मुझे पीएम के जन्मदिवस से समस्या नहीं है। मेरी समस्या तरीके से है। जो व्यक्ति सत्ता में आते ही दिखास और छपास पर नेताओं को समझाया करता था, आज उसकी चाटुकारिता में हर भाजपा सरकार, हर विभाग/मंत्रालय ओवर द टॉप उत्सवधर्मिता में डूबने को व्याकुल है। क्या यह दोगलापन नहीं है?
मोदी का जन्मदिवस उनके जीते-जी सरकारी खर्चे पर कैसे मनाया जा सकता है? उज्जैन के 58 लाख दीपों का व्यय भाजपा वहन करेगी या मध्यप्रदेश सरकार? दिल्ली के सवा लाख दीपकों का व्यय रेखा गुप्ता के व्यक्तिगत लॉकर से जाएगा या दिल्ली सरकार के फंड से?
मोदी का जन्मोत्सव एक व्यक्तिगत विषय है और उसका उत्सव पार्टी मना सकती है, सरकार नहीं। सरकार तब मनाएगी, जब वो सेवानिवृत्त हो चुके होंगे और जनता को लगेगा कि कुछ कर के गए हैं। संभवतः, राष्ट्रीय अवकाश हो जाए उस दिन, ‘सेवा दिवस’ मने और ड्राय डे रहे।
उनकी छवि नोटों पर आ जाए और… जो भी है, आप समझ गए होंगे। जीवित रहते ऐसा करना बिलकुल वही कार्य है जैसे गाँव में कुछ बुजुर्ग अपने जीवनकाल में ही मृत्युभोज करवा लेते हैं। उन्हें विश्वास रहता है कि उनके मरने पर नकारे लोग जमीन हथिया लेंगे, और भरगामा की जगह भैयारी भोज कर देंगे।
भाजपा मुख्यालय को दीपों से नहला दीजिए। हर भाजपा कार्यकर्ता कलशयात्रा निकाले। हर राज्य मुख्यालय में चायनीज झालड़ बँधे। महीने भर आयोजन हो। भोज और उत्सव हो। लोग उपवास और रोजे रखें। किसी को कोई समस्या नहीं होगी। पर स्कूलों में बच्चों को बुला कर दीये जलवाना, चित्रकारी, भाषण आदि, वह भी एक महीने तक!
बिहार में बाढ़ है और हमारे महान मुख्यमंत्री दीये जलवा रहे हैं! कर्ज में डूबे राज्य दीपकों का गिनीज रिकॉर्ड्स बनवा रहे हैं! और इन सबके मध्य मोदी जी की आत्मा धिक्कारती नहीं कि हे महामानव, ये तू क्यों करवा रहा है? रोक क्यों नहीं रहा अपने नाम पर हो रहे इस बकवास को?
सरकारी खर्च पर यह भौंडापन अस्वीकार्य है। मोदी ने देश के लिए बहुत कुछ किया है, क्योंकि वही कार्य होता है प्रधानमंत्री का। हमने अच्छी बातों की सराहना की है, और बुरी की आलोचना करते रहेंगे।
यह आत्ममुग्धता असुरक्षा की भावना और विश्वास की कमी के कारण बढ़ती जा रही है। आपका कार्य ही आपकी डिग्री, पहचान और पीआर होना चाहिए। इसके लिए कुछ भी अतिरिक्त करना, स्वयं के अच्छे कार्यों में कॉन्फ़िडेंस खोने जैसा है।
ब्रांड मोदी को मोदी के इनर सर्कल के मूर्खों ने जितना डाल्यूट किया है, वह एक केस स्टडी बनेगा।
खैर जो भी हो, आप शतायु हों। आप सत्ता में होने के कीर्तिमान बनाएँ। विहग, बंदी और चारण, आपका कीर्ति गायन करें। आपको भारत रत्न दिया जाए। आपके सम्मान में लोग स्वतः दीपक प्रज्वलित करें, आपको टैक्सपेयर के पैसों पर अम्बानी के स्तर का पीआर न करना पड़े, यही मेरी कामना है।
2010 में अशोक गहलोत वाली कांग्रेस सरकार अरावली खोदना चाहती थी तब भाजपा विरोध में थी ,
आज भजन लाल शर्मा वाली बीजेपी सरकार अरावली खोदना चाहती है तो कांग्रेस विरोध में है ,
असल में इन सत्तालोभी गिद्धों को हमारे हितों की चिंता नहीं है सिर्फ और सिर्फ अपने हितों की चिंता है , सतर्क रहें सचेत रहें, अपने हितों पर लगातार आवाज उठाते रहें।
#SaveAravalli
@YadavAnviRoyal हमें सोचना चाहिए कि ऐसी खबरें शेयर या देखकर हम किसी की जिंदगी बर्बाद करने में हिस्सा तो नहीं बन रहे?
प्राइवेसी का सम्मान करें, अनवेरिफाइड कंटेंट अवॉइड करें ।
यही जिम्मेदारी है।
📍 राजस्थान के खींवसर से BJP विधायक रेवंत राम डांगा का नया “विकास मॉडल” सामने आया है।
₹50 लाख के काम पर सीधा 40% कमीशन।
अब जरा सोचिए , जब ठेकेदार आधा पैसा घूस में उड़ाएगा तो सड़क बनेगी या मज़ाक?
सीमेंट कम , भ्रष्टाचार ज़्यादा यही है असली क्वालिटी कंट्रोल।
अब तिरक्षा सवाल है कि 👇
ये घूसखोर विधायक कब गिरफ्तार होगा?
या फिर “पार्टी का टिकट” ही सबसे बड़ा बेल बॉन्ड बन चुका है?
जनरल कैटेगरी की फीस: ₹12.42 लाख प्रति साल।
कुल MBBS खर्च > ₹68.31 लाख
SC/ST फीस: ₹0 — बिल्कुल कुछ भी नहीं।
मतलब एक गरीब जनरल कैटेगरी छात्र अपनी कमर तोड़कर 12.4 लाख हर साल भरे ,
और एक अमीर SC/ST छात्र एक रुपये की भी ज़िम्मेदारी न उठाए।
फिर भी देश को यह सुनने की मजबूरी है कि आरक्षण गरीबी के लिए नहीं होता।
यानी मेरिट भी तुम्हारी, पढ़ाई भी तुम्हारी, बिल भी तुम्हारा… और सिस्टम की नैतिकता भी तुम्हीं पर टिकी।
यह मॉडल नहीं, एक क्रूर असमानता है , जहाँ मेहनत करने वाला भरता जाता है ,
और नीतियाँ वास्तविक आर्थिक हालत नहीं, सिर्फ कैटेगरी देखकर फैसला करती हैं।
लेकिन सवाल उठाओगे तो अपराधी आप ही बना दिए जाओगे।
यही है भारत का न्याय मॉडल — जितना योग्य हो , उतनी ही सजा झेलो।
बीजेपी महायुति प्रत्याशी हाजी अरफात शेख ने "भारत माता की जय" बोलने से मना कर दिया।
@narendramodi जी ये एंटीनेशनल माना जाएगा या फिर मास्टरस्ट्रोक?
📍 मुंबई
भाजपा के नेता/प्रवक्ता जिस तरह से कैप्टन द्वारा पहलगाम बोलने पर चरमसुख पा रहे हैं, वह दोगलई है। यह कहना कि ‘हाथ नहीं मिलाया’, उससे बड़े स्तर की दोगलई है।
@BCCI और भारत सरकार, यानी भाजपा सरकार, यानी मोदी सरकार, को पहले तो मैच खेलना नहीं चाहिए था, खेल लिया तो पहलगाम की विधवाओं को ले कर यह नंगापन नहीं करवाना चाहिए था।
जीतने के बाद उनका नाम लेना स्पष्ट रूप से खाली स्टेडियम और संभवतः गिरते डिजिटल व्यूअरशिप (मैंने देखा नहीं) के कारण ये केवल डैमेज कंट्रोल है कि ‘हमने उनके लिए जीता है!’
अगला हार गए तो? फिर उनका सम्मान रिवर्स गियर में चला जाएगा? नंगई कर रहे हो भाजपा वालों, तो चुपचाप करो। हल्ला मत करो। अब यह न हो कि रैली में ये बोल दें कि मैच भी हरा दिया।
#BoycottINDvPAK #DeshdrohiBCCI
पंडित नेहरू को रोज़ गालिया देते है ये लोग आज तुम्हारा बजट 48 लाख करोड़ का है उस समय 500 का था देश में कुछ भी नहीं था
जो आज IIT IIM बाक़ी सब देख रहे हो तुम्हारे बाप ने बनाया है क्या 17 साल देश चलाएगा तो 2-3 गलती होंगी ही तुम मूल भावना देखो उनकी
- मेजर जनरल C.S धवन (रिटायर) 🫡🇮🇳
आ. लोकतंत्र के चौथे स्तंभ..
कल गुजरात के जूनागढ़ में स्थित गिरनार पर्वत की 5वीं टोंक पर भगवान नेमिनाथ के मोक्षकल्याणक के अवसर पर 2000 किमी. पद यात्रा कर जैन धर्म के लोग लाडू चढ़ाने जा रहे हैं।
हाईकोर्ट में केस भी जीत चुके हैं पर अनुमति नहीं दी जा रही, कवर करने का कष्ट करें।
@ANI
सदियों से जैन धर्मावलंबियों के लिए धार्मिक-आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण, जूनागढ़, गुजरात स्थित तीर्थस्थल श्री गिरनार जी में 2 जुलाई को आयोजित होने वाले तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी के ‘मोक्ष कल्याणक महोत्सव’ के पुण्य अवसर पर संपूर्ण विश्व के जैन समुदाय को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
जैनियों के इस तीर्थस्थल पर पहुँचने वाले हज़ारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सरकार निष्पक्ष भूमिका निभाते हुए, पुख्ता प्रबंध करे, जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न घटे और कोई अनहोनी न हो और यह शुभ कार्यक्रम निर्बाध आयोजित हो सके।