उच्च शिक्षा में सविंदा शिक्षक भर्ती का विरोध करते है ये उच्च शिक्षा और रोजगार पर खतरा है इन्होंने पहले कॉलेजों को सोसायटी पर किए अब टीचर्स को सविदा पर ले रहे हैं! ये निजीकरण को बढ़ावा है इस लड़ाई में हमारे साथ कौन कौन है!
@DrPremBairwa@1stIndiaNews@therajeshjrnlst
राजस्थान में भाजपा सरकार युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है। स्थायी नौकरियों को खत्म कर संविदा और ठेका प्रथा को बढ़ावा देना सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि असुरक्षा और शोषण की व्यवस्था खड़ी करना है।
असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे सम्मानजनक पदों को समाप्त कर “टीचिंग एसोसिएट” (शिक्षा वीर) के नाम पर 5 साल की संविदा और मात्र ₹28,850 वेतन देना न केवल योग्य युवाओं का अपमान है, बल्कि UGC मानकों की भी अनदेखी है।
पहले विरोध करने वाली सरकार आज खुद इसी व्यवस्था की समर्थक बन गई है। 3540 पदों पर अस्थायी भर्ती और पहले से कार्यरत युवाओं को फिर नए नाम से संविदा में धकेलना यह दिखाता है कि नीति नहीं, सिर्फ दिखावा चल रहा है।
आज यह प्रयोग उच्च शिक्षा में किया जा रहा हैं कल यहीं प्रयोग स्कूलों की शिक्षा प्रणाली में किया जाएगा, शिक्षा और रोजगार को स्थिरता चाहिए, प्रयोग नहीं। युवाओं को करियर चाहिए, कॉन्ट्रैक्ट नहीं सम्मानजनक भविष्य चाहिए।
भाजपा जब विपक्ष में थीं तो संविदा आधारित भर्ती का विरोध करतीं थीं और जब सत्ता में है तो यहीं भाजपा संविदा और ठेका व्यवस्था की समर्थक बन गयी।
#शिक्षा_वीर_संविदा_भर्ती_बंद_करो
प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में बड़े पैमाने पर संविदा शिक्षकों की भर्ती शुरू करना शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है। यह कदम न केवल शिक्षकों के सुरक्षित और स्थायी ढांचे को कमजोर करता है, बल्कि छात्रों के भविष्य पर भी असर डालता है।
संविदा पर कार्यरत शिक्षक नौकरी की अनिश्चितता के कारण लंबे समय तक संस्थान से जुड़ाव और पूर्ण समर्पण नहीं दे पाते, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। अगर भर्ती में योग्यता के मापदंडों से भी समझौता हुआ, तो कॉलेज स्तर की पढ़ाई की नींव ही कमजोर पड़ सकती है।
सरकार प्रदेश के युवाओं और शिक्षा के हित में संविदा भर्ती के बजाय पूर्णकालिक (स्थायी) भर्ती को प्राथमिकता दे और सख्त योग्यता मापदंडों के साथ नियमित भर्तियां निकालें।
@BhajanlalBjp
NET, SET, PhD किए हुए राजस्थान के उच्च शिक्षित युवाओं के साथ यह एक मज़ाक की तरह है। यह युवाओं को हतोत्साहित करने का प्रयास है।
राजस्थान में कर्मचारी चयन बोर्ड ने College Education में असिस्टेंट प्रोफेसर की परमानेंट पोस्ट्स की जगह टीचिंग एसोसिएट नाम से संविदा (Contract) पर भर्तियों का विज्ञापन जारी किया है।
कंप्यूटर से लेकर इकोनॉमिक्स, इंग्लिश, जियोग्राफी, हिंदी, हिस्ट्री, साइंस सहित कई सब्जेक्ट्स के लिए टीचिंग एसोसिएट की वैकेंसी निकाली गई है। जो पहले असिस्टेंट प्रोफेसर की परमानेंट पोस्ट होती थी, अब उसे संविदा यानी ठेके पर कर दिया गया है, और बेहद कम सैलेरी रखी गई है।
इसके लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन भी होंगे, परीक्षा भी होगी और Educational Qualification भी वही रखी गई है, जो असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए होती थी।
इतना सब कुछ होने के बाद भी युवाओं को जॉब सिक्योरिटी नहीं दी गई है। NET, SET, PhD किए हुए उच्च शिक्षित युवाओं के साथ यह एक भद्दे मज़ाक की तरह है।
BJP सरकार के इस रवैये से समझ आता है कि ये लोग रिसर्च, इनोवेशन और हायर एजुकेशन के विरोध में खड़े हैं। यह उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को हतोत्साहित करने का प्रयास है।
जिन युवाओं को आगे बढ़ाने का काम सरकारों को करना चाहिए, उन युवाओं को पीछे धकेलने की साजिश की जा रही है। PhD किए हुए युवाओं की क्षमता का उपयोग पॉलिसी मेकिंग से लेकर तमाम ऐसे कार्यों में किया जाना चाहिए, जिससे शासन-प्रशासन बेहतर होता हो, देश में growth model तैयार होते हो।
राजस्थान सरकार को अपने इस युवा और शिक्षा विरोधी फैसले को वापस लेना चाहिए।
संविदा पर Teaching Associates की जगह Assistant Professors की परमानेंट पोस्ट निकालनी चाहिए।
युवाओं और उच्च शिक्षा को सम्मान भाजपा सरकार दे नहीं सकती, पर कम से कम Job Security और Career stability तो दे।
#Rajasthan
भाजपा की पर्ची सरकार राजस्थान में स्थायी नौकरियां ख़त्म कर युवाओं को असुरक्षा, शोषण और अस्थायी रोजगार की तरफ धकेल रही है। असिस्टेंट प्रोफेसर की जगह टीचिंग एसोसिएट की संविदा पर भर्ती नौकरी नहीं, "ठेका" प्रथा पर काम बांटना है।
सत्ता के लिए युवाओं को भ्रमित करने वाली भाजपा अब युवाओं को करियर नहीं, कॉन्ट्रैक्ट जॉब दे रही है। नियमित नौकरी की जगह सरकारी कॉलेजों में 3540 पदों पर टीचर एसोसिएट की भर्ती और वो भी 5 साल की संविदा और 28,850 वेतन पर। ये न सिर्फ UGC मापदंड़ों की अनदेखी है, बल्कि युवाओं के भविष्य, शिक्षा, योग्यता और काबिलियत से साथ कुठाराघात है। भाजपा सरकार ने इससे पहले राजमेस के मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में भी 1267 पद संविदा पर निकाले थे।
भाजपा जब विपक्ष में थी तो संविदा भर्ती को युवाओं के साथ अन्याय बताकर विरोध करती थी। और आज जब सत्ता में है तो यही भाजपा संविदा और ठेका व्यवस्था की सबसे बड़ी समर्थक बन गई है। जबकि हमारी कांग्रेस सरकार ने 1.10 लाख से अधिक संविदाकर्मियों को नियमित किया और ठेका पर नौकरियों को बंद किया।
एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी सौंपे जाने के उपरांत देश के युवाओं के प्रेरणास्रोत, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष आदरणीय राहुल गांधी जी से शिष्टाचार भेंट कर उनका हार्दिक आभार व्यक्त किया। आगामी 28 फरवरी 2026 को आयोजित होने वाले "पदभार ग्रहण समारोह" में सादर आमंत्रित किया।
एक साधारण कार्यकर्ता पर विश्वास जताते हुए आपने जो यह ऐतिहासिक दायित्व सौंपा है, वह मेरे लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि संगठन की गौरवशाली विचारधारा, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प है। यह जिम्मेदारी मेरे लिए युवाओं की आवाज़ को मजबूती देने, छात्रहित और सामाजिक न्याय के मुद्दों को प्राथमिकता से उठाने तथा संगठन को नई ऊर्जा और दिशा देने का अवसर है।
आपके मार्गदर्शन, दूरदर्शी नेतृत्व और संघर्षशील विचारधारा से प्रेरणा लेते हुए मैं पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ एनएसयूआई को सशक्त बनाने, देश के युवाओं को संगठित करने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करता रहूँगा।
आपके विश्वास, स्नेह और इस अमूल्य अवसर के लिए मैं हृदय की गहराइयों से कृतज्ञ हूँ। यह विश्वास मेरे लिए प्रेरणा भी है और संकल्प भी कि संगठन के प्रत्येक कार्यकर्ता के साथ मिलकर हम देश के युवाओं के सपनों को साकार करने की दिशा में निरंतर अग्रसर रहेंगे।
एक बार पुनः आपका हार्दिक धन्यवाद।
@RahulGandhi@INCIndia
@Deenu19999 @ManishYadavIn सही है सर # आप ही हैं जो इस पर ध्यान दे सकते हैं नहीं तो उच्च शिक्षा का स्तर बहुत गिर जाएगा और आने वाली पीढ़ियाँ भी आप को और हमे बोलेगी की आप ने हमारे लिए ये विकसित राजस्थान और विकसित भारत बनाया है @ManishYadavIn@hanumanbeniwal@ashokgehlot51
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए
लड़ाई जारी रहेगी..
#SSC_System_Sudharo
युवाओ के इस देश में युवाओ के साथ क्या कोई नहीं है? कहाँ है वो सब जिन्हें भर भर कर वोट देकर हमने पार्लियामेंट में बैठा रखा है !
हैं हिम्मत तो सच का साथ दो ! युवाओ के हक की बात करो!
जब शिक्षक छात्रों के हक़ में आवाज़ उठाते हैं,
तो उन्हें सड़कों से उठाकर थानों तक ले जाया जाता है।
ना राजनीति, ना विरोध — सिर्फ़ एक सवाल था- न्याय कब मिलेगा?
क्या सवाल पूछना अब अपराध है?
क्या यही है हमारी व्यवस्था की तस्वीर?
#SSCProtest#SSC_System_Sudharo
मोदी जी, ये कैसा भारत बना दिया है आपने..?
जहां छात्रों के हक़ की बात करने वाले शिक्षकों को लाठियों से चुप कराया जाता है..
आज अगर शिक्षक सड़क पर पिट रहे हैं, तो सोचिए ये सत्ता किस हद तक गिर चुकी है!
शांति पूर्ण तरीके से Examination system खामियों को लेकर शिक्षक DOPT से बात करने जाते है तो उन्हें पुलिस के द्वारा मारा पीटा जाता है !
क्या इस देश में शिक्षकों के साथ ये दुर्व्यवहार ठीक है ?
लोकतंत्र में क्या कोई जिम्मेदार लोगो से बात भी नहीं कर सकता!
शिक्षकों को बस में जबरदस्ती भर कर वहा से हटाकर बस घुमाया जा रहा है 4 घंटे से !
ये क्या तरीका है ?
#SSC_System_Sudharo
“टूटते स्कूल, बिखरते सपने और बिलखते लोग।”
झालावाड़ के मनोहर थाना क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मैं पूछना चाहता हूँ कि इस आधुनिक दौर में भी आज लोगो के आशियानें इतने बदतर, कि टूटी झोपड़िया,कच्ची दीवारे, तिरपाल की छते, घरों में लाइट नहीं और पशुओं के साथ इंसान सो रहा है।
क्या उन्हें हिंदुस्तान में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो रही है? या ग़रीब पिछड़ा वर्ग इसका हक़दार नहीं है?
मुझे तो यह स्थिति देख के लग रहा है कि आजादी पहले भी ऐसा मंजर तो नहीं होगा, जहाँ हर कोने में लाचारी और ग़रीबी के दर्द की चीखे गूंज रही हैं।
@narendramodi@PMOIndia@BhajanlalBjp@RajCMO@madandilawar@DmJhalawar@PoliceRajasthan
#justice #students #jhalawar #govtschool
#NirmalChoudhary
लोकतंत्र में सवाल पूछना, नीतियों की आलोचना करना और नेताओं से जवाबदेही की मांग करना नागरिकों का अधिकार है, अपराध नहीं।
अगर सरकार युवाओं की आवाज़ को दबाने के लिए मुकदमे और डर का सहारा ले रही है, तो यह लोकतंत्र की जड़ों पर हमला है।#भजनलाल_हटाओ_राजस्थान_बचाओ जैसे हैशटैग कोई अपराध नहीं, जनता की भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं।
मुख्यमंत्री जी को याद रखना चाहिए, लोकतंत्र में जनता मालिक होती है, और सवाल करना उसका हक़।