झारखंड के छात्रो द्वारा कल हुए पुलिस बल के खिलाड़ आज जबरदस्त “Restraint” दिखाया जा रहा है।
मोबाइल लाइट्स ऑन करके सुरक्षा बलों के साये में ही सरकार को चेताया जाना बता रहा है कि बिना राजनैतिक नेतृत्व के भी आंदोलन सफल होते है।
कोकरोचो की तरह ना गालीबाजी, ना पुलिस से भिड़ंत, ना देश के संस्थानों का अपमान।
दिल्ली से दूर एक छोटे राज्य की राजधानी में बेहतरीन रणनीतिक परिपक्वता के लिए ये छात्र बधाई के पात्र है।
जो आज संसद के मकर द्वार पर खड़े होकर मोदी को गाली देते है, एक बार जरा सच्चाई से रूबरू हो जाओ-
2014 तक इस देश में टोटल लॉजिस्टिकल कॉस्ट GDP की 14% हुआ करती थी - मतलब आज अगर 4000 billion USD की इकॉनमी है तो 560 बिलियन डॉलर खाली सामान लोजिस्टिक्स में खर्च होता था - जिसमे इनके द्वारे बनाये गए गड्ढे युक्त सड़क, धीमी रेलवे और पुराने स्टोरेज हाउस की भूमिका थी।
अब ये Freight कॉरिडोर पर दो दौड़ती मालगाड़ी देखिए-
सिर्फ़ दस सालो के अंदर रेल नहीं सड़क , पोर्ट और पूरा इंफ्रा बदल डाला है-
आज वो लॉजिस्टिकल कॉस्ट GDP की मात्र 7.97% यानी खर्च कम होकर 320 billion USD रह गया है जो डेवलप्ड इकॉनमी के बराबर है।
तो देश मकर द्वार से नहीं, अपने जीवन को खपाकर रणनीति बनाने और उन्हें एक्सीक्यूट करने से आगे बढ़ता है।
देश में पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग कांग्रेस ने शुरू की थी-
अच्छी बात थी क्योंकि कभी ना कभी देश हो आत्मनिर्भर बनाना ही होगा।
आज जब पूरा इंफ्रा और लॉजिस्टिक खड़ा है तब इथेनॉल पर कांग्रेस ही झूठ फैलाने में सबसे आगे है।
छोटे मोटे मुद्दे है तो एड्रेस हो जाएँगे, लेकिन पूरी पालिसी पर आक्रमण करना देश हित के ख़िलाफ़ है।