4 वर्ष
1200+ अध्याय
2100+ कार्यक्रम
2,30,000+ संकल्पित सहयात्री !
संदेशों का जन-जन तक हो रहा है विस्तार ! लाखों बिहारवासियों का बन चुका है एक बृहत परिवार ! आइए, मिलकर प्रेरित करें बिहार ! #LetsInspireBihar
लेट्स इंस्पायर बिहार अभियान के तहत पटना में 'गार्गी उद्यमी सखी सावन महोत्सव' का भव्य आयोजन किया गया. लेट्स इंस्पायर बिहार अभियान के संस्थापक और सीनियर IAS अधिकारी विकास वैभव ने महोत्सव का उद्घाटन किया
बिहार के उज्ज्वलतम भविष्य निर्माण हेतु संकल्पित महिलाओं का सबसे बड़ा मंच बन चुका है #LetsInspireBihar का #गार्गी_अध्याय ! 27 जुलाई, 2025 को #पटना में निर्धारित है महिला उद्यमिता का महोत्सव 'गार्गी उद्यमी सखी सावन महोत्सव 2025' ! आइए, मिलकर प्रेरित करें बिहार !
#गुजरात सरकार के माननीय मंत्री, उद्योग, नागरिक उड्डयन, ग्रामीण विकास, श्रम और रोजगार, श्री बलवंतसिंह राजपूत जी का #अहमदाबाद में 22 जून, 2025 को #LetsInspireBihar के अंतर्गत प्रवासी कल्याण फाउंडेशन के सहयोग से निर्धारित 'बिहार बिजनेस कनेक्ट 2025' में गरिमामयी उपस्थिति हेतु सहमति प्रदान करने हेतु हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ । गुजरात चैंबर्स ऑफ कॉमर्स में निर्धारित इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय निवेशक सम्मेलन की तैयारियों से संबंधित समीक्षा बैठक का आयोजन प्रवासी कल्याण फाउंडेशन के संयोजक श्री ऋषिकेश कुमार सिंह के नेतृत्व में नारायणी हाइट्स होटल, अहमदाबाद में आयोजन समिति के अनेक गणमान्य सदस्यों के साथ किया गया । इस अवसर पर गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों से सम्मानित स्टार्ट-अप प्रतिनिधियों, उद्यमियों एवं उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की । सभी उपस्थित सदस्यों ने इस बिजनेस समिट में न केवल भागीदारी का संकल्प लिया, अपितु इसे पूर्णतः सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग का भी संकल्प लिया । यात्रा गतिमान है !
#बेगूसराय में #LetsInspireBihar के अंतर्गत #गार्गी कला कोशल प्रशिक्षण केंद्र (जगन्नाथ पथ, स्टेशन रोड) का शुभारंभ प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ मीरा सिंह जी की अध्यक्षता में किया गया । बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र में #गार्गी_अध्याय की मुख्य समन्वयक सरिता सुल्तानिया जी ने इस योजना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस केंद्र के अंतर्गत 70 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित किया जाना है । मंच पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने प्रशिक्षणार्थियों को सफल प्रशिक्षण लेकर कर्म क्षेत्र में आने और कला के माध्यम से स्वरोजगार स्थापित करने में सहयोग देने का आश्वासन दिया । मंच का संचालन उद्योग विभाग के सेवा निवृत उप उद्योग निदेशक श्री अलख कुमार सिन्हा ने किया । मंच पर उपस्थित श्रीमती सारिका भास्कर एवं युवा कलाकार श्री भास्कर भूषण ने प्रशिक्षु कलाकारों का उत्साहवर्धन किया । श्रीमती नीलू सिंहा ने अध्यक्ष महोदया का सम्मान मिथिला पेंटिंग के शॉल से किया । अतिथियों ने कलाकारों को आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन देकर प्रोत्साहित किया । अंत में श्री विजय कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ । इस अवसर पर अतिथि के रूप मे डिस्ट्रिक्ट मैनेजर ज्ञानेश्वरी किरण जी, डायरेक्टर सी डी फोर्ड मंजू संगाही , कला प्रशिक्षक विजय कुमार सिंह जी, संगीत प्रशिक्षिका किशोरी मिश्रा जी, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद मन वंश जी, वीणा जी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे । हो रहा है प्रेरणा का प्रसार ! आइए, मिलकर प्रेरित करें बिहार !
युवाओं को नेतृत्व देना होगा
बिहार बदलना है तो युवाओं को आगे आना होगा।
युवा सोच, नया जोश लाते हैं। उन्हें समाजसेवा और राजनीति नेतृत्व का मौका देना जरूरी है।
#Vikasvaibhavips#Letsinspirebihar
#विश्व_विरासत_दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक कुम्हरार पार्क में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, पटना सर्कल द्वारा आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित था । #पाटलिपुत्र के प्राचीन अवशेष मुझे अत्यंत प्रिय हैं और जब भी स्वयं को इनके मध्य पाता हूँ, तब #यात्री_मन उस पुरातन काल में स्वतः चला जाता है जब 80 मौर्यकालीन प्रस्तर स्तंभों पर आधारित भव्य सभागार से अखंड भारत के संपूर्ण साम्राज्य का संचालन होता रहा होगा । आज जब उद्यान में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन कर रहा था तब प्राचीन दृश्यों को देखकर मन प्राचीन सभागार में उपस्थित उन यवन राजदूत मेगास्थनीज का स्मरण करने लगा जिन्होंने पाटलिपुत्र को तत्कालीन विश्व का ऐसा सर्वप्रमुख नगर बताया था जिसकी काष्ठयुक्त दीवारें अत्यंत सुदृढ़ थीं और जिसके चारों ओर निर्मित जलीय अवरोध के कारण प्रवेश एवं निकास अत्यंत नियंत्रित रहता था और नगर का प्रशासन सर्वश्रेष्ठ माना जाता था । मन कहने लगा कि उस काल में जब नगर में उद्यमिता अपने उत्कर्ष पर स्थापित थी और जब उसके प्रशासक अत्यंत दक्ष थे तब कौटिल्य के अर्थशास्त्र का दृश्य भी निश्चित ही अत्यंत जीवंत रहा होगा । मन कहने लगा कि उस काल में निश्चित ही नगरवासी भी स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित अनुभव करते होंगे और भला क्यों न करते जब मगध के प्रभाव एवं सामर्थ्य के समक्ष विश्व विजय की अभिलाषा लिए वीर यवन योद्धा अल्क्षेन्द्र (अलेक्जेंडर) के नेतृत्व में भारत पहुंची यवन सेना को भी भयाक्रांत होकर लौटना पड़ा था और कालांतर में भूमि अपने ज्ञान, शौर्य एवं उद्यमिता के कारण समस्त विश्व को प्रेरित करने लगी थी । मन जब इन्हीं विचारों में संलग्न था, तब पूर्व अधीक्षण पुरातत्वविद डाॅ डी एन सिन्हा जी ऐतिहासिक पाटलिपुत्र का संक्षिप्त इतिहास सभी के समक्ष प्रस्तुत करने लगे और फिर क्या था, ऐसा प्रतीत होना लगा मानो एक ऐसी ऐतिहासिक सभा में विद्यमान हूँ जहाँ पाटलिपुत्र का प्राचीन गौरव उसके उज्जवल भविष्य हेतु आवाह्न कर रहा हो ।
अपने संबोधन में मैंने सर्वप्रथम आमंत्रण हेतु अधीक्षण पुरातत्वविद डाॅ सुजीत नयन जी का आभार व्यक्त किया और #LetsInspireBihar के उद्देश्यों के प्रति उनके समर्थन तथा अभियान में साथ जुड़ने तथा उसे सशक्तता प्रदान करने हेतु उनका हृदय से अभिनंदन किया । विश्व विरासत दिवस की शुभकामनाएं देते हुए मैंने सभी से आँखें बंद करके उसी काल में चलने को कहा जब उसी स्थल से अखंड भारत का साम्राज्य संचालित होता था और यह चिंतन करने को कहा कि यदि उस काल के किसी नागरिक से यह पूछा जाता कि 2300 वर्ष पश्चात उनका पाटलिपुत्र कैसा होगा तो निश्चित ही उनकी आशाएं उसे और प्रबल रूप में स्थापित पातीं और विश्व जगत में सर्वाधिक महत्वपूर्ण तो निश्चित ही बतातीं परंतु यह अत्यंत गहन चिंतन का विषय है कि कालांतर में क्यों कभी अग्रणी रहा पाटलिपुत्र पिछड़ता चला गया और वर्तमान में तो ऐसी स्थिति है कि अर्थशास्त्र की भूमि की अर्थव्यवस्था संपूर्ण राष्ट्र में प्रति व्यक्ति आय के अनुसार सर्वाधिक पिछड़ेपन से ग्रसित है ।
मैंने विरासतों में समाहित प्रेरणा के महत्व को समझाने हेतु बगहा और रोहतास में अपने कार्यकाल के अनुभवों को साझा किया और कहा कि असंभव माने जाने वाले परिवर्तनों को भी मैंने वहाँ संभव होते हुए तब देखा था जब आमजन विरासत के संदेशों से प्रेरित होकर आगे बढ़ने लगे । बिहार के समृद्ध विरासत में समाहित प्रेरणा के प्रसार के लिए ही 4 वर्षों से अभियान के माध्यम से उन्हीं यशस्वी पूर्वजों के वंशजों को एक सूत्र में जोड़ने हेतु प्रयासरत हूँ, जिन्होंने न केवल अखंड भारत के साम्राज्य का निर्माण किया था परंतु नालंदा और विक्रमशिला में ऐसे विश्वविद्यालयों को भी तब स्थापित किया था जब यूरोप में आक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज की कल्पना तक नहीं हुई थी । हमारे पूर्वजों की दृष्टि बृहत थी और वेदांत में समाहित एकात्म भाव से निश्चित ही प्रेरित थी, तभी तो हम पाते हैं कि जातियाँ उस प्राचीन काल में भी थीं परंतु ऐसा संघर्षपूर्ण जातिवाद नहीं था । ऐसा जातिवाद यदि तब रहा होता तो नंद वंश का उदय भला कैसे हो सकता था और वैसे में तो संभवतः आचार्य चाणक्य भी चंद्रगुप्त की जाति ही खोजते रह जाते और वैशाली की तो कल्पना भी असंभव होती । विरासत का संदेश अत्यंत स्पष्ट है । यदि हम पूर्व की भांति भूमि को पुनर्स्थापित करना चाहते हैं तो निश्चित ही हमें जाति-संप्रदाय, लिंगभेद और विचारधारात्मक मतभेदों से उपर उठकर राष्ट्रहित में एकजुट होकर शिक्षा एवं उद्यमिता की क्रांति लाने के उद्देश्य से सकारात्मक योगदान समर्पित करना होगा । यह अत्यंत सुखद है कि आज लाखों बिहारवासी विरासत के संदेशों को आत्मसात करते हुए एक बड़े सांस्कृतिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक परिवर्तन की ओर आगे बढ़ रहे हैं ।