In an era of viral clips and instant reactions, understanding matters more than ever. This platform explores the ideas, symbols, historical references, and deeper meanings hidden within the speeches of @DrKumarVishwas#DecodingKumarVishwas
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जहाँ राम हैं, वहाँ धर्म है;
जहाँ विश्वास है, वहाँ प्रेम है।
आपका वैवाहिक जीवन इसी मर्यादा और माधुर्य के साथ निरंतर प्रेम के पथ पर अग्रसर रहे😍
@DrKumarVishwas@Vishwaasam#HappyAnniversaryKV
@A_pant ये ठीक है। कोई जवाब ना बचे तो प्रॉपर्टी लेकर आ जाओ।
अबे मेहनत करते हैं। रात-रात भर जागकर कविताएं पढ़ते हैं। तुम्हारे बाप-दादाओं ने कुछ नहीं किया तो कोई क्या करे।
जलो मत बराबरी करो
समुद्र मंथन वास्तव में आत्मा का ही मंथन है, अगर हमने अपनी आत्मा का मंथन ठीक से कर लिया तो हमारे अंदर से ही ये चौदह रत्न निकलेंगे।
#KVQuotes#SundayVibes
भारतपुत्रियों ने अपनी हिम्मत, अनवरत व अपयाजेय संघर्ष के बल पर आज जो इतिहास रचा है उसके उत्सव में पूरे देश की शुभकामनाएँ और अपरिमित प्रेम सम्मिलित है। भारतीय टीम को डेढ़ सौ करोड़ बधाईयाँ 💪👏❤️🇮🇳🙏
हम साथ चलें तो जीतेंगे ❤️❤️🇮🇳🇮🇳
#INDWvsSAW
कैकेयी बुरी नहीं है, मंथरा बुरी है। परिवार के बाहर खड़ा हुआ कोई व्यक्ति अगर तुम्हें सगे भाई, सगी बहन, सगे संबंधी और माता-पिता के बारे में बुरा बताकर कहे कि मैं तेरे साथ हूं तो समझ लेना वो तुम्हारे साथ नहीं है वो तुम्हारी हानि के साथ है, वो तुम्हारे अपयश के साथ है, वो तुम्हारे पतन के साथ है।
#KVQuotes #MondayMotivation
वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥
भावार्थ:-अक्षरों, अर्थ समूहों, रसों, छन्दों और मंगलों को करने वाली सरस्वतीजी और गणेशजी की मैं वंदना करता हूँ॥1॥
#TulsiRamayanam
भवानीशंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।
याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥2॥
भावार्थ:-श्रद्धा और विश्वास के स्वरूप श्री पार्वतीजी और श्री शंकरजी की मैं वंदना करता हूँ, जिनके बिना सिद्धजन अपने अन्तःकरण में स्थित ईश्वर को नहीं देख सकते॥2॥
#TulsiRamayanam
वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकररूपिणम्।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥3॥
भावार्थ:-ज्ञानमय, नित्य, शंकर रूपी गुरु की मैं वन्दना करता हूँ, जिनके आश्रित होने से ही टेढ़ा चन्द्रमा भी सर्वत्र वन्दित होता है॥3॥
#TulsiRamayanam
सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ।
वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ॥4॥
भावार्थ:- श्री सीतारामजी के गुणसमूह रूपी पवित्र वन में विहार करने वाले, विशुद्ध विज्ञान सम्पन्न कवीश्वर श्री वाल्मीकिजी और कपीश्वर श्री हनुमानजी की मैं वन्दना करता हूँ॥4॥
#TulsiRamayanam
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥5॥
भावार्थ:- उत्पत्ति, स्थिति (पालन) और संहार करने वाली, क्लेशों को हरने वाली तथा सम्पूर्ण कल्याणों को करने वाली श्री रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री सीताजी को मैं नमस्कार करता हूँ॥5॥
#TulsiRamayanam