दुनिया के हर देश में जनता को पेट्रोल चुनने का पूरा हक मिलता है, तो हमारे भारत में क्यों नहीं?
सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग करना चाहती है तो शौक से करे, लेकिन जनता पर ज़बरदस्ती क्यों?
पेट्रोल पंप पर E0, E10, E20 और E85 का विकल्प हर नागरिक को मिलना ही चाहिए!
जब देश में करोड़ों गाड़ियाँ अलग-अलग तकनीक की हैं, तो एक ही ईंधन सब पर कैसे थोप सकते हैं?
मिडिल क्लास इंसान अपनी खून-पसीने की कमाई से गाड़ी खरीदता है, वो रोज़ इंजन खराब होने का डर क्यों झेले?
बिना विकल्प दिए जनता को मजबूरी के रास्ते पर छोड़ देना सरासर तानाशाही और गलत है!
लोकतंत्र जनता को सहूलियत और अधिकार देने से चलता है, अपनी ज़िद पूरी करने से नहीं!
सीधी बात है—हमें विकल्प दो, मजबूरी मत बनाओ!
यही सच्चा लोकतंत्र है!
5 सितंबर 1974 को कुर्था में "जगदेव प्रसाद" और "लक्ष्मण चौधरी" को मनुवादी पुलिस वाले ने किस अपराध में गोली मारकर हत्या की थी....
तब सवर्ण नेताओं और तमाम संगठनों ने चुप्पी क्यों साध ली थी...?
@highcourtadvo चमचा अभी तुमने देखा कहां, यहां तो एक मुख्यमंत्री संजय गांधी को चप्पल उठा कर पहनाते थे।
ज्यादा मुंह मत खुलवाओ, तुम भी समझ गए होगे कि वो मुख्यमंत्री कौन था।
स्वास्थ्य के नाम पर कैसे आम आदमी की जेब कैसे लूटी जा रही, इसका पता कल चला मुझे.
गले में दर्द था और खाना खाने में दिक्कत आ रही थी, तो डॉक्टर के पास चला गया शाम को.
250 रूपये की पर्ची काटकर डॉक्टर से मिलवाया तो उसने एक इंजेक्शन और मेडिसिन लिखी
आप यकीन नहीं करोगे, उनकी कीमत उसके अपने मेडिकल से 220 रूपये की थी.
जबकि यही Same दवाइयां चार दुकान छोड़कर एक मेडिकल से 80 रूपये में मिल जा रही थीं.
पर डॉक्टर ने वहां से लेने को बोला था तो मैं आप सब इस लूट का शिकार हो रहे हैँ.
मेडिकल और डॉक्टर के कमीशन की कीमत हम क्यों चुकाएं??
मुझे तो चलो फर्क नहीं पड़ेगा, पर आम इंसान की जेब कटनी रोकनी पड़ेगी..
इसके लिए क्या कोशिश की जाये??
@nidhiambedkar इसका काम देखो। कोई आदमी पतला तो कोई मोटा होता है। किसी के मोटे पतले पर कमेंट नहीं करना चाहिए।
मोटा और पतला तब देखा जाता है जब उससे शादी करनी हो।
क्या इसी को दोगलापन कहा जाता है??
पेपर लीक होता है इनके खराब सिस्टम की वजह से।
ना कोई जिम्मेदारी लेता है ना कोई एक शब्द बोलता है ना किसी का इस्तीफा होता है।
कोई एयरपोर्ट पर वेट करके दिखावा करता है कि बच्चों का पेपर है 2 बजे के बाद निकलूंगा नहीं तो दिक्कत होगी।
कोई फोन करके नौटंकी करता है किसी बच्चे के अभिभावक के पास।
लेकिन 2,5 मिनट की देरी हो जाती है तो छात्रों को परीक्षा में बैठने नहीं देते।
पूरे साल भर की मेहनत बरबाद हो जाती है बच्चों की, वो रोने लगते हैं।
अगर यही बच्चे कोई गलत कदम उठा लेते हैं कुछ कर लेते हैं अपने साथ तो कौन जिम्मेदार होगा इसका??
#NEETReExam
यह तो बहुत ही अजीब मामला है लड़की की बात बिलकुल सही है।
एक लड़की का ट्रैन में RAC का टिकट हुआ और दूसरी सीट लड़के की थी।
एक लड़की पूरी रात लड़के के साथ कैसे गुजार सकती है..?
रेलवे वालो को सोचना चाहिए एक महिला की सेफ्टी सबसे जरुरी है।
@PMishra_Journo किसी भी अपराधी, नक्सली, आतंकवादी के मरने के बाद वह "भटका हुआ नौजवान, अभी बालक है, शांतिदूत इत्यादि से नवाजा जाता है। क्या उस देश का नाम बता सकते है।