आज के ही मंगल दिन 14 अक्टूबर 1956 को बाबा साहेब ने दीक्षा भूमि नागपुर में हिन्दू (ब्राह्मण) धर्म को त्याग कर बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी आज धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस की 67 वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी को शत शत नमन एवं सभी बहुजनों को बधाई।🌹☸️🙏
“जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का नारा देकर सोए हुए समाज को जगाने वाले और “वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा” के नारे से शोषित समाज में राजनीतिक चेतना पैदा करने वाले बहुजन नायक, मान्यवर साहब कांशीराम जी के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें कृतज्ञता पूर्ण नमन एवं विनम्र आदरांजलि। हम संकल्प लेते हैं कि आपके “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” के अधूरे सपने को मंजिल तक पहुंचा कर ही दम लेंगे।
व्यक्तियों को कुचल कर वो, विचारों को नहीं मार सकते।
देशभक्ति, पराक्रम एवं बलिदान के अद्वितीय प्रतीक शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी की जयंती पर उन्हें क्रांतिकारी सलाम।
पाखंड और अंधविश्वास के खिलाफ संसद में बुलंद आवाज उठाने वाले, शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले, आजाद भारत के पहले सन्यासी सांसद, त्याग और तपस्या की मूर्ति, स्वामी ब्रह्मानंद लोधी जी के स्मृति दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं विनम्र आदरांजलि।
सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना पूरे देश के लिए गर्व और हर्ष का विषय है। भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेशस्थली को मिली यह वैश्विक मान्यता भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत का सम्मान है।
सारनाथ ने पूरी मानवता को शांति, करुणा, समानता और मध्यम मार्ग का संदेश दिया। यह उपलब्धि हमारी ऐतिहासिक धरोहर को विश्व पटल पर नई पहचान देगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।
सारनाथ की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएँ।
जय भीम! नमो बुद्धाय!
आसमान में सुराख हो गई है, धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है।
तबीयत से पत्थर उछाला गया था।
इतने दिनों तक धैर्य से संभाला गया था।
टूट गया गुरूर उन सबका जिन्हें लगता था।
उन्होंने नेता नहीं महामानव चुना है।
बधाई छात्रों 💐😍✊
"वर्दी सत्ता की नहीं, संविधान की होती है।"
आर्मी ऑफिसर के बीवी ने वर्दी का क्या धर्म ओर क्या फ़र्ज़ होता है ये खूबसूरत तरीके से समझाया
"आपके कंधों के सितारे ताकत नहीं, जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। अशोक चिन्ह याद दिलाता है कि आपकी निष्ठा किसी सरकार से नहीं, संविधान और देश की जनता से है।
लाठी आवाज़ दबाने के लिए नहीं, कानून की रक्षा के लिए है। वर्दी का सम्मान उसके कपड़े से नहीं, उसे पहनने वाले के चरित्र से होता है।
वर्दी का धर्म: सेवा, संयम और संविधान।" 🇮🇳
बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा।
महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।
दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में नगीना सांसद चंद्रशेखर भाई आजाद संसद परिसर में धरना दे रहे हैं, जिनके साथ आज मैं स्वयं और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल जी धरने में शामिल हुए।
लोकतंत्र में अपने हक़ और भविष्य की लड़ाई लड़ रहे युवाओं की आवाज़ को लाठियों से नहीं दबाया जा सकता। छात्रों पर बल का दुरुपयोग बेहद निंदनीय है।
मेरी प्रधानमंत्री @narendramodi से मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त किया जावे। साथ ही, छात्रों पर बल का दुरुपयोग करने वाले सभी दोषियों पर सख्त कार्यवाही हो।
@narendramodi@RahulGandhi@BhimArmyChief@hanumanbeniwal@ANI@PTI_News@ndtv@TOIIndiaNews
कल दिल्ली में सरकार के इशारे के बाद युवा साथियों पर हुए लाठीचार्ज के बाद न्याय की मांग को लेकर नगीना से सांसद व आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चंद्रशेखर जी आजाद संसद भवन परिसर में संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव जी अम्बेडकर की मूर्ति के समक्ष धरने पर बैठे है, आज मैं भी उनके पास पहुंचा ,इस दौरान राजस्थान से लोक सभा सांसद श्री राजकुमार जी रोत भी मौजूद रहे |
भारत सरकार को युवाओं पर चली एक - एक लाठी का हिसाब देश को देना होगा,लोकतंत्र में तानाशाही स्वीकार्य नहीं है |
@BhimArmyChief@roat_mla
मैं देश के हर युवा साथी को भरोसा दिलाता हूँ कि न यह मुद्दा खत्म हुआ है और न ही यह आंदोलन।
आपका भाई हर कीमत पर आपके साथ खड़ा है। संसद से लेकर सड़क तक, इस लड़ाई को पूरी जिम्मेदारी, पूरी मजबूती और पूरी प्रतिबद्धता के साथ पहले भी लड़ी है और आगे भी पूरी ताकत के साथ लड़ूँगा। मैं केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि आपका भाई हूँ। आपके अधिकार, सम्मान और भविष्य की इस लड़ाई में आख़िरी दम तक आपके साथ रहूँगा।
साथ ही मैं दिल्ली पुलिस से भी अपील करता हूँ कि इन मासूम, पढ़ने-लिखने वाले युवाओं पर लाठियाँ चलाकर अपनी वर्दी को दागदार न करें। ये बच्चे भी इसी देश के भविष्य हैं और किसी न किसी पुलिसकर्मी, किसान, मजदूर या आम परिवार के घर से ही निकले हैं। स्थिति को संवेदनशीलता, धैर्य और कानून के दायरे में रहकर संभालिए। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
वार्ता के बजाय दमन का रास्ता अपनाने से बात बनती नहीं, बल्कि बिगड़ती है।
मैं सभी युवा साथियों से भी अपील करता हूँ कि हर परिस्थिति में शांति, संयम और अनुशासन बनाए रखें। किसी भी उकसावे या अफवाह में न आएँ। हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी एकता, हमारा लोकतांत्रिक संघर्ष और संविधान पर हमारा विश्वास है।
हम लड़ेंगे, डटकर लड़ेंगे, लेकिन संविधान और लोकतंत्र के रास्ते पर चलकर अपने अधिकार लेकर रहेंगे।
जय भीम! जय संविधान!
ज़ुल्म जब भी हद से आगे बढ़ने लगता है,
वहीं से बदलाव का सूरज निकलने लगता है।
आज जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ जिस प्रकार का बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, उसने मन को गहराई तक झकझोर दिया। मैंने जलियांवाला बाग का वह दौर नहीं देखा, लेकिन आज जो दृश्य सामने आए, उन्होंने इतिहास के उस काले अध्याय की याद अवश्य दिला दी।
लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि उस अधिकार का उत्तर बल प्रयोग से दिया जाए, तो यह केवल कुछ लोगों पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है।
इसी पीड़ा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ, आज से मैं संसद भवन परिसर में परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ रहा हूँ। जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं होती, मेरा यह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
जहाँ संविधान की शपथ ली, आज वहीं संविधान का सम्मान बचाने बैठा हूँ।
मासूमों पर हुए अत्याचार के विरुद्ध अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ।
जय भीम, जय भारत।
#संसद_मार्च#जंतर_मंत्र
कबीरा कुंआ एक हैं पानी भरैं अनेक।
बर्तन में ही भेद है, पानी सबमें एक।।
समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं भेदभाव के विरुद्ध जन-जागृति पैदा करने वाले महान समाज सुधारक, भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक, महान कवि "संत कबीर दास" जी के प्रकाश पर्व पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं आप सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाए।