1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीने में (अर्थात विधानसभा आमचुनाव तक) एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा हालाँकि विलम्ब से उठाया गया सही किन्तु चुनावी क़दम ज़्यादा लगता है, फिर भी वे नियुक्तियाँ पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि के अभिशाप से मुक्त समय से पूरा हो जायें तो यह सही होगा ताकि यह चुनावी छलावा ना साबित हों, जबकि इसके साथ ही एससी, एसटी व ओबीसी समाज के आरक्षित पदों के बैकलाग पर भर्तियों के बारे में भी सरकारी घोषणा की लोगों को उत्सुकता से प्रतीक्षा है।
2. इतना ही नहीं बल्कि यहाँ 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर इन वर्गों के 6,800 अभ्यार्थी अपनी नियुक्ति के लिये भूखे-प्यासे लगातार आन्दोलनरत हैं, उनके बारे में भी सरकार को पूरी सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर सोचना चाहिये, क्योंकि उन्हें वास्तविक राहत सरकार ही दे सकती है।
3. इसके साथ ही, बी.एस.पी. यूपी सहित पूरे देश भर में स्कूली शिक्षा की बदहाल व्यवस्था को समुचित तौर पर बेहतर बनाने की माँग लगातार करती रहती है, किन्तु संभवतः ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ के दबाव में जो थोड़ी अनचाही हलचल सरकारी स्तर पर देखने को मिल रही है वह मामूली ही सही परन्तु स्कूली शिक्षा में सुधार करने की सही नीयत से हो तो यह उचित होगा और इस क्रम में यहाँ लगभग 30 हज़ार जो सरकारी स्कूल बंद कर दिये गये हैं उन्हें दोबारा अच्छे तरीके से सक्रिय करने की व्यवस्था सरकार अविलम्ब करे तो यह भी जनहित में होगा।
4. इसके अलावा, बुजुर्ग महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा आदि की व्यवस्था से कहीं अधिक महिलाओं को हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार, उत्पीड़न आदि से बचाने के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व आत्मनिर्भरता के बारे में भी सरकारों को सही नीयत व नीति से कार्य करने की ज़रूरत है।
भारत सरकार से सामाजिक न्याय के महान योद्धा और बहुजन चेतना के मार्गदर्शक मान्यवर कांशीराम जी को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग करता हूं।
यह सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान कांशीराम जी के साथ उस पूरे आंदोलन को श्रद्धांजलि होगी जिसने करोड़ों बहुजनों को हक़, हिस्सेदारी और आत्मसम्मान की राह दिखाई।
इस मांग को लेकर @PMOIndia को मेरा पत्र।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को, आज उनकी जयंती पर मेरे व मेरे नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश भर में उनके अनुयायियों द्वारा शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित, जिन्होंने परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की ‘सोच एवं मूवमेन्ट’ को पूरे देश में ज़िन्दा करके व उनके कारवाँ को आगे बढ़ाकर सत्ता की मंज़िल तक पहुँचाने के मिशन हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करके लगातार कड़ा संघर्ष किया तथा जाति के आधार पर तोड़े और पछाड़े गये लोगों को ’बहुजन समाज’ की एकता में जोड़ने के उस ऐतिहासिक योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुये, बी.एस.पी. के ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ मूवमेन्ट को तन, मन, धन से मज़बूत बनाने व पूरी ज़िद के साथ चुनावी सफलता अर्जित करने के संकल्प को दोहराया, जिसके लिए मैं पार्टी प्रमुख के रूप में, सभी लोगों का तहेदिल से आभार, धन्यवाद व शुक्रिया अदा करती हूँ।
साथ ही, यह आह्वान भी है कि ’बहुजन समाज’ के लोग ’बी.एस.पी. मूवमेन्ट से जुड़कर मिशनरी व ईमानदार अम्बेडकरवादी बने’ और अपने वोटों की शक्ति से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करें ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा संविधान में देश के बहुजनों के हित, कल्याण, उत्थान तथा उनकी सुरक्षा व आत्म-सम्मान हेतु प्रदत्त अधिकारों को ज़मीन पर लागू करके वे भी, गुलामी और लाचारी के त्रस्त जीवन से मुक्ति पाकर, रोटी-रोज़ी-युक्त अच्छे दिन वाला ख़ुश एवं ख़ुशहाल जीवन व्यतीत कर सकें, जो कि मान्यवर श्री कांशीराम जी का मिशन व उनका जीवन संदेश भी है। धन्यवाद।
कल उत्तर प्रदेश के जिला भदोही के ज्ञानपुर क्षेत्र के पिपरगांव में दलित चौकीदार जैसलाल सरोज जी को केरोसिन डालकर जिंदा जलाने की अमानवीय और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना पूरे समाज को झकझोर देने वाली है। यह घटना न केवल क्रूरता की पराकाष्ठा है, बल्कि हमारे समाज और कानून व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।
80 प्रतिशत झुलसे जैसलाल सरोज जी की आज सुबह उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।
हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हैं। प्रकृति से प्रार्थना है कि शोकसंतप्त परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि इस मामले के सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाया जाए। साथ ही परिवार को सुरक्षा और उचित मुआवजा भी दिया जाए।
@CMOfficeUP@myogiadityanath
बी.एस.पी. के विधायक श्री उमाशंकर सिंह जबसे बी.एस.पी. में आये हैं उन्होंने पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अपनी ज़िम्मेवारी निभाई है और आजतक इनके क्षेत्र से इनके बारे में किसी भी प्रकार की अवैध तरीके़ से सम्पत्ति अर्जित करने या अन्य कोई भी ग़लत कार्य करने की शिकायत नहीं आई है।
हालाँकि पिछले लगभग दो वर्षों से वे काफी गंभीर बीमारी से जूझ रहें हैं, ऐसी स्थिति में आयकर विभाग को अगर इनके सम्बन्ध में कोई शिकायत मिली थी तो वे इनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर इनके ठीक हो जाने के उपरान्त इनसे पूछताछ कर सकते थे। हम कोई इस विभाग के कार्य में दख़ल नहीं दे रहें, लेकिन आज जिस तरह से इन पर अति-गंभीर बीमारी के दौरान कार्रवाई की गयी है वह अति-दुर्भाग्यपूर्ण है और मानवता के ख़िलाफ है।
यूपी में मेरठ के सरधना थाना अन्तर्गत दलित माँ की हुई हत्या तथा बेटी के अपहरण की ताज़ा घटना अति-दुखद, शर्मनाक एवं चिन्तनीय। महिलाओं की इज़्ज़त-आबरू से खिलवाड़ और फिर हत्या आदि की घटनाओं को सरकार पूरी गंभीरता से लेकर दोषियों के खिलाफ तत्काल सख़्त कार्रवाई करे ताकि आपराधिक तत्वों को ऐसे घृणित कार्यों से आगे रोका जा सके। सरकार ख़ासकर महिला सुरक्षा के मामले में समुचित ध्यान दे।
यूपी में मेरठ के सरधना थाना अन्तर्गत दलित माँ की हुई हत्या तथा बेटी के अपहरण की ताज़ा घटना अति-दुखद, शर्मनाक एवं चिन्तनीय। महिलाओं की इज़्ज़त-आबरू से खिलवाड़ और फिर हत्या आदि की घटनाओं को सरकार पूरी गंभीरता से लेकर दोषियों के खिलाफ तत्काल सख़्त कार्रवाई करे ताकि आपराधिक तत्वों को ऐसे घृणित कार्यों से आगे रोका जा सके। सरकार ख़ासकर महिला सुरक्षा के मामले में समुचित ध्यान दे।
बी.एस.पी. की बिहार प्रदेश यूनिट सहित देश के कई राज्यों की कल नई दिल्ली स्थित पार्टी केन्द्रीय कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में बिहार स्टेट बी.एस.पी. के वरिष्ठ पदाधिकारियांे तथा वहाँ से पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक श्री सतीश यादव भी मौजूद रहे।
समीक्षा में, अन्य बातों के अलावा, यह बात भी सामने आई कि मतगणना वाले दिन दिनांक 14 नवम्बर को विरोधी दलों के असामाजिक तत्वों द्वारा कराये गये उपद्रव में बी.एस.पी. के विधायक की गाड़ी तथा प्रशासन की भी गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त की गई, जिसे काबू में करने हेतु पुलिस द्वारा रात में लाठीचार्ज किया गया जिसमें बी.एस.पी. के कई कार्यकर्ता भी गम्भीर रूप से घायल हुये।
इसको लेकर ज़िले की पुलिस द्वारा शासन के दबाव में बी.एस.पी. के लगभग 250 कार्यकर्ताओं पर एवं अन्य 1000 अज्ञात लोगों पर कई एफ.आई.आर. दर्ज करके उसकी आड़ में पुलिस सिर्फ बी.एस.पी. कार्यकर्ताओं को ही परेशान कर रही है, जबकि पहले इस घटना की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिये और उसके बाद ही कोई कार्रवाई होनी चाहिये।
अतः बी.एस.पी. की माँग है कि इस मामले की सही व निष्पक्ष जाँच हो तथा जब तक यह जाँच पूरी ना हो जाये, तब तक इस पर कोई पुलिस कार्रवाई व गिरफ्तारी आदि ना की जाए तो यही उचित होगा।
आज देश ‘‘संविधान दिवस‘‘ मना रहा है और इस खास मौके पर भारतीय संविधान के मूल निर्माता व बहुजन समाज के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी को मैं पूरे तहेदिल से शत्-शत् नमन करती हूँ और साथ ही ये भी उम्मीद् करती हूँ कि केन्द्र व राज्य सरकारें “संविधान दिवस” मनाने के साथ-साथ संविधान के समतामूलक, मानवतावादी व कल्याणकारी उद्देश्यों पर ईमानदारी एंव निष्ठा से अमल करके जनता की अपेक्षाओं को जरूर पूरा करेंगी, यही समय की मांग है। जय भीम, जय भारत व जय संविधान
दुख की इस घड़ी में हम सब परिवार के साथ हैं और जब तक न्याय नहीं मिल जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
आप सभी से अपील आज श्याम 8 बजे #JusticeForPuranKumarIPS के साथ ज्यादा से ज्यादा post share करे ताकि आवाज मजबूती से पहुंच सके।
हरियाणा राज्य में आईजी रैंक के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वाई. पूरन कुमार, जिनकी पत्नी भी स्वंय हरियाणा की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, द्वारा जातिवादी शोषण व प्रताड़ना के कारण की गयी आत्महत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। ख़ासकर दलित व बहुजन समाज के लोग काफी उद्वेलित हैं।
यह अति-दुखद व अति-गंभीर घटना ख़ासकर एक सभ्य सरकार के लिये शर्मनाक है और यह साबित करती है कि लाख दावों के बावजूद जातिवाद का दंश कितना अधिक ख़ासकर शासन-प्रशासन में हावी है और सरकारें इसको रोक पाने में विफल साबित हो रही हैं। वैसे यह सब सरकार की नीयत व नीति की बात ज्यादा है।
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की समयबद्ध स्वतंत्र व निष्पक्ष जाँच होना चाहिये और इसके लिये दोषियों को सख़्त सज़ा मिलनी चाहिये ताकि सभ्य समाज को शर्मिन्दा करने वाली ऐसी दर्दनाक घटनायें दोबारा कहीं ना होने पायें।
हरियाणा सरकार इस घटना को पूरी संवेदनशीलता एवं गंभीरता से ले तथा इसकी भी लीपापोती करने का प्रयास ना करे तो यह उचित होगा। जाँच के नाम पर खानापूर्ति भी नहीं होनी चाहिये, जैसा कि आरोप लगने शुरू हो गये हैं। माननीय सुप्रीम कोर्ट व केन्द्र सरकार भी इस घटना का उचित संज्ञान ले तो यह बेहतर।
ऐसी घटनाओं से ख़ासकर उन लोगों को ज़रूर सीख लेनी चाहिये जो एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण को आर्थिक स्थिति से जोड़ कर क्रीमी लेयर की बात करते हैं, क्योंकि धन व पद पा लेने के बाद भी जातिवाद उनका पीछा नहीं छोड़ता है और हर स्तर पर जातिवादी शोषण, अत्याचार व उत्पीड़न लगातार जारी रहता है, जिसकी ताज़ा मिसाल हरियाणा की वर्तमान घटना है।
हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पुरन कुमार जी के असामयिक निधन की खबर अत्यंत दुखद और चिंताजनक है।
सबसे गंभीर और पीड़ादायक यह है कि उनके निधन के बाद शव को ज़बरदस्ती पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया, जबकि उनकी पत्नी अमनीत, जो हरियाणा कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, की सहमति के बिना यह कार्रवाई करने की कोशिश की गई।
यह बेहद अमानवीय, असंवेदनशील और कई सवाल खड़े करने वाली घटना है, जिसे किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त करने लायक नहीं माना जा सकता।
वाई. पुरन कुमार जी एक ऐसे अधिकारी थे जिन्होंने हमेशा प्रशासन में पारदर्शिता, वरिष्ठता के अधिकार और अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर साहसपूर्वक आवाज़ उठाई। उन्होंने बार-बार भेदभाव और प्रशासनिक अनियमितताओं के विरुद्ध अपनी बात रखी। विशेष रूप से, उन्होंने नए पद सृजित कर उन्हें अपमानित करने और भेदभावपूर्ण तैनाती देने — जैसे कि IGP (होम गार्ड्स) पद पर नियुक्ति — को सार्वजनिक रूप से उजागर किया था।
उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल व्यक्तिगत अधिकारों तक सीमित नहीं थे, बल्कि पूरे सिस्टम में न्यायसंगत और पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थे।
मैं @cmohry से पुनः यह माँग करता हूँ कि इस पूरे मामले की त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी सीबीआई जाँच कराई जाए तथा दोषियों को सख़्त से सख़्त दंड दिया जाए।
मैं अपनी गहरी संवेदनाएँ वाई. पुरन कुमार जी के परिवार और सहयोगियों के प्रति व्यक्त करता हूँ और आज मैं चंडीगढ़ में अपने पीड़ित परिवार से मिलकर उनकी न्याय की माँग को और मजबूत करूँगा।
@NayabSainiBJP
हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पुरन कुमार जी के असामयिक निधन की खबर अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। वे एक ऐसे अधिकारी थे जिन्होंने हमेशा प्रशासन में पारदर्शिता, वरिष्ठता के अधिकार और अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर साहसपूर्वक आवाज उठाई।
कुमार साहब ने कई बार भेदभाव और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ अपनी बात रखी। विशेष रूप से उन्होंने नए पद सृजित कर उन्हें अपमानित करना और भेदभावपूर्ण तरीके से तैनाती करना—जैसे कि IGP (होम गार्ड्स) पद पर नियुक्ति—को सार्वजनिक रूप से उजागर किया। उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल व्यक्तिगत अधिकारों तक सीमित नहीं थे, बल्कि पूरे सिस्टम में न्यायसंगत और पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए महत्वपूर्ण थे।
यह दुखद है कि ऐसे संवेदनशील और साहसी अधिकारी का जीवन इस प्रकार समाप्त हुआ। हम @cmohry से मांग करते हैं कि इस मामले की त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी सीबीआई जांच सुनिश्चित की जाए और दोषियों को सख्त से सख्त दंड मिले।
हम अपनी संवेदनाएँ परिवार और सहयोगियों के लिए व्यक्त करते है।
@NayabSainiBJP
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21A, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा पाने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इसी अधिकार को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने RTE Act, 2009 बनाया, जिसमें साफ़ कहा गया है कि 1 किलोमीटर के दायरे में स्कूल की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि बच्चों को शिक्षा पाने के अधिकार का व्यवहारिक लाभ मिल सके।
संविधान के अनुच्छेद 46 के अंतर्गत नीति-निर्देशक तत्वों (DPSP) का भी उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि “राज्य का यह प्रयास रहेगा कि वह शैक्षिक और आर्थिक हितों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों की विशेष सुरक्षा और प्रोत्साहन करेगा, और सामाजिक अन्याय व शोषण के रूपों से उनकी रक्षा करेगा।”
साथ ही, शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है। यानी केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 254 के अनुसार यदि राज्य की कोई नीति या कानून केंद्र के कानून से टकराता है तो केंद्र का कानून सर्वोपरि होता है। अतः राज्यों के लिए RTE Act, 2009 के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है।
विद्यालयों का विलय कर स्कूलों को 1 किमी या उससे अधिक दूर ले जाना संविधान और RTE के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। क्या यह निर्णय कमजोर वर्गों, दलितों, आदिवासियों और गरीब बच्चों की शिक्षा के अधिकार को बाधित नहीं करता?
अतः यह स्पष्ट है कि स्कूलों के विलय का निर्णय
1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A द्वारा सुनिश्चित मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार,
2. RTE Act, 2009 के निकटता के सिद्धांत,
3. अनुच्छेद 46 में वर्णित सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के शैक्षिक हितों के संरक्षण,
4. समवर्ती सूची में केंद्र के कानूनों की सर्वोपरिता के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन करता है।
हम @UPGovt से माँग करते हैं:
1. इस मर्जर नीति को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
2. हर गाँव में संविधान व RTE Act के अनुसार स्थानीय स्कूल की गारंटी दी जाए।
3.शिक्षा में निजीकरण और केंद्रीकरण के बजाय जन-भागीदारी और विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया जाए।
"शिक्षा कोई spreadsheet नहीं, यह जीवन का पहला अधिकार है।जिसे मर्ज नहीं किया जा सकता — और न संविधान को मूक दर्शक बनाया जा सकता है।"
#SaveVillageSchools
कोल्हापुर, महाराष्ट्र रियासत में दलितों को नौकरी में आरक्षण देने का क्रान्तिकारी क़दम उठाकर भारत में आरक्षण के जनक के रूप में अमर हो जाने वाले राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज को आज उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा उनके समस्त अनुयाइयों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
ऐसे समय में जबकि जाति के आधार पर सदियों से तोड़े व पछाड़े गए देश के ख़ासकर दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण के उनके संवैधानिक अधिकार को निष्क्रिय व निष्प्रभावी बनाकर, उनकी अपनी बी.एस.पी. की सरकार व बहुजनों के शासक वर्ग बनने के अभाव में, उन्हें फिर से लाचार, मजबूर व गुलाम बनाने का षडयंत्र जारी है, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज के मानवीय गुणों, न्याययुक्त सरकार व अन्यायमुक्त समाज की स्थापना में उनकी ऐतिहासिक भूमिका व उनकी स्मृतियों को सजोने व स्मरण करने का महत्व व्यापक जन व देशहित में और भी अधिक बढ़ जाता है।
विशेषकर दलित व पिछड़े वर्गों में समय-समय पर जन्मे ऐसे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज के आदर-सम्मान में तथा उनकी प्रेरणादायी स्मृति को स्थाई बनाने के लिए यूपी में बी.एस.पी. की अब तक चार बार रही मेरी सरकारों में ऐतिहासिक महत्व के अनेकों कार्य किए गए हैं, जिसमें से प्रमुख हैं उनके नाम पर नया ज़िला, शिक्षण संस्थाओं आदि का नामकरण व भव्य स्थलों/स्मारकों आदि में उनकी प्रतिमा की स्थापना, किन्तु विशेष उल्लेखनीय है राजधानी लखनऊ में यूपी का पहला छत्रपति शाहूजी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी स्थापित करके उसे तुरन्त चालू करना, जिसको दलित व पिछड़े वर्ग के बहुजनों व उनके आरक्षण के हमेशा विरोधी रही समाजवादी पार्टी की सरकार द्वारा उसका नाम ज़बरदस्ती बदलकर किंग जार्ज मेकिडल यूनिवर्सिटी कर दिया गया है हालाँकि उसी नाम से लखनऊ में मेडिकल कालेज काफी पहले से ही स्थापित है।
दुखद है कि यूपी में सपा के बाद आयी भाजपा सरकार ने भी, इतना लम्बा समय बीत जाने के बावजूद, अभी तक भी सपा के ऐसे घोर द्वेषपूर्ण एवं जातिवादी रवैये को, व्यापक जनहित में ज़रूरी बदलाव/सुधार नहीं किया है। अतः छत्रपति शाहूजी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी का असली नाम जितनी जल्द बहाल हो उतना बेहतर।
1. यूपी में अभी हाल ही में हुई सिपाही भर्ती को लेकर ऐसा प्रचारित किया गया जैसे यह कोई नई बात हो, जबकि पुलिस में ऐसी भर्ती रूटीन कार्य है, ताकि बैकलाग की बुराई पुलिस विभाग में भी न आए। किन्तु इस भर्ती में सर्वसमाज को सही हक मिला या नहीं व उनकी ट्रेनिंग का क्या? यही आम चिन्ता।
1. संविधान निर्माता भारतरत्न बोधिसत्व परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को आज उनकी जयंती पर अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी के तत्वावधान में पूरे देश भर में उन्हें शत्-शत् नमन्, माल्यार्पण व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित, जिसके लिए सभी लोगों का तहेदिल से आभार व धन्यवाद प्रकट।
डॉ बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ਡਾਕਟਰ ਬਾਬਾ ਸਾਹਿਬ ਅੰਬੇਡਕਰ ਦਾ ਅਪਮਾਨ ਕਿਸੇ ਵੀ ਹਾਲਤ ਵਿੱਚ ਬਰਦਾਸ਼ਤ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ।
Date - 2 April 2025
Time - 12 pm
📍Phillaur, Punjab
#jaibhim🙏 #punjab#phillaur
पंजाब के फिल्लौर में संविधान निर्माता,भारत रत्न परम पूज्य बाबा साहेब डॉo भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा का अपमान और पन्नू द्वारा 14 अप्रैल को पूरे पंजाब में बाबा साहेब की मूर्तियाँ तोड़ने की धमकी बहुजन समाज पर सीधा हमला है!
मैं प्रधानमंत्री @narendramodi जी और पंजाब के मुख्यमंत्री @BhagwantMann जी से पूछना चाहता हूँ कि:-
पंजाब सरकार क्यों खामोश है? क्या भगवंत मान सरकार इनके आगे नतमस्तक हो चुकी है?
केंद्र सरकार, जो रोज़ राष्ट्रवाद की बातें करती है, इनको खुली छूट क्यों दे रही है?
जब किसी और विचारधारा की मूर्तियों को नुकसान पहुँचाने की बात होती है तो तुरंत एक्शन लिया जाता है, लेकिन बाबा साहेब के मामले पर सरकारें मौन क्यों हो जाती हैं?
मैं @mygovindia और @PbGovtIndia से माँग करता हूँ :
1. फिल्लौर की घटना के दोषियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए।
2. धमकी देने वालों के खिलाफ केंद्र सरकार तुरंत कार्रवाई करें।
3. पूरे पंजाब में बाबा साहेब की प्रतिमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
अगर 14 अप्रैल को पंजाब में बाबा साहेब जी की किसी भी प्रतिमा को नुकसान पहुँचता है, तो बहुजन समाज सड़कों पर उतरकर आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर होगा!
बाबा साहेब का अपमान देश का अपमान है! इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा!
जय भीम, जय भारत।