राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी का मुद्दा देश के गांव-गांव तक पहुंच गया है, सभी लोगों में इसे लेकर आक्रोश है।
प्रभु श्री राम के अयोध्या स्थित मंदिर से करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं, जिसे BJP-RSS ने भयंकर ठेस पहुंचाई है।
BJP-RSS और VHP के लोगों ने मिलकर एकतरफा तरीके से मंदिर ट्रस्ट बनाया, लेकिन किसी की कोई जवाबदेही तय नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि इन्हें चढ़ावा चोरी होने की जानकारी बहुत पहले से थी, लेकिन इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और बातों को दबा दिया गया।
: पूर्व मुख्यमंत्री @ashokgehlot51 जी
📍 दिल्ली
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर AICC में प्रेस वार्ता :
*कांग्रेस सरकार द्वारा बंसी पहाड़पुर से लीगल तरीके से मंदिर निर्माण के लिए पत्थर उपलब्ध करवाया गया था*
राजस्थान के लोगों का एक अलग लगाव है क्योंकि जब मंदिर बन रहा था तब वहाँ इल्लीगल माइनिंग हो रही थी। बंसी पहाड़पुर करके जगह है एक भरतपुर के अंदर, पत्थर वहीं से मंदिर बनने के लिए जा रहा था।
मिस्टर चंपत राय जी मेरे से मिले थे और एक और कोई दिनेश जी या कोई नाम थे वो भी आए थे। मैंने उनको कहा, "आप पवित्र काम करने की बात करते हो राम मंदिर की, तो अवैध पत्थर मत ले जाओ। इसको आप लीगल माइनिंग का पत्थर ले जाओ।" वो जो एरिया था बंसी पहाड़पुर का, वहाँ पर इल्लीगल माइनिंग हो रही थी, तो बात फिर पीएमओ तक गई, फिर मिस्टर नृपेंद्र मिश्रा मेरे संपर्क में आए और उनको पूरी बात समझाई गई। फिर हमने रिकमेंड किया वहाँ उस एरिया को फारेस्ट से निकालने का। फिर फारेस्ट एरिया से निकाला गया। राम मंदिर का मामला था, तो स्मूथली वो काम भी हो गया वरना तो वो बरसों लग जाते हैं, निकलता नहीं है। हमें धन्यवाद भी दिया गया, वो अलग बात है।
इस पवित्र काम में भी चोरी हो जाए या इतने बड़े रूप में जो आरोप लग रहे हैं और ऐसा माहौल बन जाए कि पूरे देश के अंदर हर गाँव में, हर घर में चर्चा होने लग जाए तो एक विश्वासघात वाली बात हो गई।
Mumbai wears a battered look with roads filled with water, trees falling everywhere and beleagured Mumbaikars wading through water. But neither the @mybmc nor the Mahayuti government is taking any responsibility. Instead they are busy in self congratulations with reels and paid tweets.
आज महाराष्ट्र गृहनिर्माण व क्षेत्रविकास प्राधिकरण (म्हाडा) चे उपाध्यक्ष तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव जयस्वाल यांची भेट घेतली.
दरम्यान धारावी-चेंबूर-कुर्ला परिसरातील नागरिकांच्या अनेक वर्षांपासून प्रलंबित असलेल्या महत्त्वाच्या प्रश्नांबाबत सविस्तर चर्चा केली.
🔹 सुभाष नगर येथील पुनर्विकास प्रकल्पाला अडथळा ठरत असलेल्या बेकायदेशीर अतिक्रमणांवर तातडीने कारवाई करावी.
🔹 भारत नगर व वाल्मिकी नगर परिसरातील रहिवाश्यांचे डीसीपीआर 2034 च्या नियम 33(5) अंतर्गत पुनर्वसन मार्गी लावावे.
🔹 कुरेशी नगर-नेहरू नगर दरम्यान बर्मा सेल रेल्वे मार्गावरील बहुप्रतिक्षित उड्डाणपूलासाठी आवश्यक जागा उपलब्ध करून देत काम तातडीने सुरू करावे.
वरील प्रश्नांसंदर्भात सकारात्मक चर्चा झाली आहे. हजारो नागरिकांच्या निवारा, पुनर्वसन आणि सुरक्षित प्रवासाशी संबंधित हे प्रश्न केवळ प्रशासकीय फाईलींमध्ये अडकून राहू नयेत. संबंधित अधिकाऱ्यांची संयुक्त बैठक आयोजित करून या सर्व विषयांवर ठोस आणि वेळबद्ध निर्णय घेण्याचीही मागणी केली आहे.
जनतेचे प्रश्न सोडवणे हीच आमची प्राथमिकता असून त्यासाठी पाठपुरावा सातत्याने सुरू राहील.
'महिला अत्याचारामध्ये महाराष्ट्र दुसऱ्या क्रमांकावर !' हि कबुली दिली आहे खुद्द महाराष्ट्राच्या मुख्यमंत्र्यांनी... कुठे? अधिवेशनाच्या लिखित उत्तरात. पुढे ते, २०२४ च्या तुलनेत २०२५ मध्ये महिला बलात्काराच्या घटनांमध्ये झालेल्या वाढीचा आकडा देतात. बालकांवरील वाढत्या अत्याचाराबाबत लिहितात. आणि अखेर महाराष्ट्र महिला अत्याचारामध्ये दुसऱ्या क्रमांकावर आहे हेही सांगतात.
निवडणुकीच्या तोंडावर लाडकी बहीण योजना आणून, त्यात गैरव्यवहार करुन आणि निवडणुकीनंतर जवळपास १ कोटींच्या वर लाडक्या बहिणींना अपात्र करुन 'देवाभाऊ' असं स्वतःचं महागडं ब्रॅण्डिंग करणाऱ्या मुख्यमंत्री तथा गृहमंत्री असणाऱ्या देवेंद्र फडणवीस यांच्या नाकर्त्या राज्य कारभाराचा हा झडझडीत पुरावा आहे. महायुती सरकार माय-भगिनींचं संरक्षण करण्यात सपशेल अपयशी ठरलं आहे !
काही व्हिडीओ लोकं विसरत नाहीत... आपल्या कोल्हापुरातून आलेला हा भाजपच्या सभेतील व्हिडीओ देशभर पसरतोय... कारण जनमानसाची आता एकमेव आशा म्हणजे राहुल गांधी 🔥 #RaGaforIndia
मागचा-पुढचा कशाचाही विचार करायचा नाही आणि दे ठोकून बोलत राहायचं... काँग्रेसद्वेष केला की अशा महाभागांना वाटतं, 'सरदार खुश होगा शाबासी देगा' पण एखाद्या वास्तूचं नाव बदलल्यावर काय परिणाम होतात? ते का बदलावं? ते आतापर्यंत का बदललं गेलं नाही? कशाचाही विचार न करता निर्बुद्धांसारखं बोलत राहायचं. बरं, नावं बदलणं हा इतका महत्त्वाचा विषय आहे का?
ते म्हणतात ना...'ढवळ्या शेजारी पवळ्या बांधला; गुण नाही पण वाण लागला!'
बच्चू कडू सत्तेत सामील झाल्यामुळे शेतकऱ्यांच्या सगळ्या अडचणी सुटल्या आहेत. फसवी कर्जमाफी, शेतमालाचा हमीभाव, ओला व सुका दुष्काळ, खत-बियाणांच्या किमतीतील वाढ, शेतकरी आत्महत्या असे अनेक प्रश्न आता मिटले असून, 'हॉस्पिटलला एका इंग्रजाचे नाव का?' हा एकमेव मोठा प्रश्न त्यांच्या आणि युती सरकारच्या समोर उभा आहे.
महिलांवरील अत्याचार, शेतकरी आत्महत्या, बेरोजगारी, महागाई यांसारख्या सामान्य प्रश्नांपेक्षा बच्चू कडूंना आता हिंदू-मुस्लिम, अकबर-बाबर, जातीय द्वेष, इंग्रजांचा इतिहास, नेहरूंच्या चुका आणि काँग्रेसच्या चुका या अतिमहत्त्वाच्या प्रश्नांवर काम करायचे आहे.
जिस योजना का उद्देश्य गरीबों के घर धुआं मुक्त रसोई पहुंचाना था, आज उसी योजना की सुविधाएं सीमित की जा रही हैं।
जनता पर महंगाई की मार लगातार जारी है।
#UjjwalaScheme#GasCylinder#Inflation
भाजपा नेताओं द्वारा मानेसर प्रकरण पर की जा रहीं टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया:
ये लोग बार-बार मानेसर को लेकर के ये तंज कसते हैं हमारे पर, ये हमारे घर का मामला है, वो हम निपटते जाएँगे आपस के अंदर, चाहे पायलट साहब हों, चाहे वो डोटासरा जी हों, चाहे वो जूली साहब हों, चाहे वो सीपी जोशी साहब हों, चाहे वो भंवर जितेंद्र सिंह जी हों, जो भी नेता हमारे हैं, नेता कई हैं हमारे तो, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष हमारे चंद्रभान जी भी हैं, डॉक्टर बीडी कल्ला जी भी हैं, जितने ही नेता हम हैं, आपस में हम बात कर लेंगे और कोई गलतफहमी दूर कर लेंगे।
सच्चाई, सच्चाई का विकल्प होता नहीं है, सच्चाई मैंने अपनी रख दी है सामने और आगे भी रख देंगे साथ में और बार-बार कहते हैं कि 25 सितंबर को क्या हुआ? हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट कभी नहीं कर सकते, राजस्थान की कांग्रेस जो है इतिहास गवाह है, इंदिरा गांधी की कांग्रेस बनी थी 1 जनवरी 1978 को, तभी जो है इंदिरा जी सबसे पहले 1 जनवरी 78 को बनीं और 15 दिन बाद में सबसे पहले जयपुर आई थीं, हम लोग मौजूद थे, जेल गए हुए थे हम लोग। जेल आते-जाते थे हम लोग, इंदिरा जी के यहाँ जेल गए थे, इतना विश्वास इंदिरा जी ने राजस्थान पे किया, सोनिया गांधी ने विश्वास किया, राहुल गांधी विश्वास कर रहे हैं, अभी देखा आपने पुष्कर में क्या-क्या हुआ। सब विश्वास राजस्थान की कांग्रेस पर हाईकमांड का पहले था, आज भी है।
25 सितंबर की घटना जो हुई है वो उस व्यक्ति के खिलाफ ही हुई थी जिसका नाम चल गया था कि ये मुख्यमंत्री की शपथ ले सकते हैं, पायलट साहब। इनके खुद के लोगों ने चला दिया, ऐसा माहौल बन गया कि 100 लोग इकट्ठे हो गए, कहा भई अगर नया मुख्यमंत्री बने, अशोक गहलोत जा रहा है अध्यक्ष बनने के लिए, नया मुख्यमंत्री बने, बने वो हमने जो लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड के साथ में, हम होटलों में बंद रहे हैं, लॉयल्टी दिखाई हाईकमांड साथ रहे हम लोग, सरकार बचाई, हम में से किसी को भी, हम में 100 लोग में से किसी को मुख्यमंत्री पद दे दीजिए, बना दीजिए, हमें मंजूर है पर पायलट साहब मंजूर नहीं होंगे क्योंकि वो तो ले जाने वालों में थे मानेसर, ये उनकी मांग थी, उसको तोड़-मरोड़ कर के कह रहे हैं कि हाईकमांड के खिलाफ में रिवोल्ट हो गया, अरे हाईकमांड खिलाफ रिवोल्ट होता तो मैं मुख्यमंत्री रह पाता क्या बाद में? अगर रिवोल्ट हम करते, तो हाईकमांड मुझे क्यों रखती मुख्यमंत्री? ये तो आरोप लगाने वाले को समझना चाहिए।
और लास्ट बात ये है, हिंदुस्तान के इतिहास के अंदर जब कभी भी हाईकमांड ने तय किया कि मुख्यमंत्री बदलना चाहिए, बदलने का फैसला कर लेते हैं, 90% एमएलए जो होता है जो मुख्यमंत्री साथ होते हैं, वो छोड़ के जाते हैं नए मुख्यमंत्री बनने वाले के पास। नए मुख्यमंत्री पास जाते हैं कि भई ये कल बनने वाला है, शपथ लेगा 5 दिन बाद में, 2 दिन बाद में और इन्हीं को जो है हमें मंत्री बनना है इनके साथ, हमारे काम तो नए मुख्यमंत्री से पड़ेंगे, तो पुराने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जी, कैप्टन साहब हों चाहे वो एक्स वाई जेड कोई हो, जो-जो मुख्यमंत्री हटाने का फैसला हाईकमांड ने किया है, 90% विधायक छोड़ के जाते हैं उनके पास से, ये तो मैंने देखा है। कोई नहीं रुकता है।
क्या कारण था उस दिन कि नए मुख्यमंत्री का नाम चल पड़ा, चला दिया खुद ने चला दिया, उनके दोस्तों ने चला दिया, उसके बाद में उनके पास नहीं गए, उनके पास नहीं गए, क्यों नहीं गए भाई? वो तो शपथ लेने वाले थे मान लो, जाते उनके पास में, ये बात सचिन पायलट को भी समझनी चाहिए, अब वो भी उनको भी करीब 15-20 साल हो गए राजनीति करते हुए, एमपी बने हुए, वो भी मतलब अनुभव प्राप्त हो चुके हैं, हम सब कोई उनके दुश्मन नहीं हैं कोई, हम तो स्नेह रखते हैं बचपन से ही, हम तो बचपन से ही इनके परिवार में आते-जाते थे, जब हम MP बनकर गए, तो वैभव हो चाहे ये हो, 2-3 साल के बच्चे की तरह थे, हम तो बच्चे की तरह मानते हैं आज भी उनको। अब उसके बाद में अगर वो राजनीति में पता नहीं कौन गाइड कर रहा है।
एक तो जो मीडिया जो है, वो सच्चाई पे उनका सपोर्ट करे मुझे ख़ुशी होगी, मुझे भी सपोर्ट किया। बचपन से मीडिया ने मुझे सपोर्ट किया, मैं मीडिया फ्रेंडली कहलाता हूँ, मीडिया ने भी हमारे साथ चाय पी होगी तो पेमेंट खुद ने दिया होगा मीडिया वालों ने, ऐसे सम्बन्ध हम लोगों ने रखे हैं पर हमने कभी नहीं कहा कि तुम अंट-शंट अनर्गल ऐसी बातें करो जिससे मेरी खुद की इमेज पे लोग हँसें। कभी उसको बना देते हैं, प्राइम मिनिस्टर बना देते हैं उसको, पायलट साहब को, कि ये प्राइम मिनिस्टर के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं कांग्रेस प्रेजिडेंट के उम्मीदवार हैं, कभी कहते हैं ये कांग्रेस वर्किंग प्रेजिडेंट बनने जा रहा है, कभी कहते हैं ये जी एस ओ बनने जा रहा है और कभी कहते हैं पीसीसी अध्यक्ष बनने जा रहा है, तो क्यों पायलट साहब के पीछे पड़े हुए हो तुम लोग? जितने भी मीडिया वाले हो, तुम लोग पीछे पड़े हुए हो, तुम लोग जो है दिल्ली में चाहे मेनस्ट्रीम मीडिया हो और चाहे वो आपका सोशल मीडिया हो।
सोशल मीडिया को मैं सलाम करता हूँ उनको, इस संकट की घड़ी में जो भूमिका सोशल मीडिया निभा रहा है, उनको मैं सलाम करता हूँ। डेमोक्रेसी खतरे में है, उसकी रक्षा करने के काम की बड़ी भूमिका किसी की है, मेनस्ट्रीम मीडिया की नहीं है, सोशल मीडिया की है और उनके अंदर जो बैठे हुए लोग हैं, जमीनी हकीकत उनको नहीं मालूम है, वो नई-नई स्टोरी चलाते रहते हैं, कोई फायदा नहीं, सबसे बड़ा नुकसान जो कर रहा है पायलट साहब का, वो वो मीडिया कर रहा है जो आउट ऑफ़ वे झूठी ख़बरें चला करके, झूठे पोस्ट देकर के ये इसके लायक हैं।
एक पत्रकार ने लिख दिया कि सोनिया गांधी राहुल गांधी को क्यों बेटा मानती है? सचिन पायलट को बेटा क्यों नहीं मान लेती है? ये पत्रकारिता है क्या इनकी? पत्रकारिता है इनकी, आप कल्पना कीजिए कि कहाँ ले जा रहे हैं देश को, मीडिया वाले भी। इसलिए मैं कहना चाहूँगा पायलट साहब को ही, उनको सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए, गलती इंसान से ही तो होती है, गलती इंसान से होती है, मैं भी कर सकता हूँ। उन्होंने गलती कर दी तो स्वीकार कर लेना चाहिए, मैंने बाहर निकलते ही जैसलमेर के होटल से, जब तय हो गया ये लोग भी आ रहे हैं, आते ही मैंने बात कि आप लोग स्टेटमेंट दिया, 'फॉरगेट एंड फॉरगिव'। अगर मेरी भावना सचिन पायलट समझ जाते उस दिन, वो भी फॉरगेट एंड फॉरगिव करते, मैंने उसके ये नहीं कहा कि मेरी गलती नहीं थी, उसकी गलती थी, मैंने कहा 'फॉरगेट एंड फॉरगिव' मतलब जिसने गलतियाँ हमने करी आपस के अंदर, सब भूलो और माफ़ करो, अब वो बात भी अगर समझ में नहीं आई उनको, उसमें मेरा क्या कसूर है?
हम आज भी मिलते हैं, हँसी-मजाक भी करते हैं, बातचीत भी करते हैं। हमारी कोई आपस में दिक्कत नहीं है, सच्चाई को स्वीकार उन्होंने करना सीखा नहीं, उसके कारण ये इशू अभी तक बना हुआ है। मैंने बीकानेर में कहा 6 महीने पहले, भूलो इसको अब आप, मानेसर को भूलो। क्या मेरे मानेसर भूलने की बात कहने के बाद में क्या कोई स्टेटमेंट आया ऐसा? इशारों में ही आया क्या? भई चलो ये इशू खत्म हो गया क्योंकि उनके एडवाइजर वैसे ही होंगे, उनके एडवाइजर ऐसे ही दिखते हैं, इस कारण से ये इशू बना हुआ रहता है, हम नहीं चाहते इशू बना रहे, जो हो गया सो हो गया। गलती इंसान से ही तो होती है, पर जब तक कोई गलती को स्वीकार नहीं करे, तो भई आप जानते हो इशू तो बना ही रहता है, मैं नहीं चाहता इशू बना रहे।
हम चाहते हैं कि आज कांग्रेस पार्टी संकट में है देश के अंदर, देश खुद संकट में है और देश को अगर कोई बचा सकता है तो वो सिर्फ कांग्रेस बचा सकती है। ये गांधी जी के सानिध्य वाली पार्टी है, पंडित नेहरू हों, मौलाना आजाद हों, सरदार पटेल हों, उस वक्त के नेता थे हमारे। उन्होंने कैसे पार्टी को, देश को आजाद करवाया, हम भूल सकते हैं क्या? जेलों में बंद रहे थे 10-10 साल तक, इन्होंने उंगली नहीं कटाई हमारी आरएसएस-बीजेपी वालों ने, आज राज कर रहे हैं वो लोग। ये देश को तोड़ देंगे लोग, ये ऐसे खतरनाक लोग हैं, हिंदू-मुस्लिम करते-करते पता नहीं देश को कहाँ ले जाएँगे।
लड़ाई हमें सब को मिलके लड़नी चाहिए, पायलट साहब हों, चाहे मैं हूँ, चाहे कोई नेता है। अगर हमें ईमानदारी है कांग्रेस में रहने की, और हम चाहते हैं कांग्रेस के लिए जान लगा दें क्योंकि कांग्रेस ने हम सबको सब कुछ दिया है, इनको केंद्रीय मंत्री बनाया, मैंने उनको केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद करी। उन्होंने अपनी जुबान से यें कभी नहीं कहा, इस बात की मुझे शिकायत भी है। उनको मालूम है कि मैंने उनकी मदद करी है, उनका फ़ोन आया तो मैंने कहा मैंने आपके लिए बात कर ली है, आप मंत्री बन जाओगे। उन्होंने ये बात जुबान से नहीं कही, ये दुःख तो होता है हम लोगों को भी।
भाई, अगर वो अपने दोस्तों में भी कहते हैं हाँ भाई अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी करी थी, तो मेरा दिल भर जाता। क्यों नहीं कही उन्होंने, क्यों नहीं ये बात कही? जब मुझसे वो फ़ोन कर रहे हैं, रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि मेरे को मंत्री बनाने में मदद करो, तो मैं मदद करके आ गया, तो क्या उनका धर्म नहीं था क्या कहने का? भई देखो मतलब अशोक गहलोत ने मेरी मदद भी की थी, ठीक है आज हमारी गलतफहमी हो गई आपस में, कुछ तो कहते वो, ये बातें नहीं कही उसके कारण आज सब कुछ बातें आगे बढ़ रही हैं।
दुनिया में सच्चाई का कोई विकल्प नहीं है, सुन लो। गांधी जी ने कहा था, 'द ट्रुथ इज गॉड, गॉड इज ट्रुथ', सत्य ही भगवान है, ईश्वर है, ईश्वर ही सत्य है, हम तो इस पे चलते हैं और पायलट साहब हों, चाहे कोई नेता हो, पीसीसी अध्यक्ष हों, चाहे नेता प्रतिपक्ष हो, डोटासरा जी हो और नेता हो, सबको हम तो यही कहेंगे भई सब लोग मिलके चलो, राजस्थानी कांग्रेस का मान-सम्मान हाईकमांड राहुल जी के दिमाग में ऐसा है जो कोई विश्वास नहीं कर सकता। बार-बार वो कह भी चुके हैं, अभी पीसीसी प्रेसिडेंट की और जूली साहब की तारीफ करके गए कि ये जुगल जोड़ी बनी रहे आपकी, अच्छा काम आप लोग कर रहे हो, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा? अगर वो कह दें, इससे बड़ा कॉम्प्लीमेंट क्या होगा?
25 सितंबर के घटनाक्रम को लेकर किए गए दुष्प्रचार के संबंध में:
आज मुझे सब कुछ मिल गया, मैं अति संतुष्ट पॉलिटिशियन हूँ देश का। अब मैं पद के पीछे नहीं हूँ। कोई पद ज़बरदस्ती आकर मुझपर पड़ जाए तो अलग बात है देखो। मैं कोई पद के लिए नहीं हूँ कि पद के लिए मैं ये करूँ, वो करूँ, कुछ नहीं करना मुझे।
तीन-तीन बार मुख्यमंत्री कम नहीं होता देखो। ये तो हमारे नेता लोग समझ नहीं पा रहे हैं मेरी भावनाओं को। मैंने कहा लाइन मेरे से बड़ी खींचो तुम। मेरी लाइन तुम मिटाओ मत, मेरे से बड़ी लाइन खींचो। कौन मुख्यमंत्री बनेगा, नहीं बनेगा, किसी को नहीं मालूम। हम चाहते हैं कि सब मिलकर चलते रहो, चलते रहो। अभी संकट जो मैं कह रहा हूँ देश संकट में है, तो क्यों नहीं तुम आगे आ-आकर के हम सब मिलकर देश की रक्षा करें? कांग्रेस का औरा जो राजस्थान में है, हिंदुस्तान में वो हमें महसूस है, दिल्ली में रैली होती है सबसे अधिक लोग राजस्थान से जाते हैं। हाईकमान इस बात को जानता है। 20-25 साल से मैं देख रहा हूँ। इसलिए कृपा करके सब मतभेद भूलो, सब एक हो जाओ।
और इस मीडिया वालों को, मेजर क्या वो मीडिया जो मुख्य मीडिया है वो मीडिया जो आपका क्या कहलाता है, गोदी मीडिया। अब गोदी मीडिया का गोदी हटे ये उन मीडिया वालों से चाहिए कि अब गोदी हटवा दें वो अपना। वो तब हटवा पाएँगे जब ईमानदारी के साथ में सामाजिक सरोकार रखेंगे, देश हित में बात करेंगे, और सरकार के दबाव में नहीं आएँगे तो जाकर के ये तमगा गोदी मीडिया का हटेगा।
और सोशल मीडिया में मैं कहना चाहूँगा कृपा करके आप सच्चाई पे चलो, और आप सचिन पायलट को नुकसान मत करो। बहुत नुकसान कर चुके हो, बहुत नुकसान कर चुके हो। इतना नुकसान कर दिया आप कल्पना नहीं कर सकते, मैं बराबर सुनता रहता हूँ उनको। अब मैं कहता हूँ अब किसको जाके मैं कहूँ? किसको जाके कहूँ? कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता, कोई कुछ बोलता है और कमेंट कर देते हैं हम लोगों पर।
कुछ एबीसीडी पता नहीं उनको, और रिवोल्ट हो गया, रिवोल्ट हो गया। अरे, रिवोल्ट कैसे हो गया? अगर 100 लोगों ने कहा कि हमने साथ दिया हाईकमान का, सरकार हमने बचाई है। हम में से किसी को भी बना देते मुख्यमंत्री, क्या गलत कहा उन्होंने? क्या गलत कहा उन्होंने? और उसको रिवोल्ट बता रहे हैं वो हाईकमान के खिलाफ है, पर मैंने माफी माँगी सोनिया गांधी से फिर भी, मैं उस वक्त विधायक दल का नेता था।
मैं नेता था विधायक दल का, मुझे तीन बार बिना माँगे हुए सोनिया गांधी ने मुझे मुख्यमंत्री पद दिया। 1998 के अंदर, 2008 में सेकंड टाइम मुख्यमंत्री बनाया मुझे सोनिया जी ने, थर्ड टाइम तो मैं 21 पे आया हुआ था। 2013 में मैं 21 पे आया हुआ था, तभी तीसरी बार राहुल गांधी जी ने, सोनिया जी ने, प्रियंका जी ने मिलकर मुख्यमंत्री बनाया।
मैं कांग्रेस प्रेसिडेंट बन रहा था, मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मैं पढ़ा-लिखा भी हूँ। ये क्यों भ्रम है मीडिया वालों को? और अनपढ़ आदमी होता तो फिर भी कह देते वो। अनपढ़ कामराज जी थे, तब भी कांग्रेस प्रेसिडेंट थे देश के। मैं अनपढ़ नहीं हूँ। मुझे पता है कांग्रेस प्रेसिडेंट का पद जहाँ गांधी जी अध्यक्ष रहे हों, पंडित नेहरू रहे हों, मोतीलाल नेहरू रहे हों, कौन नहीं रहा? सरदार पटेल रहे हों, उस कांग्रेस प्रेसिडेंट मुझे बना रही हैं सोनिया गांधी और कांग्रेस, तो मैं मना करूँगा? मैं मना करूँगा?
वो तो स्थिति ऐसी बना दी, वो भी एक कॉन्सपिरेसी थी मेरे ख्याल से। मुझे लगता है वो एक बड़ी कॉन्सपिरेसी हुई। अचानक ही ऑब्ज़र्वर आ गए, अचानक ही तमाशा हो गया, बदनाम मैं हो गया।
हिंदुस्तान में लोग समझते हैं अशोक गहलोत जो है, उसको मुख्यमंत्री रहना था, कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना था, इसलिए रिवोल्ट हुआ। मुझसे कितने नज़दीक आदमी भी देश में हैं, कितने नज़दीक मेरा खुद का मिलने वाला हो, उसके दिमाग में यही बात है कि भाई, अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री रहना था इसलिए रिवोल्ट करवा दिया। अब मैं उनको कैसे समझाऊँ? आज मैं समझा रहा हूँ आपको। अब भी कुछ भला मेरा हो जाए तो आप लोग भला करना, जो मैं बता रहा हूँ आपको। पूरा मुल्क जानता है कि मुझे मुख्यमंत्री रहना था मैंने रिवोल्ट करवा दिया, और वही मैं मीडिया की बात करूँगा।
जिस मीडिया ने बातें फैलाई थी, मैं चुप रहा, और चुप भी मैं इसलिए रहा मुझे सोनिया जी को बताना था कि चाहे ये पायलट के खिलाफ रिवोल्ट था या क्या था, मुझे मतलब नहीं है। आज मैं आया हूँ सिर्फ इसलिए कि मैंने जो है, मैं नेता था विधायक दल का। ऑब्ज़र्वर आए हुए थे एआईसीसी के, एआईसीसी ऑब्ज़र्वर के मायने होते हैं। चाहे वो खड़गे साहब थे चाहे अजय माकन जी थे, और मैं प्रस्ताव पास नहीं करवा पाया।
हालाँकि, मैंने रात को कहा था कि आप अभी इस मीटिंग को बंद करते हैं, कल वापस मीटिंग बुलाकर के अपन बात करेंगे। वो स्थिति बनी नहीं हमारी, इसलिए वो इसलिए जो है, वो नहीं हो पाया प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। मैंने जाके सॉरी फील किया मैडम के सामने कि मैं विधायक दल का नेता था। मुझे सब कुछ पार्टी ने दिया है, उसके बाद में भी ये स्थिति बन गई तो मैं माफ़ी चाहता हूँ। ये बात थी।
मुंबई में सड़क जाम कर जनता को परेशान करने पर मंत्री को महिला की खरी-खरी—
VIP कल्चर के नाम पर आम लोगों को क्यों झेलनी पड़े तकलीफ?
भाजपा की सत्ता में जनता की सुविधा नहीं, दिखावा ज़्यादा!
#Mumbai#VIPCulture#BJP
यह महिला आरक्षण बिल नहीं है - इसका महिलाओं से कोई संबंध नहीं।
यह बिल OBC विरोधी है,
यह बिल SC-ST विरोधी है,
यह बिल Anti National है - दक्षिण, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम और छोटे राज्यों के खिलाफ है।
हम भारत जोड़ने वाले न किसी का हक़ छिनने देंगे, न देश को बंटने देंगे।
As we celebrate the spirit of Chaitra Sukladi, Gudi Padwa, Chetti Chand, Navreh and Sajibu Cheiraoba across our diverse nation, we extend our warmest greetings to all those who are celebrating these joyous festivities.
May these spring festivals bring new beginnings, deepen the bonds of amity and fill every home with happiness and hope.
आज देश भर में विभिन्न त्योहार मनाए जा रहे हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नव संवत्सर विक्रम संवत-2083, उगादी, गुड़ी पड़वा, नवरोज (नवरेह) एवं चेटीचंड की हार्दिक शुभकामनाएं।
वसंत ऋतु और नववर्ष के स्वागत में मनाए जाने वाले ये सभी पर्व भारत की बहुरंगी संस्कृति एवं विविधता के प्रतीक हैं। इस अवसर पर मैं सभी देशवासियों के लिए सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करती हूं।