परन्तु प्रश्न उठता है क्या बुद्ध ,चार्वाक,आजीवक,रैदास,कबीर और दादू आदि भारत की विरासत का हिस्सा नही है ?आधुनिक काल में फूले, सावित्रिबाई फूले, शाहुजी महाराज, पेरियार, बाबासाहेब अंबेडकर आदि ने दलितों, पिछड़ो,आदि को शिक्षा का महत्व बताया, क्या ये भारत की विरासत का हिस्सा नही है?
नई शिक्षा नीति मानती है की हमे अपनी विरासत से सीख लेनी होगी. इस विरासत में केवल विवेकानंद,चरक,शुश्रुत,आर्यभट्ट, भाषकराचार्या,चाणक्या,पतंजलि,पाणिनी,गारगी,मैत्रेई,नागार्जुन, तिरुवल्लुवर,गौतम,पिंग्ला,शंकरदेव,आदि के नाम के उदाहरण दिए गये है.बिना सन्दर्भ बुद्ध का भी ज़िक्र है. परन्तु
A series of pictures that probably will never leave our mind.The lines that will echo in our head for a long time.This pandemic was worse than just a viral infection for India.हमारे दिल से , आपके दिल तक, उन हज़ारों दिलों के लिए जो शायद हम सब ने तोड़े हैं ।
#Pravaasi#CovidIndia
शांत स्वरूप बौध : चुप हो गयी वह आवाज़ जो कहती थी
" हमअंबेडकरवादी है-संघर्षों के आदि है;हमअंबेडकरवादी है-ये सीने फौलादी है".
"अब तक जो हुआ उसका गम नही; अब दिखना है की हम किसी से कम नही ".
"विचारों के युद्ध में किताबो से बड़ा हथियार कोई नही"
आज ही के दिन 3 जून,1995, बहुजन समाज के एक इतिहास की रजत जयन्ती-----------------------सभी को बधाई
भारतीय इतिहास में पहली बार कोई दलित महिला
-मा. कु. एड. मायावती जिन्हे आदरवश बहुजन समाज 'बहनजी' कहता है भारत के जनसंख्या के आधार पर सबसे बड़े प्रांत की पहली बार मुख्यमंत्री बनी.
दी न्यू यॉर्क टाइम्स के अनुसार अमेरिका मे एक अश्वेत जॉर्ज फ्ल्योड की पुलिस की कस्टडी में मौत.
75 शहरो में प्रदर्शन, लगभग 2 दर्जन शहरो में कर्फ़्यू है.
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ओबामा ने कहा है की 2020 के अमेरिका में यह सामान्य घटना नही है.
ये है प्रजातंत्र, एक भी नाजायज़ मौत स्वीकार नही.
हम मरेंगे अस्पताल में किट के बगैर करोना की बीमारी से
फिर भी हम पर बजेगी ताली और थाली घर की अटारी से
हम मरेंगे रेल की पटरी पर बदहाली की थकान से
फिर भी हम पर बरसाए जाएँगे फूल आसमान से.
Mother day पर एक माँ सड़क पर बच्चा जन्म दी और फिर उसी बच्चे को लेकर 160 किमी चलने को मजबूर हुई।
प्रधानमंत्री जी, भारत की माताओं का भी दर्द सुन लीजिए या फिर सिर्फ मन की बात करते रहेंगे? यही अच्छे दिन है?
कोरोना महामारी के कारण लाॅकडाउन (देशबन्दी) के आज 48वें दिन यह पहली राहत भरी खबर है कि रेलयात्री सेवा चरणवार कलसे शुरू हो रही है, जिसके लिए आजसे टिकट बुकिंग होगी। संभव है कुछ और अच्छी खबर देश को पीएम-सीएम वीडियो-वार्ता में आज मिले। लोगों से भी अपील है कि वे पूरा सहयोग करें।
बेंगलुरु से चलकर बिहार पहुँचे मज़दूरों को सिर्फ़ सूखा भात, नमक और मिर्च देकर ख़ानापूर्ति की गयी। सरकार का ऐसा पशुवत बर्ताव देखकर मन व्यथित और दुःखी है। इससे शर्मनाक क्या हो सकता है जब सरकार अपने लोगों को एक वक्त का खाना ठीक से नहीं खिला सकती? क्या ग़रीबों का आत्मसम्मान नहीं होता?
अनेक राज्यों द्वारा श्रमकानूनों में संशोधन किया जा रहा है। हम कोरोना के खिलाफ मिलकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन यह मानवाधिकारों को रौंदने, असुरक्षित कार्यस्थलों की अनुमति, श्रमिकों के शोषण और उनकी आवाज दबाने का बहाना नहीं हो सकता। इन मूलभूत सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं हो सकता।