दूसरों में ��ोष-दर्शन और अपने में गुण-दर्शन करना देहाभिमान है।
Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
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भजन मार्ग | परम पूज्य वृन्दावन रसिक संत श्री हित प्रेमानन्द गोविन्द शरण जी महाराज
श्री हित राधा केली कुंज, वराह घाट, वृन्दावन धाम
हार जाने वालों की तसल्ली देना बहुत जरूरी
होता है, वरना वो ज़ी नहीं पाएगा...
और पराजित व्यक्ति को तसल्ली देने के लिए
सबसे अच्छा शब्द है “भाग्य या नसीब”....