लड़की खुद को असहज महसूस कर रही है।
यह तस्वीर दिल्ली की DTC बसों में महिला सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
विडंबना यह है कि राजधानी की बागडोर एक महिला मुख्यमंत्री के हाथों में होने के बावजूद यदि महिलाएं सार्वजनिक परिवहन में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं, तो यह चिंता का विषय है।
महिला सुरक्षा केवल भाषणों और दावों से नहीं, बल्कि ज़मीनी व्यवस्था से साबित होती है।
उन ओरतों का धन्यवाद जिन्होंने संभाला पुरुषों को उस समय जब उन्हें कंधे पर हाथ रख कर सिर्फ़ ये कहने वाले की ज़रूरत की …”कोई बात नहीं तुमने पूरी कोशिश अगली बार तुम कर लोगे चिंता मत करो “🥹❤️