आज तक एक बार भी अमित शाह जी श्री राम मंदिर नहीं गए। श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुए ढाई साल हो गए। इन ढाई साल में एक बार भी वे भगवान राम के दर्शन करने नहीं गए। इन ढाई सालों में उन्होंने 42 से ज़्यादा बार अपने भाषणों और इंटरव्यू में भगवान राम और मंदिर का ज़िक्र किया जिसमे कई बार राम और मंदिर के नाम पर वोट मांगा। लेकिन दर्शन करने नहीं गए।
इनके लिए राम केवल सत्ता हासिल करने और पैसे कमाने का ज़रिया है। इनकी राम में कोई आस्था नहीं है।
देश के अमित शाह जी से पाँच सवाल -
1. आप अभी तक राम मंदिर क्यों नहीं गए?
2. क्या भगवान राम के दर्शन करने का आपका मन नहीं करता?
3. क्या राम मंदिर जाने का आपका मन नहीं करता?
4. क्या आपको भगवान राम का आशीर्वाद नहीं चाहिए?
5. क्या आप राम को भगवान मानते हो?
संसद में झूठ की दुकान!
"पिछले 7 साल में कोई पेपर लीक नहीं हुआ"
- शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान
"ऑपरेशन सिंदूर में कोई जवान शहीद नहीं हुआ"
- रक्षामंत्री राजनाथ सिंह
जो मोदी सरकार हर मुद्दे पर ED भेज देती है,
राम मंदिर से जुड़े गंभीर आरोपों पर वही सरकार एक FIR तक नहीं कर रही?
देश सिर्फ एक सवाल पूछ रहा है…
आखिर कहाँ हैं चौकीदार?
भर्ती कैलेंडर के फेल के क्रम में अब PTI भर्ती भी समय पर नहीं होगी ।
यानी यही कैलेंडर 2027 तक चलेगा
कहने में भी अच्छा लगेगा 1.25 लाख पदों पर जारी किया है कैलेंडर (जबकि पूरे प्रदेश के सामने 1 लाख पदों पर कैलेंडर था वो भी सफ़ाई कर्मचारी के पदों और संविदा के पदों को मिलकर जिसमे भी 40% तो फेल हो चुका है ) ।।
सवाल करने पर कोर्ट जाने की सलाह मिलती है या कांग्रेस प्रवक्ता का ठप्पा 🤔🤔🤔🤔🤔
वर्तमान सरकार बिल्कुल युवाओं के लिए फेल होती जा रही है मुख्य कारण आप को समझ आ रहा हो तो दो शब्द आप शेयर करे ।।
पांचना बांध को खोलने को लेकर कई दिनों से पूर्वी राजस्थान में बना हुआ तनाव चिंताजनक है। यह और भी चिंताजनक है कि राजस्थान सरकार इस मामले को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत तक नहीं कर रही, जिससे वहां की जनता में अंदर-ही-अंदर आक्रोश पनप रहा है। इसके कारण इन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास भी बढ़ता जा रहा है।
सरकार को दोनों पक्षों के पंच-पटेलों को अविलंब बुलाकर बातचीत करनी चाहिए और इस मुद्दे का एक शांतिपूर्ण एवं न्यायसंगत हल निकालने का गंभीर प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री स्वयं पूर्वी राजस्थान से होने के बावजूद इस मुद्दे पर मौन कैसे हैं, यह समझ से परे है। उन्हें जल्द-से-जल्द इस मामले पर सक्रिय रुख अपनाना होगा।
मेरे युवा और Gen Z साथियों,
एक बात मेरे मन में साफ़ है और आप भी इसे दिल में बैठा लीजिए: भारत के हर युवा का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
पर ज़िम्मेदारी और ईमानदारी - दोनों मोदी सरकार की सोच से परे हैं।
पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, रद्द होती भर्तियाँ, आसमान छूती फीस, निजीकरण, घोटाले - इन्हीं औज़ारों से वो हर दिन करोड़ों सपने तोड़ रही है।
याद रखिए, युवा का भविष्य ही देश का भविष्य तय करेगा। यही सब आपसे विस्तार से कहना है। इसलिए मैं आपको बुला रहा हूँ - देश की हर गली, हर कस्बे, हर शहर से उठती ‘छात्रों की गूंज’ को, आइए कोटा में हुंकार बनाएँ।
🗓️ 17 जून | छात्रों की गूंज | कोटा महारैली
#ChhatronKiGoonj
देश के युवाओं और Gen Z साथियों..
आइए.. देश की हर गली, हर कस्बे और हर शहर से उठती "छात्रों की गूंज" को कोटा की धरती पर एक हुंकार में बदल दें, जिसे सत्ता को सुनना ही पड़े।
नेता विपक्ष @RahulGandhi जी आपको बुला रहे हैं.. क्योंकि ये लड़ाई सिर्फ़ छात्रों की नहीं, भारत के भविष्य की है।
मोदी सरकार में पेपर लीक, रद्द होती भर्तियां और परीक्षा कुप्रबंधन की मार झेल रहा युवा अब झुकेगा नहीं, अपने भविष्य के लिए डटकर लड़ेगा।
🗓️ 17 जून📍 दशहरा मैदान, कोटा
#ChhatronKiGoonj
स्पीकर लोगों को कह रहे कि कोई राहुल गांधी के कार्यक्रम में न जाए?
स्पीकर साहब के एरिया में राहुल गांधी जी आ रहे हैं। उन्हें उनका वेलकम करना चाहिए, क्योंकि जिस हाउस के वे स्पीकर हैं उसी हाउस के नेता प्रतिपक्ष खुद वहाँ आ रहे हैं। स्वागत करने की बात तो दूर, वहाँ ऐसा संदेश दे दिया गया है जैसे ओम बिरला जी इसके खिलाफ हैं और कोई भी वहाँ न जाए। इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि आखिर यह नौबत क्यों आई? यह सब किसके इशारे पर हुआ?
देश में राहुल गांधी जी के इस अभियान की शुरुआत राजस्थान के कोटा से ही हो रही है, वे ट्रेन से आ रहे हैं। और आप वहाँ के कोचिंग संस्थानों को धमकियाँ दे रहे हैं कि आपके इंस्टीट्यूशंस में कई कमियाँ हैं, नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहो। अगर खुद स्पीकर के लोकसभा क्षेत्र में ऐसी स्थिति बनती है, तो पूरे मुल्क में क्या संदेश जाएगा? क्या यहाँ डेमोक्रेसी है?
इस मामले पर कल मैंने 'एक्स' पर पोस्ट भी किया था। स्पीकर को यह शोभा नहीं देता कि आप ऐसी स्थिति पैदा करें जिससे लोगों के दिमाग में यह भय बैठ जाए कि पता नहीं हमारे संस्थानों का क्या होगा। यह अच्छी बात नहीं है।
Why is a message being sent in the Speaker's constituency that no one should attend Rahul Gandhi's event?
Rahul Gandhi is coming to the Speaker's own constituency. He should be welcomed, because the Leader of the Opposition of the very House over which the Speaker presides is visiting the area. Far from extending a welcome, a message has been conveyed as if Om Birla Ji is opposed to the visit and that no one should attend. He should clarify his position on why such a situation has arisen. At whose behest did all this happen?
Rahul Gandhi's campaign in the country is beginning from Kota, Rajasthan. He is arriving by train. At the same time, coaching institutes are being threatened that their institutions have several shortcomings and that they should be prepared to face the consequences. If such a situation is created in the Speaker's own Lok Sabha constituency, what message will it send across the country? Can this really be called a democracy?
I had also posted about this issue yesterday on X. It does not befit the Speaker to create a situation that instills fear in people's minds about what might happen to their institutions. This is not a good thing.
भाई साहब को केजरीवाल और आप पार्टी जनता के मुद्दे नहीं उठाने दे रही थी। इसलिए भाई साहब भाजपा में चले गये थे। लेकिन तब से भाई जी जाग ही नहीं रहे, CBSE हो गया, NEET हो गया, लेखपाल पेपर लीक हो गया। Gen जी सड़कों पर है। पर प्रिय मित्र राघव जाग ही नहीं रहे। उनकी तबियत की दुआ करता हूँ।
“राहुल गांधी जी ने मुझे फ़ोन किया था और पूछा था कुछ भी मदद चाहिए तो बताइए
मैं अभिषेक को हैदराबाद में शिफ्ट करवा सकता हूं अगर इलाज नहीं दे रहें हैं तो”
- ममता बैनर्जी जी
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में आरक्षण नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्धारित किए जाने के संबंध में माननीय पंचायती राज मंत्री @oprajbhar जी को पत्र लिखा।
प्रतिलिपि :
माo @myogiadityanath जी, @CMOfficeUP , @UPGovt - सादर सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु।
@ceoup , राज्य निर्वाचन आयोग, सादर सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु।
राजस्थान में बिगड़ते हालातों पर प्रतिक्रिया :
राजस्थान की स्थिति के बारे में मैं आपको बार-बार बता चुका हूँ। मैंने कोटा जाने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि वहाँ एक प्रिंसिपल, जो रिटायर हो चुके थे, पार्टी से लौटते समय नाले में गिर गए और उनकी मौत हो गई। मैं सरकार को यह संदेश देने जा रहा हूँ कि पूरे राजस्थान में नालों, खाइयों और सीवरेज सिस्टम की स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। जयपुर में ही 500-600 नाले हैं, लेकिन मैंने सुना है कि उनमें से मुश्किल से 100 ही ठीक किए गए हैं। यही हाल पूरे प्रदेश का है।
यह घटना इसलिए सामने आ गई क्योंकि मृतक एक प्रिंसिपल थे। लेकिन न जाने कितने लोग रोज़ फ्रैक्चर का शिकार होते होंगे, कितनों को ब्रेन हैमरेज होता होगा, कितनों की हड्डियां टूटती होंगी, जिनकी किसी को खबर तक नहीं लगती। पूरे प्रदेश में सड़कें खुदी पड़ी हैं और उन्हें ठीक नहीं किया जा रहा है। सरकार पेमेंट नहीं कर रही, इसलिए ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है। कई जगह आधा-अधूरा काम बीच में ही रोक दिया गया है। क्या ये बातें मुख्यमंत्री तक नहीं पहुँचतीं? हर विभाग का ठेकेदार परेशान है। उनका कहना है कि बिना पेमेंट के वे आगे काम कैसे करें। सभी ठेकेदार बड़े नहीं होते, छोटे ठेकेदार भी होते हैं। हालत यह हो गई है कि काम बंद पड़े हैं और जनता परेशान हो रही है। स्थिति बेहद गंभीर है।
अस्पताल में चार प्रसूताओं की मौत हो गई। जो महिलाएं बच्चे को जन्म देने अस्पताल गई थीं, वे खुद ही अपनी जान गंवा बैठीं। उनके परिवारों पर क्या बीतती होगी? लेकिन सरकार में कोई संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।
मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्था को धांधली का प्रतीक बना दिया।
दशकों में पहली बार CBSE बोर्ड परीक्षा पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं। 18.5 लाख बच्चों ने परीक्षा दी - और एक हफ़्ते से OSM, ग़लत मार्किंग और जाँच की गड़बड़ी की शिकायतें अनसुनी पड़ी हैं और शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं।
एक 17 साल का बच्चा, जिसकी कॉपी ग़लत जाँची गई, न्याय की उम्मीद में सोशल मीडिया पर आया।
मगर, उसे मदद नहीं, गालियाँ मिलीं - BJP के IT cell ने उसे “Anti-National” कहा, “Soros का एजेंट” कहा, “Deep State” का हिस्सा कहा।
एक 17 साल का बच्चा अपने भविष्य के लिए आवाज़ उठाता है और यह BJP उसे देशद्रोही बना देती है।
सच यह है - मोदी सरकार युवाओं और Gen Z से डरती है, क्योंकि वो अब सवाल पूछ रहे हैं। और जो सवाल पूछे, उसे यह सरकार बदनाम करती है, डराती है, कुचलती है।
पर सुन लीजिए, मोदी जी - यही युवा, यही Gen-Z आपका अहंकार तोड़ेगा।