हरियाणा के 8.12 लाख CET पास युवा आज भी इंतज़ार में हैं। न मेरिट सूची स्पष्ट, न नियुक्ति, न ₹9000 प्रतिमाह की कोई ठोस व्यवस्था!
अब प्रदेश का बजट पेश होने जा रहा है। सरकार को साफ-साफ बताना होगा, क्या 8,12,000 युवाओं के लिए ₹9000 प्रतिमाह × 24 महीने के हिसाब से लगभग ₹17,539 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है या नहीं?
अगर घोषणा सच्ची थी, तो बजट में राशि दिखनी चाहिए और यदि बजट में कोई प्रावधान नहीं हुआ, तो यह स्पष्ट होगा कि युवाओं से सिर्फ वादे किए गए, हकीकत में उन्हें भ्रमित किया गया।
यदि बजट में युवाओं का हक नजर नहीं आया, तो प्रदेशभर में सड़कों पर जोरदार लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा।
सरकार के पास इतनी शक्ति होती है कि जब सरकार ठान लेती है, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। 6 महीने में रेत पर इस तरह एक शहर बसाना भी इसी शक्ति का उदाहरण है, जो दर्शाता है कि अगर सरकार चाहती है, तो किसी भी बड़ी चुनौती का समाधान किया जा सकता है।
लेकिन जब बात आती है देश के गरीब, किसान, मजदूर, पिछड़े, दलित, आदिवासी और महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की, तो सवाल उठता है कि यदि इन आयोजनों को इतने बड़े पैमाने पर अंजाम दिया जा सकता है, तो शिक्षा, चिकित्सा, महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और बच्चों के भविष्य के लिए क्यों नहीं इस तरह की इच्छाशक्ति दिखाई जा रही है।
झांसी में आग लगने से नवजात बच्चों की मौत और ऑक्सीजन की कमी से बच्चों का दम तोड़ना—ये घटनाएँ साफ दिखाती हैं कि जनता की जान और उनके बुनियादी अधिकार हमारी प्राथमिकताओं में कहीं पीछे रह गए हैं।
क्या हमारी प्राथमिकताएँ गलत हैं? क्या सामाजिक उत्थान की दिशा में गंभीरता की कमी है? क्या व्यापक जनकल्याण में सरकार से हमारे द्वारा सवाल करना गलत है? यदि समाज के वंचित तबकों के उत्थान के लिए भी उसी दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति से काम किया जाए, तो एक स्थायी बदलाव संभव है।
जय भीम, जय भारत, जय संविधान।
सरकार के पास इतनी शक्ति होती है कि जब सरकार ठान लेती है, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। 6 महीने में रेत पर इस तरह एक शहर बसाना भी इसी शक्ति का उदाहरण है, जो दर्शाता है कि अगर सरकार चाहती है, तो किसी भी बड़ी चुनौती का समाधान किया जा सकता है।
लेकिन जब बात आती है देश के गरीब, किसान, मजदूर, पिछड़े, दलित, आदिवासी और महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की, तो सवाल उठता है कि यदि इन आयोजनों को इतने बड़े पैमाने पर अंजाम दिया जा सकता है, तो शिक्षा, चिकित्सा, महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार और बच्चों के भविष्य के लिए क्यों नहीं इस तरह की इच्छाशक्ति दिखाई जा रही है।
झांसी में आग लगने से नवजात बच्चों की मौत और ऑक्सीजन की कमी से बच्चों का दम तोड़ना—ये घटनाएँ साफ दिखाती हैं कि जनता की जान और उनके बुनियादी अधिकार हमारी प्राथमिकताओं में कहीं पीछे रह गए हैं।
क्या हमारी प्राथमिकताएँ गलत हैं? क्या सामाजिक उत्थान की दिशा में गंभीरता की कमी है? क्या व्यापक जनकल्याण में सरकार से हमारे द्वारा सवाल करना गलत है? यदि समाज के वंचित तबकों के उत्थान के लिए भी उसी दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति से काम किया जाए, तो एक स्थायी बदलाव संभव है।
जय भीम, जय भारत, जय संविधान।
तानाशाही बंद करो, युवाओं का दर्द सुनो।।
युवाओं के मुद्दों पर संसद में गरजे चंद्रशेखर, बोले “तानाशाही बंद करो, युवाओं का दर्द सुनो”
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Dear Students,
आपको यह सूचित करते हुए खुशी हो रही है कि Khan Sir को BPSC की Notification जारी होने के तुरंत बाद रिहा कर दिया गया है, और उनकी सेहत अब स्थिर है।
Khan Sir ने हमेशा छात्रों के हितों का समर्थन किया है और आगे भी करते रहेंगे।
BPSC की Notification इस बात का प्रमाण है कि सच हमेशा विजयी होता है और छात्रों के कल्याण से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
आप सभी के समर्थन और विश्वास के लिए धन्यवाद।
छात्रों की जीत, Bihar की जीत।
Khan Global Studies Team
#khanglobalstudies #khansir #KhanSirPatna #NoNormalizationinBPSC #bpscaspirants #70thBPSC
मुबारक हो सभी को मोदी जी सबको घर दे रहे हैं वो भी पक्का ?
बात ये नहीं है कि घर मिला या नहीं ! बात ये है क्या इसकी कोशिश की गई कि सबको घर देना है ? @narendramodi#आज़ाद_का_अमृत_महोत्सव
@IAjitDoval_IND रही बात आतंकवाद की तो वो तो खत्म हो जायेगा, लेकिन जिस दिन बाबा जी प्रधानमंत्री बन जायेंगे उस दिन ये जनरल वाले लोग OBC, SC, ST के लोगो को चैन से जीने नही देंगे
भाजपा मे सिर्फ इस समय ठाकुर ,पंडित का ही चल रहा है सिक्का
बाकी आप तो समझ गए होंगे क्या कहना चाहते हैं हम