बीमारी सिर्फ SC/ST को होती है क्या?
GC/OBC बीमार नहीं होते?
बीमारियों के इलाज में भी जाति देखकर इलाज़ होगा, गरीबी देखकर नहीं???
आखिर हम देश को कहाँ लेकर जा रहे हैं, और ऐसी नीतियों से जातिवाद खत्म होगा क्या?
योगी जी vs मुख्तार अंसारी युद्ध की पूरी सच्चाई🔥🤟
योगी जी पर कैसे 2008 में जानलेवा हमला हुआ था
यह हमला मुख्तार अंसारी के लोगों ने किया था
योगी जी बहुत मुश्किल से बच पाए थे
एनिमेशन वीडियो में पूरा कहानी देखिए
अब आया कांग्रेस पहाड़ के नीचे।
अब उन्हें अपनी गलती का एहसास होगा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ संविधान संशोधन में मोदी सरकार का क्यों साथ दिया था?
20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने Dr. Subhash Kashinath Mahajan v. State of Maharashtra मामले में SC/ST Act के दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए कहा था कि:
1. हर शिकायत पर तुरंत गिरफ्तारी जरूरी नहीं है।
2. सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी से पहले संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी की अनुमति और गैर-सरकारी व्यक्ति के मामले में SSP स्तर की अनुमति होनी चाहिए।
3. DSP स्तर पर प्रारंभिक जांच (preliminary inquiry) की जा सकती है ताकि देखा जा सके कि आरोप प्रथमदृष्टया SC/ST Act का अपराध बनाते हैं या शिकायत झूठी/प्रेरित तो नहीं है।
4. यदि प्रथमदृष्टया मामला नहीं बनता या शिकायत स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण/झूठी है, तो अदालत अग्रिम जमानत दे सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कांग्रेस समेत सारे विपक्षी दलों और NDA के सहयोगी दलों ने देश भर में आंदोलन खड़ा कर दिया।
2018 में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटते हुए संविधान में संशोधन कर दिया और ऐसा draconian कानून बनाया की हर गैर दलित व्यक्ति इसकी चपेट में आ रहा है। दलित के खिलाफ जुबान खुली नहीं कि सीधे जेल। बिना मुकदमा चलाए सैकड़ों लोग आज भी देशभर की जेल की हवा खा रहे हैं।
राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में SC/ST Act के तहत FIR दर्ज होने की खबर है। BNS की धाराओं 196 और 299 तथा SC/ST Act की धारा 3(1)(Q) लगाई गई है। मामला उस विवाद से जुड़ा है जिसमें उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित “शुद्धिकरण” को जातिगत भेदभाव/छुआछूत से जोड़ा था।
सारी दफाएं गैर जमानती है।
अब कुछ सवाल आम लोगों से, बड़े वकीलों से, नेताओं से, सरकारों से और सुप्रीम कोर्ट समेत सभी अदालतों से पूछा जाएगा कि:
क्या राहुल गांधी के साथ वही कानूनी प्रक्रिया होगी जो एक आम नागरिक के साथ होती है?
क्या राहुल गांधी गिरफ्तार हो सकते हैं?
कानूनन—हाँ। सांसद या नेता प्रतिपक्ष होना उन्हें आपराधिक कानून से कोई सामान्य छूट नहीं देता।
लेकिन आम आदमी और बड़े नेता में फर्क है?
एक सामान्य व्यक्ति के पास अक्सर
महंगा कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं होता।
राजनीतिक प्रभाव नहीं होता।
मीडिया का ध्यान नहीं होता।
हाईकोर्ट/सुप्रीम कोर्ट तक तुरंत पहुंच नहीं होती।
वहीं राहुल गांधी जैसे व्यक्ति के पास देश के सबसे बड़े वकीलों की फौज और पीछे कांग्रेस जैसी राजनीतिक संगठन है।
क्या उन्हें बिना जांच के गिरफ्तार किया जा सकता है?
संविधान संशोधन तो यही कहता है कि बिना जांच गिरफ्तार किया जा सकता है।
क्या “कानून सबके लिए बराबर है”—
असली टेस्ट यही है।
मेरे विचार से इस मामले को BJP बनाम Congress के चश्मे से देखने के बजाय एक बेहतर कसौटी के रूप में परखा जाना चाहिए।
जो प्रक्रिया एक सामान्य नागरिक के साथ अपनाई जाती है, वही राहुल गांधी के साथ भी अपनाई जाए—न कम, न ज्यादा।
अगर सामान्य व्यक्ति के खिलाफ SC/ST Act में FIR होने पर पुलिस तत्काल गिरफ्तारी करती है, तो केवल राहुल गांधी होने के कारण उन्हें विशेष संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
बराबरी का मतलब है कि हर व्यक्ति पर समान कानून लागू हो।
अब समय आ गया है कि कांग्रेस समेत सारी राजनीतिक दल इस बात पर सोचें और विचार करें कि एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग रोकने के लिए तुरंत संविधान में संशोधन कर दिया जाए।
वरना आम जनता के दिमाग में यह भ्रम बना रहेगा कि कानून सबके लिए समान नहीं है।
आम आदमी के लिए अलग, रसूखदार आदमी के लिए अलग।
दलित समाज को अंबेडकर जी से प्रेरणा लेनी चाहिए
ना की भीमान्ड रावण जैसे अंबेडकरवादियों से
अंबेडकर को अपना सरनेम और अपनी बेटी ब्राह्मण
ने ही दी थी ना की किसी पिछड़े ने
अजीत भारती ने नीले कबूतरों को दी सीधी सलाह
अपनी बहन और बेटी से दो प्रश्न जरूर पूछा करो,,,,
पहला : कोई लड़का तो नहीं परेशान कर रहा है
दूसरा : कोई मुस्लिम लड़का तो नहीं परेशान कर रहा है.?
कभी टाइम मिले तो स्कूल कॉलेज के बाहर किसी पान की दुकान पर या दूर खड़े हो कर ,
आते और जाते वक्त उसपर नजर रख लिया करो....
बहुत सारी लड़कियाँ इसलिए भी नहीं बताती कि कौन घर वालों को परेशान करे,
कुछ तो इसलिए भी नहीं बताती कि कल को हम पर ही सारा दोष डाल देंगे.....
आप सोच भी नहीं सकते उससे कहीं अधिक गहरा जाल बिछाया जाता है।
ऐसे सवाल पूछ लिया करो, इससे बड़े छोटे की मर्यादा भंग नहीं होती,
वास्तव में यह फिक्र ही बड़े छोटे का अंतर बताता है।।।।
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि किसी SC/ST को सार्वजनिक तौर पर भी माँ-बहन-भाई-बाप की गाली दी जाए, तो वह जातिसूचक गाली नहीं होगी और उस पर कोई केस नहीं बनेगा। वह केवल गाली कही जाएगी जो कोई उस स्तर का अपराध नहीं है कि आपको जेल हो जाए।
यदि कोई सांसद महिलाओं को ‘रंडी’, ‘सेकस करती है’, ‘जिस्म बेचती है’ लिखे, या किसी बलात्कारी मानसिकता वाले IAS को अपने भाषणों में प्रमोट करे, तो वह कानून का एक मैक्सिम ‘वन हू सीक्स इक्विटी, मस्ट कम विद क्लीन हैंड्स’ के विरोध में दिखता है। वह किसी अन्य पर गाली देने का आरोप नहीं लगा सकता।
इसलिए मैं जो भी बोलता हूँ, वह विधि की वृत्त में ही रह कर बोलता हूँ। सुप्रीम कोर्ट की बात संलग्न है।
IMPORTANT
This demolition drive against illegal construction around Delhi's Jama Masjid today, is being carried out on court orders following a petition by @BhaiPreetSingh
Preet researched the ownership of the land around the mosque complex, found large-scale land grab - directly linked to one of the most powerful clerics, Shahi Iman of Delhi's Jama Masjid Ahmed Bukhari - and then moved the courts
It was reported exclusively by me on @RashtraJyoti three days ago
This is massive
In January, Preet's research-petition led to bulldozing of massive encroachments by Faiz e Elahi mosque complex at Ramlila Maidan-Turkman Gate
Take on such powerful forces, even if for the larger public good, means constant threat to one's own life. We stand firmly with @BhaiPreetSingh and will always do
BTW, this is only part 1 of the Jama Masjid complex encroachment story. More will unfold in the coming months.
आप लालू की बात करते है, बताइए अंबेडकर ने अपने बेटे यशवंत को क्यों नहीं पढ़ाया? कौन ब्राह्मण उसे पढ़ने से रोका ? अंबेडकर का बेटा आख़िर मैट्रिक पास ही क्यों रह गया? बेटे को पढ़ाना ही मनुवाद है। सबसे संभव नहीं है।
SC/ST एक्ट के दुरुपयोग और फर्जी मुकदमों के मामलों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता प्रीत सिरोही ने पीड़ितों की सहायता के लिए एक पहल शुरू की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ इस कानून के तहत झूठी या फर्जी एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई है, तो उन्हें चुप बैठने के बजाय कानूनी व सामाजिक लड़ाई लड़नी चाहिए।
प्रीत सिरोही ने पीड़ितों से अपने संबंधित दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ संपर्क करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फर्जी मुकदमों से प्रभावित लोगों की आवाज को प्रमुखता से उठाया जाएगा और उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में उन्होंने पीड़ितों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 8882002222 भी जारी किया है।
#PreetSirohi
#SCSTAct
#LegalHelp
मेरे गांव में कल एक SCST जाति से है उनके बच्चे की बहुत तबियत ख़राब हो गयी लेकिंग गांव में किसी ने उनके मदद नहीं की ना तो पैसे से न तो गाड़ी दे
आरक्षण UGC SCST एक्ट का असर अब जान लेने तक आ गया है , लोग सम्पूर्ण बहिष्कार कर रहे हैं
BIG
Three days after I exclusively reported on @RashtraJyoti about large scale land grab directly linked to Delhi Jama Masjid Shahi Imam Syed Ahmed Bukhari, based on meticulous research and PIL by @BhaiPreetSingh, a demolition drive is going on right now against some of those encroachments!
Sharing the details shortly
This was the report https://t.co/yr8fQY21uT
दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर दीप्ति तनेजा को सुनिए। उन्होंने मनुस्मृति के खिलाफ चलाए जा रहे प्रोपेगेंडा की पोल खोलते हुए कुरान और बाइबिल में लिखी समान बातों का भी ज़िक्र किया।
बस फिर क्या था कांग्रेस और समाजवादी प्रवक्ताओं के मुँह पर ऐसा ताला लगा कि कोई जवाब ही नहीं सूझा! 🤐😂
जब पूना पैक्ट को अंबेडकर ने 1956 में अलग अंबेडकरी बौद्ध धर्म बना कर तोड़ दिया और 22 प्रतिज्ञा करके हिंदू धर्म का बहिष्कार किया फिर ये आरक्षण क्यों ?? क्या कार्यपालिका , विधायिका और न्यायपालिका को इस पर विचार नहीं करना चाहिए ??
हमारी तीन मांगे जो अभी हैं :-
1- एससी एसटी एक्ट तत्काल समाप्त होना चाहिए ।
2- आरक्षण में सुधार हो ।
3- यूजीसी तत्काल वापस हो ।