@PiyushGoyal गोरखपुर जंक्शन, कहां है मेरी मोटरसाइकिल, कोई बताने को त्यार नहीं
आज मेरा 4+ घंटे की मेहनत के बाद पता चला कि हो सकता है कि सायद मेरी मोटरसाइकिल उतारी नही गई और यदि उतारी गई होगी तो 6 घंटे के बाद मुझ पर जुर्माना पड़ता रहेगा मेरी एक कंप्लेंट भी रजिस्टर नहीं की गई
@news24tvchannel आप सभी जानते है कि कोई इंसान किसी सरकारी या प्राइवेट संस्था में कार्यरत है और उसकी मृत्यु या हो जाती है उसके बाद वो संस्था में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाता तो उसे नोटिस भेजती है,
तो संस्था को कैसे पता चलेगा उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई है जो कि वहां भी इंसान ही कार्यरत होते हैं।
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा कृषि विभाग में तकनीकी सहायक (AGTA) के 2759 पदों पर जारी भर्ती, बहुजन समाज के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
प्रदेश में लागू आरक्षण व्यवस्था के अनुसार OBC को 27%, SC को 21% और ST को 2% आरक्षण मिलना चाहिए। लेकिन इस भर्ती में इन वर्गों के हकों को सुनियोजित तरीके से छीना गया है।
जहां OBC वर्ग को लगभग 745 सीटें मिलनी चाह��ए थीं, वहां केवल 573 सीटें दी गईं यानी सैकड़ों सीटों की कटौती।
SC वर्ग को लगभग 579 सीटों के बजाय मात्र 213 सीटें देकर उनके अधिकारों का खुला हनन किया गया।
ST वर्ग को 55 सीटों के बजाय सिर्फ 6 सीटें देकर उनके अस्तित्व को ही नजरअंदाज कर दिया गया।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, आपके राज में यह बहुजन समाज को सरकारी नौकरियों से बाहर करने की सोची-समझी साजिश है। यह ��ंविधान में निहित सामाजिक न्याय और समान अवसर के मूल सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।
हम @UPGovt से मांग करते हैं: -इस भर्ती की तुरंत निष्पक्ष समीक्षा की जाए।आरक्षण के निर्धारित प्रतिशत के अनुसार सीटों का पुनः निर्धारण किया जाए। जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।
यदि इस अन्याय को तुरंत नहीं सुधारा गया, तो बहुजन समाज सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करे��ा।
@CMOfficeUP
उड़ीसा में निजी कंपनियों का लाइसेंस निरस्त करने हेतु स्वतः संज्ञान लेकर विद्युत नियामक आयोग ने सुनवाई की तारीख तय की : उड़ीसा के निजीकरण के विनाशकारी परिणाम को देखते हुए उप्र में ��िजली के निजीकरण का निर्णय रद्द करने की मांग: निजीकरण के विरोध मे सितम्बर माह में किसानों, उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के सम्मेलन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उड़ीसा में हुए बिजली वितरण के निजीकरण के प्रयोग के विनाशकारी परिणाम आने के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय। संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि निजीकरण के विरोध में सितंबर माह में किसानों, गरीब व मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों के सम्मेलन प्रदेश भर में किए जाएंगे।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए टाटा पावर की चारों विद्यु�� वितरण कंपनियों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए 10 अक्टूबर को सुनवाई की तारीख तय की है। पहले यह तारीख 28 अगस्त को तय की गई थी लेकिन 29 अगस्त को उड़ीसा में स्थानीय अवकाश होने के कारण इसे 10 अक्टूबर को पुनर्धारित कर दिया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि उड़ीसा के सभी उपभोक्ता फोर��ों की ओर से श्री किशोर पटनायक ने 16 अगस्त को टाटा पावर की चारों विद्युत वितरण कंपनियों के विरुद्ध उपभोक्ता सेवा में पूरी तरह अक्षम रहने और उपभोक्ताओं का उत्पीड़न करने के आरोप लगाते हुए इन कंपनियों का विद्युत वितरण का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की थी। उपभोक्ता फोरमों ने उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग रेगुलेशन 2004 की धारा 9(1) और (4) के अंतर्गत उपभोक्ता सेवाओं में पूरी तरह विफल रहने के आरोप लगाते हुए ���ाखिल की थी।
उपभोक्ता फोरमों ने अपनी प्रेयर में कहा है कि विद्युत परिषद को विघटित करने का और उसके उपरांत विद्युत वितरण का निजीकरण करने का सबसे पहला प्रयोग उड़ीसा में हुआ। यह दोनों ही प्रयोग पूरी तरह विफल रहे हैं। निजीकरण के परिणाम विनाशकारी हैं और उपभोक्ता दर दर भटक रहे हैं।
उपभोक्ता फोरमों का आरोप है कि भीषण गर्मी में घंटों बिजली की कटौती की जा रही है, बिना प्रॉपर नोटिस के विद्युत वि���्छेदन किया जा रहा है, बेतहाशा बढ़े हुए गलत बिल भेजे जा रहे हैं और सबसे अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाकर उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है।
उपभोक्ता फोरमों ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि उड़ीसा के ��ूर्व बिजली कर्मियों को टाटा पावर द्वितीय श्रेणी का नागरिक मानती है। उनको बिना काम के किनारे बैठा रखा गया है और उनका करियर बर्बाद हो रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा की उड़ीसा में सबसे पहले 1999 में निजीकरण किया गया था। निजीकरण के एक साल बाद ही अमेरिका की एईएस कंपनी वापस चली गई। रिलायंस पावर की बाकी तीनों कंपनी का लाइसेंस फरवरी 2015 में विद्युत नियामक आयोग ने पूरी तरह अक्षम रहने के कारण रद्द कर दिया ���ा।
2020 में चारों कंपनियों का लाइसेंस टाटा पावर को दिया गया और अब विद्युत नियामक आयोग ने बेहद खराब उपभोक्ता सेवा का स्वत: संज्ञान लेते हुए 15 जुलाई 2025 को टाटा पावर की चारों कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है। टाटा पावर का लाइसेंस निरस्त करनी हेतू 10 अक्टूबर को सुनवाई हो रही है।
संघर्ष समिति ने कहा की उड़ीसा में कृषि क्षेत्र उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत कम है। बिजली के क्षेत्र में घाटा मुख्��तः ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में होता है। निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा जैसे औद्योगिक ।प्रांत में विफल रहा है और निजीकरण के लाइसेंस निरस्त करने हेतु सुनवाई हो रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों की गरीब जनता पर निजीकरण न थोपा जाय।
#stop_privatization_of_uppcl
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जो मंत्री अपने कर्मचारियों से नहीं मिल सकता, जो मंत्री जनता से नहीं मिल सकता है, जो मंत्री अपने समझौते का पालन नहीं करा सकता है, जो मंत्री लोकतांत्रिक तरीके ��े संघर्ष कर रहे कर्मचारियों का दमन और उत्पीड़न कर पुलिस की दम पर अपने ऊर्जा विभाग का निजीकरण करने पर तुला है उसे लोकतंत्र में मंत्री के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है, उन्हें तत्काल व्यापक जनहित में अपना इस्तीफा देना चाहिए।
जब से ऊर्जा मंत्री जी आए हैं तब से प्रदेश की गरीब जनता परेशान है, बिजली कर्मचारी परेशान है, किसान परेशान है, युवा परेशान है, छात्र परेशान है, आरक्षण खतरे में है।
मानन���य ऊर्जा मंत्री जी का एकमात्र उद्देश्य है कि कितनी जल्दी सरकारी संपत्तियों और सरकारी जमीनों को कौड़ियों के भाव अपने पूंजीपति मित्रों को सौंप दें, फिर ना रहेगा विभाग, ना रहेगी नौकरी, और ना रहेगा आरक्षण।
लेकिन ऊर्जा मंत्री जी बिजली कर्मचारी प्रदेश की सरकारी संपत्तियों को नहीं बिकने देंगे, ऊर्जा विभाग नहीं बिकने देंगे, जनता को लालटेन युग में नहीं जाने देंगे और बाबा साहब द्वारा दिया गया आरक्षण समाप्त नहीं होने देंगे।
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@RailMinIndia Train no. 12529 getting late by 02:30 Hrs late while I have next train from Lucknow to Moradabad at 05:15. #railways minister plz take head.
@RailMinIndia train no. 15008 mein RPF constable and TT milkar 200-200 rupees lekar aniyantrit logon ko bhar rah hain agar saman ki chori hoti hai to kiski jimmedari hogi. Sab bhrashtachar hai