दो चेहरा, दो क्रांतिकारी, दोनो बिहार के सिस्टम के खिलाफ लड़ने चले थे परिणाम मौत मिला
भरत तिवारी सिस्टम से लड़ने लगे। अपने गांव के विकास के लिए सरकार और व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठाई। इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। पुलिस ने उन्हें एनकाउंटर में मार गिराया।
बंटी यादव पटना के समाजसेवी थे। उनके दिल में भी क्रांति की आग ज़िंदा थी। पटना में धड़ल्ले से चल रहे सेक्स रैकेट का विरोध किया, उसका पर्दाफाश किया, कानून को आइना दिखाया और सरकार से सवाल पूछे।
सेक्स रैकेट चलाने वाले गुंडों ने उनका अपहरण किया, मार कर फेंक दिया पाँच दिन बाद उनका शव परिजनों को मिला। पुलिस उन्हें ज़िंदा नहीं बचा पाई। यहाँ तक कि आरोपियों को गिरफ्तार भी नहीं कर पाई।
सोचिये जो व्यक्ति समाज के लिए लड़ता है, उसका हtया होता है, 2-4 दिन हो होल्ला के बाद सब शांत हो जाता है, फिर कुछ दिन उस तरह की घटना की पुनरावृत्ति हो जाती है।।
आखरी हम कबतक यह सहन करते रहेंगे।।
आखरी हम कबतक मुर्दा बने रहेंगे??
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
छपरा के राजद कार्यकर्त्ता पंकज यादव का हत्या के 5 दिन से ज़्यादा हो गया, लेकिन RJD के झाड़ू नेता सब के मुंह से आवाज़ नहीं निकल रहा हैं,कितना भी यादव मर जाए
जिसका पति के हत्या हो गया , वो न्याय के लिए भटक रहीं हैं। मर गया हैं सब समाज के ठीकेदार सब क्या रे?
#छपरा#पंकज_यादव
देश के इन हालातों के लिए इस देश की मीडिया पूरी तरह जिम्मेदार है जिसने सत्ता की एक तरफा तरफदारी की और विपक्ष और देश के मुद्दों पर सवाल करने वालों को दुश्मन की तरह पेश किया।
आज YouTube मीडिया जर्नलिस्ट तक TV मीडिया को गलत कहते और रोस्ट करते दिख जाएंगे...
आज back to back paper leak हो रहे हैं, परीक्षाएँ cancel हो रही हैं, सरकार back foot पर है, असहाय महसूस कर रही है, मगर TV मीडिया और उनके so called बड़े anchors इस दर्द को अपना दर्द मानकर सरकार को बचाने के लिए बौखलाहट में कुछ भी बयान दे रहे हैं।नैतिकता भी कोई चीज़ होती है....
जैसा अंजना ने इस व्यवस्था में सबसे बड़ा दोषी YouTube Teachers को बता दिया और 2 कौड़ी तक का कह दिया.....यदि किसी व्यक्ति विशेष से असहमति थी तो उसका नाम लेकर आलोचना करती।
इसके लिए India Today @aroonpurie को और अंजना को सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफ़ी जारी करनी चाहिए, India Today के हर platform का boycott होना चाहिए और किसी भी शिक्षक को कभी वहाँ नहीं जाना चाहिए।
हमें 2 कौड़ी का कह देना उन छात्र समुदाय के दिल पर भी आघात है जो हमें गुरु मानते हैं...
अगर आज आप अपने घर में पढ़ रहे बच्चों से... सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बच्चों से पूछेंगे, तो हमारे योगदान को आपको बता पाएंगे...
पिछले 10 वर्षों से गणित पढ़ाने के साथ मैं बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रिया की खामियों, पेपर लीक और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ रहा हूँ।
चुनाव में हार जीत तो एक अलग मुद्दा है
लेकिन अगर जनता की फिक्र है तो ऐसा विरोध समय समय पर होना चाहिए।
सरकार को नींद से जगाना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान को हटाओ.......
जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने लाखों बंगालियों को मताधिकार से वंचित कर दिया,मगर हम खामोश रहे। आप चाहते तो ऐसा न होता।
जस्टिस सूर्यकांत देश के सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश होते हुए भी सत्ता पक्ष के लोगों से मिलते रहे, भाजपा के सीएम के मॉडल की तारीफ किए, मगर हम सब चुप रहे।
जस्टिस सूर्यकांत एनसीईआरटी की किताबों में न्यायपालिका में करप्शन और शिकायतों को लेकर न केवल चैप्टर हटवा दिया पूरे पैनल को बाहर कर दिया, मगर हम चुप रहे।
जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने यूजीसी 2026 के नए नियमों पर रोक लगा दी, जिसमें 'जाति आधारित भेदभाव' की परिभाषा में केवल SC/ST/OBC को रखा गया था। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या इसमें सामान्य वर्ग की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया है।
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाएगा।मगर हम चुप रहे।
कौन आपको आलोचना कर रहा है माई बाप? आप फूंक दें हम लोग उड़ जाएं, कीड़े मकोड़ों की इतनी ही हैसियत है। आप देख रहे हैं न, कोई नेता आपके विरुद्ध बोला? मनोज भाई @manojkjhadu जरूर बोले, लेकिन आप उनको पढ़े नहीं होंगे। बहुत इज्जत के साथ लिखा है उन्होंने, पढ़िए।
प्रेस विज्ञप्ति
भारत के बेरोज़गार युवा न तो “कॉकरोच” हैं और न “परजीवी”।
भारतीय युवा कांग्रेस बेरोज़गार युवाओं, RTI कार्यकर्ताओं, स्वतंत्र पत्रकारों और जवाबदेही की मांग उठाने वाली आवाज़ों को निशाना बनाते हुए दिए गए अपमानजनक बयानों की कड़े शब्दों में निंदा करती है।
संघर्ष कर रहे युवाओं को “कॉकरोच” और “परजीवी” कहना केवल असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि उस पूरी पीढ़ी का अपमान है जो बेरोज़गारी, पेपर लीक, आर्थिक असुरक्षा और सरकारी विफलताओं से जूझ रही है।
बेरोज़गारी आलस्य नहीं है। यह उस व्यवस्था की सीधी विफलता है जिसने नौकरियों और अवसरों के मामले में युवाओं को निराश किया है। सवाल पूछना, RTI लगाना, मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखना या जनहित के मुद्दे उठाना कोई अपराध नहीं, यह लोकतंत्र में भागीदारी है।
जो लोग अपनी विफलताओं का जवाब देने के बजाय निराश युवाओं का मज़ाक उड़ाते हैं, उन्होंने देश को उपदेश देने का नैतिक अधिकार खो दिया है।
भारत का युवा कोई बोझ नहीं है।
वे इस देश की आवाज़ हैं, और उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता। ✊🇮🇳
“अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा।”
लखीमपुर खीरी के 21 साल के ऋतिक मिश्रा के ये आख़िरी शब्द थे। तीसरी बार NEET देने वाला यह बच्चा, परीक्षा रद्द होते ही टूट गया।
गोवा में भी एक NEET अभ्यर्थी ने जान दे दी।
ये बच्चे परीक्षा से नहीं हारे, इन्हें एक भ्रष्ट तंत्र ने मारा है।
यह आत्महत्या नहीं - यह सिस्टम द्वारा हत्या है।
आंकड़े देखिए:
2015 से 2026 तक - 148 परीक्षा घोटाले।
87 परीक्षाएँ रद्द, 9 करोड़ बच्चों का भविष्य प्रभावित।
148 घोटालों में सज़ा हुई - सिर्फ़ 1 को।
CBI ने 17 मामले लिए, ED ने 11 - किसी को सज़ा नहीं।
NEET, AIPMT और अन्य मेडिकल परीक्षाओं में अकेले 15 घोटाले।
और सबसे शर्मनाक बात:
इन घोटालों में जिम्मेदार किसी अधिकारी या मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं हुआ। हटाए जाते हैं - फिर चुपके से बड़े पद पर बैठा दिए जाते हैं। चोरी कराने वालों को इनाम मिलता है, और परीक्षा देने वाले बच्चे जान गँवाते हैं।
मोदी जी - कितने ऋतिक चाहिए आपकी जवाबदेही जगाने के लिए?
मेरे युवा साथियों, आपका दर्द मेरा दर्द है। आपकी मेहनत मेरी मेहनत है। आपका भविष्य चुराने वालों को जवाब देना ही होगा। चाहे जितना वक्त लगे, किसी को बख्शा नहीं जाएगा - ये मेरा वादा है।
यह लड़ाई हम साथ लड़ेंगे - और जीतेंगे भी।
~भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ लिखो तो FIR झेलो,
~दलाल मीडिया के खिलाफ लिखो तो FIR झेलो,
~सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ लिखो तो FIR झेलो,
~FSSAI के सोने पर लिखो तो FIR झेलो।
"लोकतंत्र अब एक मजाक है"
अब लोकतंत्र का मतलब लोगों की आवाज को कुचलना हो गया है।
फिर भी हम आपकी आवाज रहेंगे।
@khurpenchh
गाइज,
~जितने भी बड़े हॉस्पिटल और बड़े प्राइवेट स्कूल हैं,
~वो सब किसी न किसी मंत्री, विधायक, नेताओं के हैं।
~इसलिए ये लड़ाई थोड़ी लंबी चलेगी, इसके लिए आवाज उठानी पड़ेगी।
आर यू रेडी?