नज़रिया बदलो, नज़ारे बदल जाएंगे...
कई लोग पहाड़ की ऊँचाइयों पर सिर्फ़ तस्वीरें लेने जाते हैं।
कुछ लोग वहाँ खड़े होकर अपने सपनों की ऊँचाई नापते हैं।
ज़िंदगी में शोर बहुत है, सलाह देने वाले भी बहुत हैं। लेकिन असली रास्ता वही बनाता है जो कुछ देर रुककर खुद से बात करना जानता है।
हर मंज़िल से पहले एक ऐसा मोड़ आता है जहाँ आपको दुनिया नहीं, अपनी सोच पर भरोसा करना पड़ता है।
आज अगर सफर लंबा लग रहा है तो याद रखिए, पहाड़ की चोटी भी एक-एक कदम चलकर ही हासिल होती है।
#नज़रिया #सफर #मंज़िल #सोच #प्रेरणा #जीवन #SelfGrowth #Motivation #RaahhulSonkar 🌿
मैं नदी हूँ।
#हिमालय की बर्फ़ से जन्मी थी। पत्थरों से टकरा कर हँसती थी, गाँवों को पानी पिलाती थी, बच्चों के पाँव सहलाती थी।
आज मुझे देखो।
मेरी छाती पर नीले, हरे, नारंगी रंग के #घाव चिपके हैं। कोई #बिसलेरी की बोतल है, कोई #चिप्स का पैकेट, कोई #कोल्ड_ड्रिंक का ढक्कन, कोई #मैगी का रै��र। तुम #पहाड़ पर पिकनिक मनाने आए, गाने बजाए, रील बनाई, और जाते-जाते अपना आराम मेरे पानी में छोड़ गए।
तुम कहते हो #पहाड़ बुलाते हैं। मैं पूछती हूँ, किस मुँह से?
तुम बड़ी गाड़ियों में आते हो, #NatureLover का स्टिकर लगाते हो, फिर एक झटके में बोतल खोल कर मेरे अंदर फेंक देते हो। तुम्हें लगता है तेज़ धार सब बहा ले जाएगी। हाँ, बहा ले जाती है — नीचे तुम्हारे ही खेतों तक, तुम्हारे ही बच्चों के गिलास तक।
मेरा #दर्द शोर नहीं करता, इसलिए तुम सुनते नहीं। मैं पत्थर से टकरा कर भी आगे बढ़ जाती हूँ, पर #PlasticPollution से टकरा कर अटक जाती हूँ। वो गलता नहीं, सड़ता नहीं, बस मेरी साँस रोकता है।
मैं #मर नहीं रही, मुझे #मारा जा रहा है। रोज़, थोड़ा-थोड़ा, तुम्हारी छोटी सी #लापरवाही से।
अगर सच में #पहाड़ से प्यार है तो अगली बार आओ तो — ��पनी बोतल वापस ले जाओ, जैसे मंदिर से प्रसाद की थाली ले जाते हो। एक खाली थैला साथ रखो, मेरे लिए नहीं, अपनी इज़्ज़त के लिए। किसी को फेंकते देखो तो टोको, फोटो खींचने से पहले।
मैं अब भी बह रही हूँ, तुम्हारे लिए।
क्या तुम मेरे लिए एक कदम रुकोगे?
✍️ #RaahhulSonkar 🌿
#नदीकीपुकार #नदियांबचाओ #SaveRivers #RiverConservation #PlasticPollution #WaterCrisis #ClimateChange #NatureAwareness #SaveNature #CleanRivers #CleanHimalayas #MountainLife #Environment #EcoFriendly #Sustainability #Himalaya #ViralPost
आज सुबह अखबार पलटा तो एक हेडलाइन आँख में अटक गई —
“मौसम का बदलाव, बच्चों की सेहत पर पड़ने लगा है भारी”
खबर हल्द्वानी से है, पर कहानी हर शहर की लगती है।
भीषण गर्मी के बाद अचानक पलटा मौसम, और सबसे पहले छोटे-छोटे पेट ने जवाब दे दिया। सरकारी अस्पतालों की बाल रोग OPD में रोज़ 15 से 20 बच्चे सिर्फ उल्टी-दस्त लेकर पहुँच रह�� हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल में तो आंकड़ा 30-40 तक पहुँच गया है, बेस अस्पताल में भी रोज़ 30 से ज़्यादा बच्चे — दस को तो ड्रिप पर रखना पड़ा है।
पढ़ते-पढ़ते लगा, ये सिर्फ़ वायरस की खबर नहीं है। ये उस बड़े बदलाव की छोटी-सी आहट है जिसे हम ‘मौसम’ कहकर टाल देते हैं। कल तक लू थी, आज उमस है, कल बारिश होगी — और इन तीन दिनों के बीच सबसे नाज़ुक कंधे हमारे बच्चों के हैं।
बस्तियों से आने वाले ज़्यादातर बच्चे — वही ��हाँ पानी पहले गंदा होता है। टाइफाइड के दो-तीन केस भी आ चुके हैं। मतलब बीमारी अस्पताल में नहीं, नल में, थाली में, हमारी आदत में पनप रही है।
तो क्या करें? बहुत बड़ा कुछ नहीं।
बच्चे मौसम नहीं बदल सकते, हम अपनी तैयारी बदल सकते हैं।
क्योंकि अखबार की ये लाइन सिर्फ़ आंकड़ा नहीं, एक चेतावनी है — अगर हम अभी नहीं सुधरे, तो अगली गर्मी-सर्दी-बारिश की कहानी और भारी होगी।
--#Raahhul Sonkar
#मौसम_बदलाव #बच्चोंकीसेहत #ClimateChange #ClimateHealth #Haldwani #जनस्वास्थ्य #RaahhulSonkar
@askrajeshsahu @aajtak @bhagatram2020 @dineshdangi84 @iamnarendranath @pargaien @ParveenKaswan @susantananda3
"शहर को ठंडा रखने का सबसे सस्ता एसी"
हम करोड़ों रुपये #AirConditioners पर खर्च कर सकते हैं, लेकिन प्रकृति का बनाया हुआ सबसे बड़ा कूलिंग सिस्टम अब भी मुफ़्त है — पेड़।
जहाँ सड़कों के किनारे घने वृक्ष होते हैं, वहाँ तापमान कई डिग्री तक कम महसूस होता है। हवा बेहतर होती है, धूल कम उड़ती है और शहर रहने लायक बनता है। लेकिन विडंबना देखिए, व���कास के नाम पर सबसे पहले इन्हीं पेड़ों की बलि चढ़ाई जाती है।
शायद हमें अब यह समझना होगा कि भविष्य के स्मार्ट शहर सिर्फ ऊँची इमारतों से नहीं, बल्कि #GreenCover से बनेंगे। क्योंकि सीमेंट की छतें छाया नहीं देतीं, पेड़ देते हैं।
#UrbanHeat #TreeCover #ClimateAction #GreenCity #SustainableDevelopment #Environment #NatureConservation #ClimateChange #RaahhulSonkar 🌿
@SnjayKhandelwal@AadeshRawal इस जुगलबंदी नहीं कर बंदी कहते हैं साफ-साफ दिख रहा है। कैसे संस्थाओं को कब्जे में करके चुनाव जीता जा रहा है आंखें खुल कर देखो
अन्तर्राष्ट्रीय जल में तीन दिन में तीन जहाज़ों पर अमेरिकी हमलों में तीन भारतीयों की मृत्यु हो गई। और हमारे Compromised PM? एक शब्द तक नहीं।
जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो प्रधानमंत्री को बोलना पड़ता है। लेकिन मजाल है जो ये एक शब्द बोल जाएं��
अगले हफ्ते G7 में, हमारे नाविकों की हत्या के बस चंद दिनों बाद, मोदी जी मुस्कुराएंगे, गले मिलेंगे और समझौते करेंगे - मगर, उन तीन भारतीयों के लिए उनके पास एक शब्द भी नहीं होगा।
Compromised PM भारत माता के बेटों की रक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि जिन्होंने उन बेटों की जान ली उन्हें नाराज़ करने की इनमें न हिम्मत है, न ताकत।
#अल_नीनो फिर दे रहा है दस्तक... और इसका असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा....
प्रशांत महासागर में सक्रिय होता #ElNino एक बार फिर दुनिया के #मौसम_���ंतुलन को चुनौती देने लगा है। आसियान की ताज़ा #जलवायु_रिपोर्ट चेतावनी देती है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में सामान्य से कम #बारिश, कमजोर #मानसून और #सूखे जैसी परिस्थितियाँ बन सकती हैं।
कुछ क्षेत्रों में बारिश होगी भी, तो वह #असमान_वर्षा और अत्यधिक मौसमीय घटनाओं के रूप में सामने आ सकती है।
समस्या सिर्फ #खेतों तक सीमित नहीं है। जब बारिश कम होती है तो #जलाशय सूखते हैं, #कृषि_उत्पादन घटता है, #खाद्य_सुरक्षा प्रभावित होती है और #ऊर्जा_मांग बढ़ जा��ी है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्ष के अंत तक #ElNino और मजबूत हुआ तो इसका असर करोड़ों लोगों की #रोज़मर्रा_जिंदगी पर महसूस किया जाएगा।
मौसम अब केवल पूर्वानुमान का विषय नहीं रहा, बल्कि हमारी #जल_सुरक्षा, #खाद्य_सुरक्षा और #आर्थिक_स्थिरता से जुड़ा सवाल बन चुका है।
प्रकृति समय रहते संकेत दे रही है, अब यह हम पर है कि हम #अनुकूलन की तैयारी करते हैं ��ा फिर हर साल आपदा के बाद समाधान खोजते हैं।
#ClimateChange #ClimateCrisis #GlobalWarming #WeatherAlert #Monsoon #Drought #WaterCrisis #Environment #ClimateAction #Sustainability #RaahhulSonkar 🌿
जहाँ से निकलती है सरस्वती...
यह दृश्य उत्तराखंड के पवित्र क्षेत्र माणा गाँव के पास स्थित सरस्वती नदी उद्गम क्षेत्र का है।
हिमालय की गोद में चट्टानों के बीच गर्जना करती यह धारा उस सरस्वती की याद दिलाती है, जिसका वर्णन हमारे वेदों और पुराणों में मिलता है।
पहाड़ों की इन चट्टानों के बीच से फूटती यह धारा सिर्फ पानी नहीं, आस्था, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत स���गम है।
कहा जाता है कि यहीं से सरस्वती अपना स्वर छेड़ती है—एक ऐसा स्वर जिसे सुनने के लिए शोर नहीं, श्रद्धा चाहिए।
आज जब नदियाँ प्रदूषण, अतिक्रमण और जल संकट से जूझ रही हैं, तब ऐसे उद्गम स्थल हमें याद दिलाते हैं कि हर महान नदी की शुरुआत एक छोटी-सी धारा से होती है।
अगर हम स्रोतों को बचा लें, तो भविष्य की प्यास भी बच जाएगी।
प्रकृति हमें हर दिन जीवन देती है, सवाल सिर्फ इतना है—क्या हम उसे बचाने के लिए कुछ लौटा रहे हैं?
— 🌿 Raahhul Sonkar
#SaraswatiNadi #SaraswatiUdgam #NatureConservation #SaveRivers #Himalayas #WaterIsLife #ClimateAwareness #NatureLovers #Uttarakhand #RaahhulSonkar
सब कहते हैं 'जल ही जीवन है'...
लेकिन ज़रा इन चेहरों को देखिए।
यहाँ #पानी जीवन नहीं,
रोज़ की लड़ाई बन चुका है।
घंटों की मशक्कत के बाद भी #साफ़ पानी की गारंटी नहीं।
फिर भी #घर चलाना है, #बच्चों को संभालना है, #ज़िंदगी को आगे बढ़ाना है।
सबसे #मज़बूत लोग अक्सर वही होते हैं,
जिनकी #परेशानियाँ सबसे कम दिखाई देती हैं।
पानी की कमी सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं,
#सम्मान और बराबरी का भी सवाल है।
— Raahhul Sonkar 🌿
#WaterScarcity #WomenAndWater #ClimateJustice #WaterForAll #SaveWater #RaahhulSonkar
सिविक सेंस: #पहाड़ों पर भी फेल, #शहरों में भी फेल
हम कितना भी #पढ़-लिख लें, कितनी भी #आध��निकता का प्रदर्शन कर लें, लेकिन हमारा असली #सिविक सेंस अक्सर पहाड़ों की #पगडंडियों और #सड़कों के किनारे पड़ा मिल जाता है।
हम #हिमालय की #खूबसूरती देखने जाते हैं, प्रकृति के बीच तस्वीरें खिंचवाते हैं, फिर लौटते समय #प्लास्टिक और #कचरे की अपनी #मौजूदगी दर्ज कर आते हैं।
मज़े की बात यह है कि हम #पहाड़ों की #सफ़ाई पर #चिंता भी जताते हैं और उसी सफ़र में उन्हें गंदा भी करते हैं।
असल समस्या #कूड़े की नहीं है, #सोच की है।
क्योंकि जहाँ सिविक सेंस खत्म होता है, वहीं से प्रदूषण शुरू होता है।
और फिर हम कहते हैं—
"पहले जैसे पहाड़ अब रहे कहाँ..."
-- 🌿 RaahhulSonkar
#CivicSense #SaveHimalayas #ResponsibleTourism #MountainPollution #RaahhulSonkar
दो दिन पहले:
"यार, बहुत गर्मी है।"
आज बारिश हुई:
"यार, बहुत बारिश है।"
इंसान शायद पृथ्वी की इकलौती प्रजाति है
जिसे हर मौसम से शिकायत है,
लेकिन मौस�� बदलने के कारणों से नहीं।
#RaahhulSonkar
🌿
@ABPNews हां सही है, 2014 से पहले भारत में कुछ हुआ ही कहा था। सब कुछ तो 2014 के बाद से हुआ, बेरोजगारी बड़ी पेट्रोल डीजल के दाम बड़े, लोग काम धंधे ढूंढ���े में लगे, और बर्बाद होकर बैठे हैं
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द आदेश पर लगी रोक।
चुनाव आयोग ने रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला पलटा!
यह कांग्रेस की लड़ाई की जीत है
जीतू पटवारी के संघर्ष की जीत है
जैसी सरकार आज है अगर वैसी कांग्रेस की होती तो बीजेपी कभी पनप ही नहीं सकती थी।
ज्यादातर व्यापारी लोग थे लड़ने का कोई काम ही नहीं था। केवल साजिशें ही कर सकते थे।
कांग्रेस तो आज सबसे खराब समय में भी हथियार डालने को तैयार नहीं है। 12 साल से लगातार लड़ ही रही है।
उसका आजादी के आंदोलन के दौरान लड़ने का जो इतिहास था वह आज भी उसकी प्रेरणा है।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने के खिलाफ इस समय दिल्ली में भी और भोपाल में भी कांग्रेस के नेता सड़क पर बैठे हुए हैं।
पहला फोटो दिल्ली का और दूसरा भोपाल का।
हम मीनाक्षी नटराजन जी के फॉर्म निरस्त होने के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग जा रहे हैं, और क़ानूनी लड़ाई लड़ने न्यायालय भी जाएँगे।
देशवासियो, देखो और समझो, सत्ता के लिए भाजपा हमारे देश का क्या हाल कर रही है।