IIT बॉम्बे के छात्र की जान जातिवाद की वजह से नहीं गयी,
लेकिन देवा द्विवेदी की गई है!!
22 साल के देवा द्विवेदी ने SC/ST एक्ट लगाए जाने और उससे हुए मानसिक दबाव में आत्महत्या कर ली!
तो अब देवा को न्याय कौन देगा?
SC/ST एक्ट हटाओ या अब सवर्ण atrocity एक्ट भी दो!
बहुत हुआ!
मुझे पीएम के जन्मदिवस से समस्या नहीं है। मेरी समस्या तरीके से है। जो व्यक्ति सत्ता में आते ही दिखास और छपास पर नेताओं को समझाया करता था, आज उसकी चाटुकारिता में हर भाजपा सरकार, हर विभाग/मंत्रालय ओवर द टॉप उत्सवधर्मिता में डूबने को व्याकुल है। क्या यह दोगलापन नहीं है?
मोदी का जन्मदिवस उनके जीते-जी सरकारी खर्चे पर कैसे मनाया जा सकता है? उज्जैन के 58 लाख दीपों का व्यय भाजपा वहन करेगी या मध्यप्रदेश सरकार? दिल्ली के सवा लाख दीपकों का व्यय रेखा गुप्ता के व्यक्तिगत लॉकर से जाएगा या दिल्ली सरकार के फंड से?
मोदी का जन्मोत्सव एक व्यक्तिगत विषय है और उसका उत्सव पार्टी मना सकती है, सरकार नहीं। सरकार तब मनाएगी, जब वो सेवानिवृत्त हो चुके होंगे और जनता को लगेगा कि कुछ कर के गए हैं। संभवतः, राष्ट्रीय अवकाश हो जाए उस दिन, ‘सेवा दिवस’ मने और ड्राय डे रहे।
उनकी छवि नोटों पर आ जाए और… जो भी है, आप समझ गए होंगे। जीवित रहते ऐसा करना बिलकुल वही कार्य है जैसे गाँव में कुछ बुजुर्ग अपने जीवनकाल में ही मृत्युभोज करवा लेते हैं। उन्हें विश्वास रहता है कि उनके मरने पर नकारे लोग जमीन हथिया लेंगे, और भरगामा की जगह भैयारी भोज कर देंगे।
भाजपा मुख्यालय को दीपों से नहला दीजिए। हर भाजपा कार्यकर्ता कलशयात्रा निकाले। हर राज्य मुख्यालय में चायनीज झालड़ बँधे। महीने भर आयोजन हो। भोज और उत्सव हो। लोग उपवास और रोजे रखें। किसी को कोई समस्या नहीं होगी। पर स्कूलों में बच्चों को बुला कर दीये जलवाना, चित्रकारी, भाषण आदि, वह भी एक महीने तक!
बिहार में बाढ़ है और हमारे महान मुख्यमंत्री दीये जलवा रहे हैं! कर्ज में डूबे राज्य दीपकों का गिनीज रिकॉर्ड्स बनवा रहे हैं! और इन सबके मध्य मोदी जी की आत्मा धिक्कारती नहीं कि हे महामानव, ये तू क्यों करवा रहा है? रोक क्यों नहीं रहा अपने नाम पर हो रहे इस बकवास को?
सरकारी खर्च पर यह भौंडापन अस्वीकार्य है। मोदी ने देश के लिए बहुत कुछ किया है, क्योंकि वही कार्य होता है प्रधानमंत्री का। हमने अच्छी बातों की सराहना की है, और बुरी की आलोचना करते रहेंगे।
यह आत्ममुग्धता असुरक्षा की भावना और विश्वास की कमी के कारण बढ़ती जा रही है। आपका कार्य ही आपकी डिग्री, पहचान और पीआर होना चाहिए। इसके लिए कुछ भी अतिरिक्त करना, स्वयं के अच्छे कार्यों में कॉन्फ़िडेंस खोने जैसा है।
ब्रांड मोदी को मोदी के इनर सर्कल के मूर्खों ने जितना डाल्यूट किया है, वह एक केस स्टडी बनेगा।
खैर जो भी हो, आप शतायु हों। आप सत्ता में होने के कीर्तिमान बनाएँ। विहग, बंदी और चारण, आपका कीर्ति गायन करें। आपको भारत रत्न दिया जाए। आपके सम्मान में लोग स्वतः दीपक प्रज्वलित करें, आपको टैक्सपेयर के पैसों पर अम्बानी के स्तर का पीआर न करना पड़े, यही मेरी कामना है।
वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रदीप सिंह जी ने वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए कहा है कि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा नुकसान समाज को ही भुगतना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीजेपी अपनी नीतियों में कोर्स करेक्शन करने के बजाय समाज को जातियों के आधार पर बाँटकर उन्हें आपस में लड़वाना अधिक उचित समझ रही है।
घबराओ मत पंडित ठाकुर और बनिया भाइयों मोदी बहुत बुरा लग रहा इसलिए मोदी को हटा दो ok हटा दो
कांग्रेस को ले आओ तो ले आओ भाई आपको लगता है इससे आरक्षण ख़तम हो जायेगा सही बात है ख़तम हो जायेगा
क्योंकि जिन भी देशो मे मुस्लिम आबादी 50% पहुंच गई वहां से सारे धर्म कानून नियम संविधान स्वतः समाप्त हो जाते है
किसी का कोई अधिकार नही रहता सिर्फ शरिया होता है धीरे धीरे आपकी आबादी हजम हो जाती है
मुस्लिम बहुत चालक कौम है पहले. भाई चारा फिर भाई ही चारा
एक छोटे से कबीले मे पैदा हुआ मौजहब आज 57 देशो मे बादशाहत रखता है तुम पूरी दुनिया के नियंता थे अमेरिका तक आपकी मय सभ्यता थी आज सिमट कर भारत नेपाल मे रह गए जहाँ आज मोदी को हटाने का ख्वाब देख रहे हो अगर मुसलमानो के फैलाये इस भ्रमजाल मे हो
हस्ती मिटती नहीं हमारी,
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा
कभी तुम पूरी दुनिया के शाशक थे आज सिमट के एक देश मे पहुंच गए उसे भी खाये जा रहे है कुछ नहीं बचेगा न तुम न तुम्हारा अहंकार की हम तो परशुराम वंशी है तो हम राम वंशी है हम कृष्ण वंशी है
ज़ब तक हिन्दू है तभी तक हिंदुस्तान है जिसदिन हिन्दू घटा उसदिन तुम्हे पंडित जी पावलागि ठाकुर साहब राम जोहार करने वाला कोई नहीं होगा क्योंकि ब्राह्मण ठाकुर और बनियों की लड़कियां उनके प्राइम टारगेट पर हैँ और दलित तो उनका पसंदीदा आहार है छोटी छोटी बातों से देश नहीं बचेगा!
ये चीनी कभी पेट्रोल कभी प्याज़ के. लिए रोने वालों का देश बन गया है उसके लिए रोयेंगे लेकिन डेढ़ लाख का आई फोन खरीदने के लिए 6घंटे लाइन लगाएंगे तब महगाई नहीं दिखेगी
उन्हें लगता है की सरकार ने 12 साल मे देश के लिए कुछ नहीं किया उनको सिर्फ खुदा ही बचाएगा
यही देश है ज़ब आकर पाकिस्तानी भारतीय सैनिकों का सिर काट ले जाते थे हम डोजियर भेजते थे इसलिए लड़ो इसी सरकार से लड़ो अपना अभीष्ट लो सारे आरक्षण आर्थिक हो लेकिन सब विधि अध्यन के बाद पाया की वर्तमान सरकार के काल मे ही हम अपना लक्ष्य पा सकेंगे!!!
हरि तिवारी जी की कलम से
'घर की छत और आंख के आंसू हमने एक साथ टपकते देखा'
प्रतापगढ़ रामपुर विधानसभा क्षेत्र के ननौती ग्राम सभा के संतोष कुमार मिश्रा, अपने कुल 10 परिवार के सदस्यों के साथ मुश्किल भरी जिंदगी जी रहा हैँ ।
Congress के प्रमोद तिवारी का पूरा खान दान यही से विधायक है 40-50 सालों से..
देखिए कैसे ये एक्ट पैसे कमाने का जरिया बन चुका है!
लोग फ़र्ज़ी केस कर के लखपति बन रहे हैं औऱ सरकार इस एक्ट के दुरूपयोग पर लगाम लगाने की बजाए, उल्टा मुआवजा 40% और बढ़ा रही है!
#StopMisuseOfSCSTAct
The very spirit of law that" let not one innocent get punished , even if 99 accused walk free" is defeated in this case. Let @narendramodi Ji and Hon'ble Supreme Court of India take a note of it.
Sundar Pichai and Gauranga Das both graduated in the same 1993 batch as Metallurgical Engineering students, though they attended different campuses, with Pichai studying at IIT Kharagpur and Das at IIT Bombay.
While Pichai pursued a career in technology and eventually became the CEO of Google, Das chose a spiritual path to become an ISKCON monk and educator.
Years later, the two ran into each other at a gathering where Pichai remarked that Das looked younger than him, prompting the monk's famous reply: "You deal with Google, which creates stress. I deal with God, who releases stress." #SundarPichai #ISKCON #stress
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
🔥 क्रिस्प एंड क्लियर अजीत 😂.
"हम जुनैद के हाथ का खाएंगे भी नहीं। काहे खाएंगे जुनैद का?"
"मतलब साला थूक करके दे रहा है, क्या करके दे रहा है... हम काहे जुनैद का खाएं?"
"हमारे यहां कोई जवाहर आए, हमारे यहां कोई इंदिरा आए, राहुल, राजीव... इस टाइप का कोई आए, वो ठेला लगाए यहां पे, हम उनके हाथ का खाएंगे।"
"शुद्ध, बढ़िया, सुपाच्य भोजन जो है वो कराएं... हम वो खाएंगे। हमें जुनैद का चाहिए भी नहीं। जुनैद अपना जुनैदों को..."