एक बार आरक्षण दे दिया तो पीछे का गियर नहीं होता।
अब नया सलूशन आ गया — ब्राह्मणों को छोड़कर सबको आरक्षण दे दो।
बिहार में भूमिहार को ST में डालने की बात हो रही है। कल कोई और जाति को OBC में ठूंस देंगे। परसों पूरा समाज SC-ST-OBC बन जाएगा।
SC-ST के लिए कम से कम कोई ऐतिहासिक आधार था। OBC में तो सिर्फ पावर डिस्कोर्स है। कमीशन बनती है, निष्कर्ष पहले से तय रहता है।
ट्रंप DEI हटा रहे हैं। यहाँ जाति को ही क्लास बना दिया गया है।
आरक्षण अब सामाजिक न्याय नहीं, वोट बैंक का स्थायी ठेका बन चुका है।
@jpsin1 जो meritorious स्टूडेंट्स हैं उनको नौकरियों की कमी नहीं है l कहने के लिए जिनके पास डिग्री है लेकिन जो छुट्टी के लिए एक प्रार्थना पत्र भी ठीक से ड्राफ़्ट नहीं कर सकते l दिक्कत उन्हीं लोंगों के लिए है l