जन सुराज की आवाज़ दबाने की कोशिशें नई नहीं हैं।
जब-जब जनता के हक़ की बात उठती है, तब-तब उसे “लोकप्रियता हासिल करने का जरिया” कहकर खारिज करने का प्रयास होता है।
Supreme Court of India में सुनवाई से इंकार होना यह साबित नहीं करता कि सवाल ग़लत थे — बल्कि यह दिखाता है कि सिस्टम के भीतर बैठे लोग असहज हैं उन सच्चाइयों से, जिन्हें जन सुराज पार्टी और Prashant Kishor सामने ला रहे हैं।
जब आदर्श आचार संहिता के दौरान सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हुआ, जब महिला वोटरों के खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर कर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की गई — तब आवाज़ उठाना अपराध नहीं, लोकतंत्र की रक्षा है।
वोटों की संख्या से सच की ताकत नहीं मापी जाती।
इतिहास गवाह है — हर बदलाव की शुरुआत कम लोगों से ही होती है।
जन सुराज सत्ता के लिए नहीं,
👉 सिस्टम सुधार के लिए है।
👉 बिहार के भविष्य के लिए है।
आज भले ही हमें नकारने की बातें हों,
लेकिन कल बिहार की जनता खुद जवाब देगी।
✊ सच के साथ जन सुराज
✊ बदलाव के साथ प्रशांत किशोर
किसी भी एग्जाम को क्लियर करने से पहले ये 5 गलती कभी मत करना:
1️⃣ हर टॉपिक एक साथ मत पढ़ो
2️⃣ सिर्फ पढ़ो मत, रिविजन करो
3️⃣ दूसरों से तुलना बंद करो
4️⃣ हर जगह से PDF बटोरना बंद करो
5️⃣ “मुझसे नहीं होगा” वाली सोच छोड़ दो
🔥 तैयारी = आधी जीत!
Post By Anshuman Sinha
आप सब की प्रार्थना और प्यार हमेशा मां के साथ रहेंगे।
मां को छठी मईया ने अपने पास बुला लिया है । मां अब शारीरिक रूप में हम सब के बीच नहीं रहीं । #
माता चंडिका स्थान
मुंगेर, बिहार
मुंगेर स्थित शक्तिपीठ माता चंडिका का मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। यहां माता सती की पूजा का विशेष महत्व है।
मान्यता के अनुसार यहाँ देवी सती की बायीं आंख गिरी थी जो पिंडी रूप में स्थापित है। मान्यता है कि यहां का काजल नेत्र रोगियों का विकार दूर कर सकता है।
यह तीर्थस्थल गंगा नदी के तट पर अवस्थित है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
#Navratra #नवरात्रि #Bihar
Video: @TourismBiharGov
इस से पहले की "यह देह मणिकर्णिका पर जलकर भस्म बन जाये...
~ मेरी अस्थियां गंगा में विसर्जित कर दी जाएं...
ओ सखी !!
?"तुम लौट आना...मैं मरने से पहले एक बार ही सही "पर तुम्हारी बाहों में जीना चाहता हूं!!
ये यूपी से बिहार शिक्षक की नौकरी करने आयी है बीपीएससी से इनका सेलेक्शन हुआ है इनसे जो सवाल हुआ उसका कोई जबाब नहीं दे पायी पहले शिक्षामित्र के योग्यता पर सवाल उठा तब सरकार ने अयोग्य शिक्षकों को फ़िल्टर करना शुरु किया फिर व्यवस्था बदल कर शिक्षकों की नियुक्ति बीपीएससी के हाथों मे दे दी वहां से भी अगर ऐसे शिक्षक फ़िल्टर नहीं हो पाये तो सवाल बीपीएससी पर उठता है क्या ऐसे शिक्षकों के लिए ट्रेन लेट होने पर परीक्षा का शेड्यूल बढ़ा दिया गया था? क्या इन शिक्षकों के लिए भाषा की अनिवार्यता समाप्त की गयी थी ? किसको लाभ पहुंचाए अतुल प्रशाद इसकी जांच हो आखिर बीपीएससी जैसे आयोग से ऐसे शिक्षक क्यों नहीं फ़िल्टर हो पाये ? ऐसे अयोग्य शिक्षकों को बहाल करने वाले जिम्मेदारों पर कब कार्रवाई होगी ?
मैं बेशर्म बिहार हूं।
मैं 20 साल से एक ही आदमी को मुख्यमंत्री बना रहा हूं,जिसने आज तक इस शोक के लिए समय नहीं दिया।
मैं शर्मिंदा हूं कि जिसे मैं 40 में से 39 सांसद देता हूं और वो फिर भी मेरे लिए एक मीटिंग तक नहीं किया फिर भी मैं हर बाद उसी को चुनता हूं।
मैं बेशर्म बिहारी हूं।