कर्जन वायली की हत्या के आरोप में जब उन पर 22 जुलाई, 1909 का अभियोग चलाया गया । तो मदन लाल ढींगरा जी ने अदालत में खुले शब्दों में कहा कि "मुझे गर्व है कि मैं अपना जीवन समर्पित कर रहा हूं।"
दुनिया में कोई वस्तु कितनी ही मूल्यवान क्यों न हो,परन्तु ईश्वर ने हमें जो शांति,आनंद,निद्रा, आह्लाद, आत्मिक बल प्रदान किया है उससे मूल्यवान कुछ नहीं है।
मूछों पर ताव, कमर में पिस्टल,
कांधे पर जनेऊ, आर्य मिस्टर।
वो(आर्य) याद थे, वो याद हैं, वो याद रहेंगे...
हम(आर्य) आज़ाद थे, आज़ाद हैं, आज़ाद रहेंगे..
-स्वतंत्रता के अमर सेनानायक चंद्रशेखर आजाद।
#Jayanti_ChandrashekharAzad