हम ओर हमारी धर्म करने की परम्परायें कैसे प्रकृति को असंतुलित करती है।
चींटियों को आटा ओर शक्कर डालना,कबूतरों को चुग्गा डालना,कुत्ते को रोटी देना ओर बंदरों को केला खिलाना
हम कभी नहीं सुधरेंगे क्योंकि हमारे मस्तिष्क में यहीं सब भरा गया है
“गऊ हमारी माता है” नारे के परिणा�� असली तबाही मचायेंगे
धर्म के नाम पर जनता को खून-खून करवाते हैं,
खुद देश की प्रॉपर्टी बेच कर अम्बानी-अडानी जैसा बना रहे हैं।
मंदिर दिखाओ, मस्जिद दिखाओ, फ्लैग दिखाओ…
लेकिन रेलवे, बीएसएनएल, एयर इंडिया, पीएसयू सब बेच दो।
ये चंदा चोर, वोट चोर मंडली वाले... जनता को धर्म का नशा पिला कर देश का माल खा जाते हैं।
ये पूरे देश के गद्दार हैं।
This isn’t just an anthem.
This is pure soul.
Deaf children. Silent voices.
Yet every gesture screams louder than any song:
“Jana Gana Mana…”
No sound.
Only pure, unbreakable love for the nation.
Patriotism has no language.
Patriotism has no barriers.
This silent national anthem gave an entire country goosebumps.
To every Indian ,especially the ones who feel the tricolour in their heart without needing to hear a single note:
Happy Independence Day.
Jai Hind. 🇮🇳
#IndependenceDay
सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज़ादी हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा दिया गया सिर्फ़ एक तोहफ़ा नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी भी है।
यह ज़िम्मेदारी है सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलने की, संविधान और तिरंगे के मूल्यों को अपने दिल में रखने की और हर हाल में लोकतंत्र की रक्षा करने की।
मुझे गर्व है कि हमारे देशवासी, खासकर युवा, इन मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हैं।
जय हिंद! 🇮🇳
प्रदर्शन ख़त्म हो गया, मीडिया के कैमरे चले गए, उसके बाद सूने पड़े जंतर मंतर की सफाई की सेवा इस तरह की गई। इससे पार्टी को वोट नहीं मिलना क्योंकि सड़���ें वोट देने नहीं आतीं, लेकिन शाबाशी तो मिलनी चाहिए @CongressSevadal के कार्यकर्ताओं और संगठक @srinivasiyc को
मुस्लिम लड़कियों को कई बार हिजाब की वजह से शक की नज़र से देखा गया, तरह-तरह के आरोप लगाए गए, और उन्हें गलत पहचान से जोड़ने की कोशिश की गई।
#CJPProtest जंतरमंतर पर कुछ लोग खाना खाकर कूड़ा छोड़कर चले गए पर हिजाब पहनी एक लडक़ी ने बिना किसी दिखावे के सफाई की और देश के सामने ज़िम्मेदारी की एक मिसाल पेश की।
किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके व्यवहार और कार्यों से होना चाहिए, न कि उसके पहनावे या पहचान क��� आधार पर।
यह गांधी-नेहरू परिवार है...!
'संघी गैंग' जिसे सरदार पटेल ने 'कानाफूसी गैंग' कहा था—गांधी परिवार की विश्वसनीयता पर शक पैदा करने के लिए हर जगह झूठ फैला रहा था। उनका दावा था कि सोनिया गांधी एक विदेशी एजेंट थीं, जिन्होंने इंदिरा गांधी को खत्म कर दिया और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए राजीव को सत्ता में लाईं; फिर भी, जब राजीव ने उनके कहने पर काम करने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने उन्हें भी हटवा दिया। अब रास्ता साफ था: हत्या 21 मई, 1991 को हुई, और ठीक एक दि�� बाद, 22 मई को कांग्रेस कमेटी ने सर्वसम्मति से उन्हें पार्टी अध्यक्ष घोषित कर दिया। लेकिन फिर, एक हैरानी भरी बात हुई—
उन्होंने यह पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया और इसके बजाय राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी। वह अपने पति की मौत से बुरी तरह टूट गई थीं, फिर भी हैरानी होती है कि कोई अपना मकसद इतनी आसानी से कैसे छोड़ सकता है। उस 'विदेशी महिला' को एक भारतीय महिला से सीखना चाहिए था, जिन्होंने अपने पति की चिता की राख ठंडी होने से पहले ही उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। सोनिया के पास सीधे प्रधानमंत्री बनने का मौका था; उनके साथ जनता की सहानुभूति की लहर थी—ऐसा मौका शायद ही कभी मिलता है। अगर वह आगे बढ़तीं, तो भारी जीत और प्रधानमंत्री पद उन्हें मिल जाता। इसके बजाय, वह पूरी तरह से राजनीति से दूर हो गईं; हालांकि कांग्रेस की स��कार बनी, लेकिन गांधी परिवार का कोई भी सदस्य उसमें शामिल नहीं था।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, वरिष्ठ नेता दूर होते गए और पार्टी कमजोर होने लगी। दो-तीन साल तक कांग्रेस नेताओं ने उन पर पार्टी की कमान संभालने के लिए भारी दबाव डाला, और आखिरकार, वह मान गईं। लगभग आठ साल बाद, वह पार्टी में लौटीं, उसकी अध्यक्ष बनीं, और—अटल बिहारी को हराने के बाद—प्रधानमंत्री पद की दावेदार के रूप में उभरीं। अब कोई बाधा नही�� बची थी, फिर भी 'संघियों' से प्रभावित लोगों ने उनके विदेशी मूल का मुद्दा उठाया। उन्होंने राष्ट्रपति को ईमेल भेजे और कानूनी अड़चनें पैदा कीं। राष्ट्रपति पर भारी दबाव डाला गया कि वह किसी भी कीमत पर उन्हें पद की शपथ न दिलाएं; हालांकि, राष्ट्रपति कानून से बंधे थे और उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। नतीजतन, उन्होंने सोनिया गांधी को नियुक्ति पत्र जारी किया, जिसमें कहा ��या कि जब भी वह शपथ लेना चाहें, राष्ट्रपति भवन तैयार है।
अब रास्ता पूरी तरह साफ था, कोई अड़चन नहीं बची थी—फिर भी, वह कुर्बानी देने के लिए तैयार थीं। जब डॉ. मनमोहन सिंह का नाम आगे बढ़ाया गया, तो राष्ट्रपति को नियुक्ति का नया पत्र जारी करना पड़ा। राष्ट्रपति के नियुक्ति पत्र का मतलब साफ़ था—कोई कानूनी अड़चन नहीं थी—तो फिर उन्होंने ऐसा क्यों किया? पाँच साल बीत गए; उनके बेटे राहुल गांधी ने युवाओं को एकजुट करने के लिए दिन-रात मेहनत की। चुनाव हुए और एक बार फिर पूरा मौका था; खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "या तो आप या राहुल यह पद संभालें; मेरी ज़िम्मेदारी पूरी हो गई है," फिर भी उन्होंने उन्हें ही दोबारा प्रधानमंत्री बनाया।
अब, 'संघी गैंग' खुद उलझन में है। कोई व्यक्ति—ऐसे देश में जहाँ गाँव के सरपंच के चुनाव पर भी बंदूकें निकल आती हैं—प्रधानमंत्री बनने का साफ़ मौका तीन बार कैसे ठुकरा सकता है? कोई महिला तीन अलग-अलग मौकों पर प्रधानमंत्री का पद कैसे ठुकरा सकती है? जहां तुम ��्वार्थी सत्ता के लिए विधायक सांसद नेता खरीदते रह जाते हो।
तो सुनो, 'शाखा गैंग' के कानाफूसी करने वालों: यह एक त्याग है—गांधी परिवार का इस देश के लिए किया गया त्याग—जिसे आप कभी नहीं समझ पाएंगे। आप सत्ता की कुर्सी के लिए लड़ते रहिए, लेकिन मेरी बात याद रखिएगा: एक दिन वह कुर्सी खुद-ब-खुद उनके पास आएगी, और तब भी वे कुर्सी से ज़्यादा देश को प्राथमिकता देंगे।
#Gandhi #Nehru
@RahulGandhi @priyankagandhi @INCIndia
राहुल गांधी जी पर फिल्म आ रही है।🔥⚡️✊
RT रुकनी नहीं चाहिए साथियों ताकि राहुल गांधी पर आधारित यह मूवी तहलका मचा दे...🙌🏻
देखता हूं राहुल गांधी को कितने लोग पसंद करते हैं।
अल्बानियाईयों से ईर्ष्या होती है।
वे अपने देश को बेचे जाने के ख़िलाफ़ महीने भर से सड़कों पर हैं और छोटी-मोटी तादाद में नहीं, पूरा देश ही मौजूदा सत्ता के ख़िलाफ़ विद्रो�� पर उतारू है।
अल्बेनियाई सरकार ने अल्बेनियाई ज़मीन और साज़न द्वीप ट्रम्प के दामाद को बेच दिया है। ये प्रदर्शन उसी के ख़िलाफ़ चल रहे हैं।
और भारत को देखिए। अडानी-अंबानी को पूरा देश सौंपा जा रहा है मगर चूँ भी नहीं हो रही।
और तो और राम मंदिर में डकैती हुई है इसके बाद भी कहीं कोई धरना, प्रदर्शन नहीं हो रहा। मोदी-योगी ऑपरेशन कवर अप चला रहे हैं, इस पर भी कोई आपत्ति नहीं है सच्चे हिंदुओं को।
कभी-कभी तो लगता है कि ये मुर्दों का देश है, यहाँ ज़िंदा क़ौमें नहीं बसतीं।