क्षमा करें मित्रों,
मेरी पोस्ट में अनजाने में बड़ी गलती हो गई थी।
मैंने वीरांगना झलकारी बाई जी को पासी लिख दिया था, जबकि वे कोरी समुदाय की थीं। सही जानकारी ये है: वीरांगना झलकारी बाई — कोरी
वीरांगना उदा देवी — पासी
दोनों महान वीरांगनाओं ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय शौर्य दिखाया।
गलती के लिए हृदय से क्षमा चाहता हूँ।
कृपया इसे सही समझें और शेयर करें।
ब्राह्मणों ने इतिहास को अपनी सुविधा से लिखा और मनमाने ढंग से गढ़ा है।
उदाहरण देखिए:
सबको बताया जाता है कि 1857 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया।
लेकिन सच यह है कि जब अंग्रेजों ने झांसी किले पर अंतिम हमला किया, तब रानी लक्ष्मीबाई डर गई थीं और महल से भागने की तैयारी कर रही थीं।
उसी वक्त वीरांगना झलकारी बाई (जो पासी समाज की थीं और रानी की हमशक्ल थीं) ने रानी के कपड़े पहने, खुद को रानी लक्ष्मीबाई बताकर किले की कमान संभाली, अंग्रेजों से लोहा लिया और दुश्मन को घंटों उलझाए रखा।
इसी बीच असली रानी लक्ष्मीबाई को सुरक्षित महल से निकालकर भगाया गया। झलकारी बाई अंत तक लड़ती रहीं और वीरगति को प्राप्त हुईं।
आज भी ब्राह्मण-लिखित इतिहास में झलकारी बाई को महज “रानी की सखी” बताया जाता है, जबकि सच यह है कि झांसी की आखिरी लड़ाई झलकारी बाई ने लड़ी थी, रानी लक्ष्मीबाई ने नहीं।
वीरांगना झलकारी बाई पासी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि प्रणाम 🙏🙏🙏
जय भीम, जय पासी, जय बहुजन
बिहार के बेगूसराय में पुलिस ने शिवदत्त राय नाम के अपराधी का एनकाउंटर किया है.
मीडिया दावा कर रहा है सम्राट चौधरी के गृह मंत्री बनते ही अपराधियों पर नकेल कसने की शुरुआत हो चुकी है.
शिवदत्त राय कोई बहुत बड़ा अपराधी नही था. ऐसे अपराधी अक्सर किसी बड़े बाहुबली या नेता के संरक्षण में काम करते हैं.
रास्ते से हटाने के लिए या सरकार को अपना रिकॉर्ड बनाने के लिए ऐसे अपराधियों का एनकाउंटर कर दिया जाता है.
मीडिया अचानक सम्राट चौधरी को आयरन मैन की तरह क्यों पेश करने लगा है. क्या यह दिखाने की कोशिश हो रही है नीतीश कुमार अब किसी काम के नही हैं ?
शंकराचार्य ने भारत में चार स्थानों पर मठ की स्थापना की.
देश से बाहर एक भी मठ की स्थापना नही हुई.
जबकि बौद्ध मठ चीन ही नही, बल्कि तुर्की तक में स्थापित हुए थे.
असली जगतगुरु कौन है.
तथागत बुद्ध या शंकराचार्य ?
कितने घटिया लोग हैं। कैसे एक महिला पर गिद्धों की तरह टूट पड़़े। हरियाणा पुलिस इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई करे। वीडियो उपलब्ध है, सबकी पहचान करके तुरंत गिरफ्तार किया जाए। @DGPHaryana, @NayabSainiBJP
मृत्यु भोज पर पूरे भारत में कानूनन रोक लगना चाहिए, आखिर कब तक मुखपुत्रों को फ्री का खाना खिलाना पड़ेगा
कुशवाहा समाज के इस क्रांतिकारी कदम की तारीफ होनी चाहिए। 🔥🔥🔥
ब्राह्मणों में शत-प्रतिशत लोग पढ़े-लिखे हैं।उसमें से बहुसंख्य लोग उच्च शिक्षा प्राप्त हैं।इसके बावजूद कोई ब्राह्मण अपनी जाति के खिलाफ नहीं दिखाई देता।वास्तविकता यह है कि उच्च जाति के शिक्षा प्राप्त व्यक्ति के लिए शिक्षा प्राप्त करने से पहले की तुलना में जातिव्यवस्था बनी रहनी चाहिए ऐसा अधिक तीव्रता से लगने लगता है।क्योंकि शिक्षा ही उसे बड़े पद प्राप्त करने का अधिक मौका देती है इसलिए जाति-व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में वह काम करने लगता है।यह शिक्षा का नाकारात्मक पहलू हुआ।भारतीय समाज के निचले स्तर के लोगों को यदि शिक्षा दी जाए तो यही शिक्षा जातिव्यवस्था को पिघला देगी।शिक्षा से उनमें विद्रोह की भावना जागेगी।वर्तमान स्थितियों में उनके अज्ञान के कारण वे जातिव्यवस्था के समर्थक बने हुए हैं।एक बार उनकी आँखे खुल जाएं तो वे जातिव्यवस्था को नष्ट करने के लिए कटिबद्ध होंगे।
बाबासाहब डॉ० अंबेडकर ।
@TejYadav14 इतिहास सुधार लो, इतिहास पढ़ लो. जयचंद्र गद्दार नही था. जयचंद महान बौद्ध राजा था. इस किताब को पढ़ो. मनुवादियों द्वारा सेट किया गया नैरेटिव को बढ़ावा मत दो. रही बात बहन रोहिणी जी की, तो उनका अपमान नही होना चाहिए. हम सब बहन के साथ हैं.
नेपाल के काठमांडू में बुद्ध की मूर्ति को पशुपतिनाथ शिव कहा जाता है !
सम्राट अशोक ने काठमांडू में बुद्ध स्तूप बनवाया ,, जिसे आज "पशुपतिनाथ मंदिर" कहा जाता है !
स्पष्ट दिखाई दे रहा है यह बुद्ध स्तूप है , जिसे पशुपतिनाथ बुद्ध कहा जाता है !
ऐसे अनेकों बुद्ध के लाखों प्रमाण है !
जागो भारत के मूल निवासी जागो !
#तथागत_बुद्ध_ही_पशुपतिनाथ_शिव_हैं
जिस ऑटो से मैं जा रही थी, उसके चालक थे इंद्रजीत पासवान जी।
हताश थे, निराश थे। उन्होंने मुझे किन्हीं से बात करते सुना और जैसे ही मैंने फ़ोन रखा वो बोले “दीदी ऐसा हार नहीं हो सकता था, ज़रूर कुछ गड़बड़ हुआ। हम शाहबाद से हैं जो रिजल्ट आया है उस पर भरोसा नहीं हो रहा है।” मैंने कहा “ हमारे लिए भी ये अविश्वसनीय है”।
वो आगे बोले “हम ग्रेजुएशन कर के टेम्पो चला रहे हैं , भरोसा था कि तेजस्वी जी का सरकार आयेगा तो कहीं नौकरी मिल जाएगा, लेकिन बहुत हताश हैं , लग रहा है जीवन भर यही करना पड़ेगा”।
मैंने उन्हें समझाया है वक्त बदलेगा, मज़बूत रहना है । वो हमको अंत में एक बात बोले “ दीदी तेजस्वी भैया को बोलियेगा, लड़ाई छोड़ने नहीं , हम लोग का भरोसा है उन पर, हम लोग तो वोट किए थे और बदलाव के लिए आगे भी करेंगे”
उनकी ये बात की “तेजस्वी जी पर भरोसा है” इस बात की तस्दीक करता है, हम चुनाव ज़रूर हारे हैं , भरोसा नहीं। ये भरोसा ही हमारी ताक़त है और इसी ताक़त के साथ दुगनी मजबूती से आगे बढ़ेंगे।
इंद्रजीत जी जैसे करोड़ों लोगों ने हमें वोट किया है हमको उनके साथ खड़ा रहना है और जिन्होंने नहीं किया उनका भी भरोसा जीतना है।
@priyanka2bharti ‘मनीष झा’ और ‘अंकित नारायण दुबे’ जैसे नाम सिर्फ व्यक्तियों के नहीं, बल्कि उस सोच के प्रतीक हैं जो महिलाओं को डराकर चुप कराना चाहती है।
मुझे तो इन जातंकवादियों के घर की महिलाओ की चिंता सता रही।
परसों से हम तीन वंचित महिलाओं की ट्रॉलिंग हो रही है, इसमें कई “पत्रकार” भी शामिल है।
गंदी गालियों के साथ बलात्कार तक की धमकी दी गई।
“मनीष झा” और “अंकितनारायण दुबे” जैसे लोग हमें मजबूत कर रहे है, पितृसत्ता और मनुवाद के खात्मे तक ये लड़ाई जारी रहेगी।