Are we returning to cash economy , once again ? It is sure all small business now move to cash only transactions and customer will also prefere due to fee need to be paid by them .
#upi
VIDEO | Raipur: Yoga Guru Baba Ramdev says, "The nation's youth is in danger. That is why the biggest issue in the country right now is. Some people are using children in protests. When will the child study? Small children should not be pushed into protests, not just here, but all over the world.
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/26xvxD4GVj)
लीजिए , घोर समर्थकों मे अब पाला बदलने की तैयारी शुरू हो गईं लगती है । कही सही ही लिखा है , डूबते हुए जहाज पर से सबसे पहले उसके नाविक ही कूदने की तैयारी करते हैं।
बाबा रामदेव ने कहा –
> देश में चारों तरफ हंगामा है
> बच्चे कह रहे कि हमारे यहां टीचर नहीं है
> लाइट नहीं है, पानी नहीं है, शौचालय नहीं है
> कहीं नकल हो जाती है, कहीं पेपर लीक
> सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 99% घोटाला होता है
> सुधर जाओ, नहीं तो आंदोलन और ज्यादा हो सकते हैं।
> देश में घपला भी बहुत है।
Maybe this is a first for Chandigarh.
Deaf & mute school students came out to protest for basic facilities and better education.
They cannot speak. They cannot raise slogans. So they tried to shout, make noise and make themselves heard, hoping that their voices would somehow reach the government.
Feel these voices.
Just try to feel what they are saying. Your eyes will fill with tears.
Their demands:
1. Professional faculty and better teaching facilities
2. Maths & Science classes from Classes IX to XII
3. Mandatory Indian Sign Language training for teachers
4. Better quality of mid-day meals
5. Pick-and-drop bus facility
6. A charging facility on campus so the existing electric bus can be used regularly
अब भारतीय बच्चों ने सोशल मीडिया का सही प्रयोग करना सीखा है । सिस्टम को जिम्मेदार बनाना । उमीद है यह अब रुकेगा नहीं। परन्तु सिस्टम काफी ताकतवर होता है , उसको बदलने के लिए सिस्टम के अंदर मौजूद लोगों की भी सहभागिता चाहिए होती है जो अभी तक नज़र नहीं आए । #बदलवाएगा
क्या इस सब सुविधाएं यह अधिकारी अपने स्वयं के पैसे से करवा रहा है ? क्या यह इनका दायित्त्व नहीं है। नौकरिबसे वेतन भी जनता के पैसे से ही दिया जाता और धमकीबभी जनता को ही दी जा रही है। शर्मनाक @pushkardhami@NavbharatTimes
देहरादून के स्कूल में दृष्टिबाधित छात्रों का आंदोलन एक हफ्ते बाद भी जारी है। इसी बीच छात्रों को अधिकारी द्वारा चेतावनी देने के बाद मामला गंभीर हो गया है।
#Dehradun#ViralVdeo#Uttarakhand
साम दाम दंड भेद की नीति इस समय भारत में चारों तरफ दिखाई दे रही है । Z के बाद अल्फ़ा का बोलना और खुलकर बोलना , न केवल सरकार के लिए परन्तु उनके पेरेंट्स के लिए भी आँखों को खोलना वाला है ।
समय के साथ चलना ही नियति है जिसने भी समय को ललकारने किंकोशिश की है , समय ने समय से उसे ठिकाने लगा दिया है। समय सर्वोच्च है । काल की गति ठहरे नहीं ठहरती ।
भाई क्या होगा इस देश का । विश्वास , अंधविश्वास और वैज्ञानिक सोच , बहुत पीछे होते जा रहे है । विश्व आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बात कर रहा है और हम मेंटल सिकनेस पर जा रहे है। कोई कुछ करता क्यों नहीं ।
राज करने के लिए और टिके रहने के लिए साम,दाम , दंड , भेद आदि सभी प्रकार के हथकंडे अपनाने पड़ते हैं ।जब आस पास ऐसा लगने लगे कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इन्हीं सब उपायों का सहारा लेते दिखने लगे तो समझना चाहिए लोकतंत्र एक स्वस्थ लोकतंत्र की तरफ बढ़ रहा है । जवाबदेही चाहिए
शशि थरूर से इस बात से हम सहमत हैं । लोकसभा की सीट बढ़ाने से संसद के काम करने की एफिशिएंसी का कोई लेना देना नहीं है । संख्या की बजाये ज्यादा लोगों का प्रतिनिधित्व का तर्क ज्यादा कन्विंसिंग है।
शशि थरूर से बहुत लोग असहमत रहते हैं, मैं भी उनमें से हूँ, मगर हाल में उन्होंने अपने लेख में एक अच्छी बात कही है, जिस पर सभी को ग़ौर करना चाहिए। ये लेख लोकसभा की सीटें बढ़ाने को लेकर है। ये तो आप जानते ही हैं कि लोकसभा की सीटें फिलहाल 543 हैं जो कि 1972 से जमी हुई है 1971 की जनगणना के आधार पर है।
सरकार का तर्क है कि भारत की आबादी दोगुनी से ज्यादा हो गई है अब जनसंख्या के अनुपात में सीटें बढ़ानी चाहिए। लेकिन थरूर कहते हैं कि यह सिर्फ गणितीय तर्क है, इसके पीछे बड़ा संस्थागत खतरा छिपा है।
थरूर के मुख्य तर्क हैं-
दुनिया में कोई परिपक्व लोकतंत्र इतनी बड़ी विधायिका नहीं रखता-
थरूर लिखते हैं कि हर विकसित लोकतंत्र में संसद का आकार इतना ही रखा जाता है कि असली बहस, जांच और व्यक्तिगत भागीदारी संभव हो। 850 सीटों वाली लोकसभा दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक सदन से बड़ी होगी। इससे सदन “विचार-विमर्श का मंच” नहीं रहकर “अराजक कोलोसियम” बन जाएगा, जहां चुनिंदा लोग ही बोल पाएंगे और बाकी सिर्फ वोटिंग मशीन पर संख्या बनकर रह जाएंगे।
अमेरिका का उदाहरण-
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स 1929 से 435 सीटों पर स्थिर है। तब अमेरिका की आबादी 12 करोड़ थी, आज 33.5 करोड़ से ज्यादा है। फिर भी सीटें नहीं बढ़ाई गईं, क्योंकि इससे विधायी प्रक्रिया ठप हो जाती। हर सांसद ज्यादा लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन मजबूत स्टाफ, कम्युनिकेशन और कमिटी सिस्टम से काम चलता है। भारत के सांसद भी ऐसा कर सकते हैं।
अगर संख्या बढ़ी तो व्यक्तिगत सांसद की भूमिका खत्म हो जाएगी-
एक सामान्य सत्र में समय बहुत सीमित होता है।
चार घंटे की बहस में पार्टी की ताकत के हिसाब से अधिकतम 15-20 सांसद ही बोल पाएंगे।
बैक बेंचर और छोटी पार्टियों के सांसद लगभग चुप रह जाएंगे।
ज्यादातर सांसद पूरे पांच साल में एक भी सवाल नहीं पूछ पाएंगे, प्राइवेट मेंबर बिल नहीं ला पाएंगे या गंभीर बहस में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। वे सिर्फ पार्टी के हुक्म पर हाथ उठाने वाले “खामोश प्लेस होल्डर” बन जाएंगे।
संसद की भूमिका और कमजोर होगी-
हाल के वर्षों में संसद के बैठने के दिन घट रहे हैं, बिल बिना स्टैंडिंग कमिटी की जांच के वॉयस वोट से पास हो रहे हैं और विपक्ष को किनारे किया जा रहा है। सैकड़ों अतिरिक्त सदस्यों से यह स्थिति और बिगड़ेगी। बड़ा सदन सरकार के लिए सुविधाजनक होता है, क्योंकि उसमें असली जांच-पड़ताल मुश्किल हो जाती है। संसद “रबडर-स्टैंप” या “नोटिस-बोर्ड” बन जाती है।
सत्तावादी मॉडल से समानता-
थरूर चेतावनी देते हैं कि 850 सीटों वाली लोकसभा चीन की पोलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस या उत्तर कोरिया की सुप्रीम पीपुल्स असेंबली जैसी बन सकती है—बहुत बड़ी, भव्य दिखने वाली, लेकिन असली बहस या चुनौती देने में असमर्थ। ये सिर्फ “सहमति का नाटक” करती हैं।
बेहतर विकल्प-
सांसद का काम राष्ट्रीय कानून, विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और केंद्र सरकार की जवाबदेही है। वे स्थानीय काउंसलर या विधायक नहीं हैं।
स्थानीय मुद्दे (सड़क, पानी, कचरा आदि) राज्य विधानसभाओं और पंचायत/नगरपालिकाओं के हैं (73वें और 74वें संविधान संशोधन के तहत)।
जनसंख्या बढ़ने पर विधायकों (MLAs) की संख्या बढ़ाएं, लोकसभा को कॉम्पैक्ट और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित रखें।
300 अतिरिक्त सांसदों पर खर्च (वेतन, आवास, यात्रा, पेंशन) बचाने के बजाय मौजूदा सांसदों के लिए उचित ऑफिस बिल्डिंग बनाएं।
कुल मिलाकर थरूर का कहना है कि असली प्रतिनिधित्व बहस की गुणवत्ता, विधायी कमेटियों की गंभीर जांच और स्थानीय सरकारों को सशक्त बनाने में है—न कि एक विशाल, अव्यवहारिक सदन बनाकर लोकतंत्र को “खाली नाटक” में बदलने में। 850 सीटों वाली लोकसभा सरकार के लिए इको चैंबर बन जाएगी, न कि शासन का मंच।
हिंदी समाचार पत्रों का कवरेज । सत्ता पक्ष के सात चेहरे और विपक्ष के तीन । लिखित कवरेज भी सत्ता पक्ष के साथ । कितनी नाइंसाफी करोगे भाई। एक न्यूट्रल एनालिसिस तो पढ़ने के लिए पाठकों को। यह तो दिल्ली का नवभारत हैं ,बाकी का तो भगवान और इनके भगवान ही जाने।#सत्ताकेसाथअखबार
Devastated to see this video. Parents of 34 year of Sarthak Mattoo who was killed by a speeding Thar while he was driving his bike in Delhi’s Vasant Kunj. Hope justice prevails. On His Way To Work, Gurugram Rider Dies As Thar Rams Him In Delhi https://t.co/mSiFVOwIQU
होटल मालिक गिरफ़्तार हो गया..वो सारे अधिकारी/बाबू/नेता कब गिरफ़्तार होंगे जिनकी जेबें गर्म कर के,सारे नियम तोड़ के ये होटल चल रहा था? Arrest the corrupt OFFICIALS,Netas जिन तक "हिस्सा" पहुंचता था.. This is NOT a tragedy..Its a MURDER, but the hotel owner is not the ONLY culprit..Where are the MCD officials?The Hafta vasooli gang! जब तक ऐसे मामलों में इस देश के भ्रष्ट अधिकारी/बाबू/नेता गिरफ़्तार नहीं होंगे तब तक ये हत्याएं बंद नहीं होंगी 🙏 @CMODelhi@PMOIndia@HMOIndia #malviyanagar #corruption