@NaveenKumarP_ 30–35% can learn in 6–12 months. Survival forces people to adapt, and unlike the US, Indian trades aren't strictly licensed. Since many IT workers come from humble, non-tier-1 backgrounds, pivoting to gig work isn't as far-fetched as it seems.
I just witnessed a delivery partner get harassed by a building owner over a wrong turn. It was heartbreaking. These guys work so hard—please stop forcing them to deliver to doorsteps in hostile buildings. Let’s make "collect at gate" the norm for their safety. @Swiggy@zomato
Safety over convenience! ✋ Delivery partners shouldn't face abuse for navigation errors. @Swiggy@zomato@ZeptoNow@letsblinkit,@RahulGandhi
please encourage customers to collect at the gate and protect your fleet from aggressive building owners. Manners matter. #HumanityFirst
Seeing a delivery brother in tears because of a building owner’s behavior is a wake-up call. 💔 I’m asking @Swiggy@zomato@letsblinkit@ZeptoNow to prioritize partner safety. Don't mandate room/floor delivery if it puts them at risk. Let’s be better humans. #DeliveryHeroes
कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे लोगों से मिलवाती है, जो हमें इंसानियत पर फिर से भरोसा करना सिखा देते हैं… ❤️
रांची की एक सड़क किनारे, गन्ने का जूस बेचने वाले ये हैं भीम कुमार। बिहार के सिवान से आए हैं। रोज़ मेहनत करके अपनी ज़िंदगी चलाने वाले भीम के ठेले पर आज एक ऐसी घटना हुई, जो असाधारण बन गई।
एक महिला का लगभग 1 लाख 80 हज़ार रुपये का महंगा Samsung Fold फोन उनके ठेले पर छूट गया। महिला घर पहुंचीं, घबराहट में फोन ढूंढ़ा… नहीं मिला। दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं।
लेकिन तभी उम्मीद की एक किरण जगी…
जब उन्होंने अपने फोन पर कॉल किया, तो उधर से आवाज़ आई- “आप परेशान मत होइए, आपका फोन मेरे पास सुरक्षित है।”
वो आवाज़ थी भीम कुमार की…
महिला जब वापस आईं, आंखों में राहत और चेहरे पर मुस्कान थी। उन्होंने खुशी में भीम को कुछ पैसे देने चाहे… लेकिन भीम ने मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ लिया और कहा- “मैडम, गरीब ज़रूर हूं… लेकिन ईमान का पक्का हूं। ये किसी के साथ भी हो सकता है।”
आज के समय में, जहां लोग मौके ढूंढ़ते हैं फायदा उठाने के लिए… वहीं भीम जैसे लोग याद दिलाते हैं कि असली अमीरी पैसों में नहीं, बल्कि इंसानियत और ईमानदारी में होती है।
झारखंड में हुए दर्दनाक विमान हादसे को आज पूरा एक महीना हो गया…
लेकिन घाव आज भी ताज़ा है, दर्द आज भी उतना ही गहरा है।
7 लोगों ने अपनी जान गंवा दी…
पर लगता है जैसे उनकी यादों और उनके अपनों की पीड़ा को भी धीरे-धीरे भुला दिया गया है।
आज तक न किसी परिवार को मुआवज़ा मिला,
न ही कोई सहारा, न कोई ठोस कदम…
बस वादे, खामोशी और इंतज़ार।
जो लोग हर मुद्दे पर जाति और क्षेत्र के नाम पर राजनीति करते हैं,
वो इस दर्द पर चुप हैं… शायद इसलिए क्योंकि यहां सिर्फ इंसानियत रो रही है,
और इंसानियत की कोई राजनीति नहीं होती।
सबसे ज्यादा दिल तोड़ देने वाली बात-
इन दो मासूम बच्चों के सिर से एक ही पल में
मां और पिता, दोनों का साया उठ गया…
सोचिए, उनकी छोटी सी दुनिया, जो कभी हंसी और प्यार से भरी थी,
अब अचानक कितनी खामोश और सूनी हो गई होगी…
अब उन्हें कौन समझाएगा, कौन सहलाएगा, कौन उनके आंसू पोंछेगा?
उनके कल का क्या होगा…
उनकी पढ़ाई, उनका भविष्य, उनका सहारा…
इन सवालों का जवाब आज तक किसी के पास नहीं है।
एक महीना बीत गया…
पर न्याय अब भी रास्ता ढूंढ रहा है।
पता नहीं ये इंतज़ार कब खत्म होगा…
और कब इन टूटी हुई ज़िंदगियों को थोड़ा सा सहारा,
थोड़ी सी उम्मीद मिल पाएगी… 💔