स्वामित्व योजना के तहत भू-स्वामियों के अधिकार अभिलेखों का होगा निःशुल्क पंजीयन
17 सितम्बर से शुरू होगा स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 योजना का क्रियान्वयन
पंजीयन के लिए आवेदक से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा
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#Morena
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से सवाल पूछने की कोशिश करने पर पत्रकारों शाहीन और नफीसा को पुलिस द्वारा कथित रूप से मारते-पीटते थाने ले जाने, गाली-गलौज करने, धमकाने और उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप यह बताता है कि World Press Freedom Index में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर क्यों है।
सबसे चिंताजनक यह है कि उनका कहना है कि उनके मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार और बढ़ गया यह भाजपा की मुस्लिम विरोधी मानसिकता और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल पूछना अपराध नहीं है। पत्रकार की पहचान देखकर उसके साथ भेदभाव करना लोकतंत्र और संविधान दोनों के खिलाफ है।
यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है!
“च***र हमारे यहाँ कुर्सियों पर नहीं बैठ सकते, यह हमारे गाँव की मर्यादा है।”
2026 के भारत में भी किसी दलित का कुर्सी पर बैठना जातिवादी वर्चस्व को चुनौती लगता है। कैसी “मर्यादा”, जो किसी इंसान के अपमान और जातीय श्रेष्ठता पर टिकी हो?
संविधान ने बराबरी का अधिकार दे दिया, लेकिन वर्चस्ववादियों के दिमाग़ से ऊँच-नीच नहीं निकली। लड़ाई सिर्फ़ एक कुर्सी की नहीं है - सम्मान, सत्ता, संसाधन और बराबर की हिस्सेदारी की है।
23 जून को जंतर-मंतर की घटना पर पुलिस कहती है कि संजय कुमार की चोटें सामान्य थीं और खोपड़ी में दरार की बात निराधार है। लेकिन आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में वह खुद “7 टांके”, “मरने की स्थिति” और “307 बनता था” जैसी बातें कह रहा हैं।
वह यह भी दावा कर रहा हैं कि संजय कुमार की बेटी निशु, थाने के बाहर खड़े होकर कह रही थी कि “अगर मेरे बाप को इंसाफ नहीं मिला तो हम जहर खाकर मर जाएंगे।” साथ ही उनका दावा है कि वे जेल तक नहीं गए और “कपिल मिश्रा अपने बड़े भाई हैं”, “चिराग पासवान अपने बड़े भाई हैं” तथा “सबका सपोर्ट है।"
तो सवाल है कि अगर घायल की हालत इतनी गंभीर थी और 7 टांके लगे थे, तो पुलिस की MLC में चोटें सामान्य कैसे बताई गईं? अगर धारा 307 का मामला बनता था, तो आरोपी जेल क्यों नहीं गया?
“कपिल मिश्रा के फोन के बाद छोड़ने का दावा सच है या झूठ? क्या पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच करेगी? जब राजनीतिक संरक्षण का इतना स्पष्ट दावा सामने आ रहा है, तो पुलिस यह क्यों नहीं स्पष्ट कर रही कि इस मामले में किसी अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप की कोई भूमिका थी या नहीं?”
आखिर पुलिस के रिकॉर्ड और आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में इतना बड़ा अंतर क्यों है? हमें इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अपने पीड़ित परिवार को न्याय दिला कर रहेंगे। जय भीम, जय भारत।।
खुलेआम ये गुंडा आख़िर किसे ललकार रहा है - कानून को या पुलिस-प्रशासन को?
सरकारी संरक्षण तो है ही, लेकिन क्या पुलिस ने भी इसे गुंडागर्दी का ‘लाइसेंस’ दे रखा है?
आख़िर इतना बेख़ौफ़ होने की ताक़त इन्हें कौन दे रहा है?
अगला प्रधानमंत्री का नाम लेकर सबको बता रहा है कि चूँकि उनका हाथ इसके सर पर है इसलिए अपराध करके भी वो खुला घूमता रहा. अब अगर सरकार और प्रधानमंत्री इसकी बात का खंडन नहीं कर रहे इसके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हो रही तो क्यों न माना जाए कि ये सच ही कह रहा है.
अत्यंत दुःखद एवं अपूरणीय क्षति
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विधानसभा रसड़ा, जनपद बलिया तथा समूचे पूर्वांचल के लोकप्रिय एवं जनप्रिय बसपा विधायक मा० उमाशंकर सिंह जी के उपचार के दौरान निधन का समाचार अत्यंत दुःखद और हृदय विदारक है। उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन में एक अपूरणीय शून्य उत्पन्न हो गया है। उनका जनसेवा के प्रति समर्पण, संघर्षशील व्यक्तित्व और जनता के प्रति अपनापन सदैव स्मरणीय रहेगा।
प्रकृति से प्रार्थना है कि शोकाकुल परिवार, समर्थकों एवं शुभचिंतकों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दें।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि...