वक्त बहुत कम है जितना दम है लगा दो,
कुछ लोगो को मै जगाती हूं कुछ लोगो को आप जगा दो!
और 2027 में मा० बहन जी को पांचवीं बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दो !!
जय भीम
संतोष अटेडिया निवासी नलखेड़ा कुछ दिनों से लापता हे आगर प्लाट लेने गए थे साथ में 17लाख ₹ भी थे गुमशुदगी दर्ज होने बाद भी तब से अभी तक पता नहीं चला ये पुलिस की लापरवाही हैं, त्वरित जांच कर जल्द से जल्द पता लगाया जाए।
@SP_AgarMalwa@CollectorAgar@BagiAjay75958@rajparihar_bodh
धर्म के नाम पर हत्या करने वाले आतंकवादियों के ख़िलाफ़ जिस तरह से पूरा देश आज एकजुट है, उसी तरह से जाति पूछकर दलितों की हत्या करने वाले जातंकवादियों के ख़िलाफ़ भी पूरे देश को एकजुट होना चाहिए। हम सब भारतीय हैं और यही हमारी सबसे बड़ी पहचान होनी चाहिए।
जय भीम - जय भारत #operation_sindoor
जब डॉ. भीमराव आंबेडकर कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए न्यूयॉर्क आए होंगे, तो मुमकिन है उन्होंने स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी को भी देखा हो। आज़ादी की उस सबसे बड़ी मूर्ति को सामने से देखा होगा। और शायद उस वक़्त उनके मन में भी ये सवाल उठा होगा — अछूतों के लिए आज़ादी का क्या मतलब है?
क्योंकि भारत में जहाँ वे पैदा हुए, वहाँ एक वर्ग को इंसान तक नहीं माना जाता था। उनका स्पर्श तक अपवित्र माना जाता था। वे देश में पैदा तो हुए थे, लेकिन उसके नागरिक नहीं माने जाते थे।
आज, जब मैं भी स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी के सामने खड़ा हुआ, वही सवाल मेरे ज़हन में भी गूंज रहा था — क्या आज़ादी का मतलब सबके लिए एक जैसा होता है? क्या समाज का हर तबका वाकई आज़ाद है?
डॉ. आंबेडकर ने इस सवाल का जवाब ढूंढा — संविधान में, संघर्ष में, और सामाजिक क्रांति में। लेकिन ये सवाल आज भी जिंदा है। हर उस जगह, हर उस व्यक्ति के भीतर, जिसे बराबरी अभी भी पूरी तरह नहीं मिली।
@RahulAz06437215 देश के कुछ लोगों की मानसिकता बहुत ही गंदी है, कुछ घटिया लोग आज भी संविधान को नहीं मानते हैं तभी तो संविधान विरोधी हरकतें करते हैं तभी तो समानता से रह नहीं सकते, तभी तो एससी एसटी वर्ग के घोड़ी पर जुलूस निकालने पर विरोध करते हैं!
आतंकवादीयों से लड़ाई में पुरा देश एक साथ खड़ा है, ऐसे ही होना चाहिए लेकिन वही दलितों की लड़ाई जातिवाद के खिलाफ़ कितने लोग खड़े हो रहे हैं?
क्या जातिवाद आतंकवाद से कम है?
क्या जिनके साथ जातिवाद, भेदभाव किया जाता है वह भारतीय नहीं है, यही से हमारी
एकता और अखंडता कमजोर हो जाता है।
प्रयागराज महाकुंभ में हुई भगदड़ की घटना में मौतों का आंकड़ा पिछले 13 घंटे से सभी अखबारों, चैनलों और वेबसाइटों पर ढूंढ रहा हूं, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिल रही थी। दिनभर सरकार और प्रशासन ने मौतों को अफवाह बताकर मुझसे 5 ट्वीट डिलीट करवाए। ऐसा डरपोक मीडिया और सरकार की तानाशाही मैंने पहली बार देखी है।