानी दुकानदार को निर्माता से मिलने वाली कीमत) ₹2,700 है, लेकिन उसी दवा की MRP ₹27,000 छपी हुई है।
यानी निर्माता दवा दुकानदार को ₹2,700 में देता है, जबकि MRP ₹27,000 रखी गई है—दस गुना अंतर। कोर्ट ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए इसे मरीजों के साथ “दिनदहाड़े डकैती” जैसा बताया और सवाल उठाया कि मरीज से इतनी अधिक कीमत क्यों वसूली जाए।
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों/प्राधिकरणों की जिम्मेदारी दवाओं की कीमतों पर फैसला लेने की है, उनकी इस मामले में चुप्पी हैरान करने वाली है। कोर्ट ने उनकी चुप्पी के कारणों पर भी सवाल उठाया।
मुसाहिद भाई मुझे बचा लो। यह एक बच्चा बोल रहा है और दर्द से कराह रहा है। और बच्चा बता रहा है कि इसके मां बाप भी नहीं है।
मैं कह रहा हूं कि जो लोग मदद कर सकते हैं वह सब इस बच्चे का पता निकाल कर मदद करें। 🤔💔😭 #MSAalam#HumanityFirst#Humanity#shorts#viralreels#facebookreels
अडाणी को ज़मीन देने के लिए @himantabiswa सरकार ने डेढ़ हज़ार के क़रीब परिवारों को उजाड़ दिया। सरकार की तरफ से ढोल पीटा गया कि यह ज़मीन ‘खाली’ कराई गई है, मतलब नागरिकों को उजाड़कर पूँजीपति को आबाद किया जा रहा है, क्या यह पूँजीवाद और फासिज्म का मिश्रण नहीं है?
एक तरफ़ @narendramodi मुस्लिम देशों के रहनुमाओं से गले मिलते हैं, और दूसरी तरफ़ भारत में मस्जिदों और कब्रिस्तानों को शहीद किया जा रहा है, आखिर इतनी नफ़रत क्यों?