दूसरे चरण में दिन भर ये एक अजब रूझान देखने को मिला कि हर बूथ पर ‘इंडिया गठबंधन’ के समर्थन में वोट डालनेवाले हर समाज और वर्ग के मतदाताओं का आना लगातार बढ़ता गया, वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा के मतदाता कम से और कम होते चले गये।
दरअसल भाजपा के हताश, निराश समर्थकों के बीच भाजपा की ऐतिहासिक हार की पुख़्ता बात बुरी तरह से फैल चुकी है। उनके संगी-साथी भी कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। भाजपाई नेताओं के उलूल-जुलूल बयानों से भाजपाई शर्मिंदा भी हैं और अंदर से नाराज़ भी। आख़िरकार उन्हें भी तो समाज के बीच ही रहना है। राजनीतिक बयानबाज़ी के चक्कर में पड़कर वो अपने और अपने परिवारवालों के सामाजिक संबंधों को समाज के बीच ख़राब नहीं करना चाहते हैं। वो भी जानते हैं कि सामाजिक सौहार्द में ही सबकी भलाई और तरक़्क़ी के अवसर होते हैं।
दूसरे चरण ने तस्वीर और साफ़ कर दी है : अबकी बार, भाजपा साफ़!
#कभी_नहीं_चाहिए_भाजपा
चौपाई
नाथ भगति अति सुखदायनी। देहु कृपा करि अनपायनी॥
सुनि प्रभु परम सरल कपि बानी। एवमस्तु तब कहेउ भवानी॥1॥
भावार्थ
हे नाथ! मुझे अत्यंत सुख देने वाली अपनी निश्चल भक्ति कृपा करके दीजिए। हनुमान जी की अत्यंत सरल वाणी सुनकर, हे भवानी! तब प्रभु श्री रामचंद्रजी ने 'एवमस्तु' (ऐसा ही हो) कहा॥1॥
#KainchiDham
जय महाराजजी ,
जय बाबाजी नीम करौली कैंची धाम ,
जय गुरूदेव
❤️🙏❤️
बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
जय गुरूदेव 🙏💐 #NeemKaroli
जय महाराजजी ,
जय बाबाजी नीम करौली कैंची धाम ,
जय गुरूदेव
❤️🙏❤️
बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
जय गुरूदेव 🙏💐 #NeemKaroli
जय महाराजजी ,
जय बाबाजी नीम करौली कैंची धाम ,
जय गुरूदेव
❤️🙏❤️
बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
जय गुरूदेव 🙏💐 #NeemKaroli
जय महाराजजी ,
जय बाबाजी नीम करौली कैंची धाम ,
जय गुरूदेव
❤️🙏❤️
बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
जय गुरूदेव 🙏💐 #NeemKaroli
जय महाराजजी ,
जय बाबाजी नीम करौली कैंची धाम ,
जय गुरूदेव
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बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
जय गुरूदेव 🙏💐 #NeemKaroli
जय महाराजजी ,
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जय गुरूदेव
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बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
जय गुरूदेव 🙏💐 #NeemKaroli
जय महाराजजी ,
जय बाबाजी नीम करौली कैंची धाम ,
जय गुरूदेव
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धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
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जय गुरूदेव
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बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
जय गुरूदेव 🙏💐 #NeemKaroli
जय महाराजजी ,
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जय गुरूदेव
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बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
जय गुरूदेव 🙏💐 #NeemKaroli
जय महाराजजी ,
जय बाबाजी नीम करौली कैंची धाम ,
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बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
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अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
जय गुरूदेव 🙏💐 #NeemKaroli
जय महाराजजी ,
जय बाबाजी नीम करौली कैंची धाम ,
जय गुरूदेव
❤️🙏❤️
बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
इस अद्भुत लीला से सभी आनन्दित हो गये ।
इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
जय गुरूदेव 🙏💐 #NeemKaroli
जय महाराजजी ,
जय बाबाजी नीम करौली कैंची धाम ,
जय गुरूदेव
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बाबा जी ने खेतों में जिस गुफा में रहकर साधना की वह वक्त के साथ कहीं दब कर खो खो गई थी ।
धीरे धीरे इसके उपर मिट्टी जमा होने लगी थी और खेतों में सम्मिलित हो गई थी , जिस पर हल और खेती हो रही थी ।
श्री सिद्धि माँ को उस गुफा हेतु प्रेरणा मिली और वह गुफा के दर्शन हेतु बहुत उत्सुक्त हो गयीं।
उसी प्रेरणा के फलस्वरूप १९७७ - ७८ में उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू कर दी ।
अन्त मे १९८८ म़े श्री माँ महाराज मन्दिर के सामने के खेत में घूमते हुये एक स्थान पर कुछ देर के लिये स्थिर खड़ी रही ।
तभी एक वृद्ध बोले," जहाँ माँ खड़ी हैं वहीं खोदो ।
" श्री माँ महाराज ने ही उस वृद्ध को प्रेरित किया ऐसा बोलने के लिये ।
जैसे जैसे खोदा गया , गुफा के अवशेषों के दर्शन होने लगे । और धीरे धीरे पूरी गुफा के दर्शन हो गये ।
कुछ पुराने बर्तन, दीवार में बनी धूनी की राख और कोयला , लकड़ी भी मिलने प्रारम्भ हो गये ।
गोल आकार की मिट्टी से बनी गौरी, गणेश की मूर्तियाँ मिली ।
गुफा के प्रकट होते ही स्वंय ही धूप, बाती की सुगंध चहुँ ओर व्याप्त हो गई ।
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इस प्रकार इस गुफा को प्रकट करने में श्री माँ महाराज का उद्देश्य पूरा हो गया ।
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