एक मुस्लिम युवक कह रहा है कि मैं मुस्लमान हूं, मान के चलो हिन्दुस्तान में गलती से हमारा सरकार आ जाए, बेशक हम 23 परसेंट लेकिन लेकिन 70 - 75 परसेंट हिंदुओं का जीना हराम कर देंगे, इनका रोड पर निकलना मुश्किल हो जाएगा, देश छोड़कर भागने लगेंगे।
Want to Know what Governs Zubair, Arfa, Owaisi, and all Muslims in India?
They don't follow the Constitution, they follow Fatawa Alamgiri - A 10 Volume Persian Text that was never Available in Hindi
The Jaipur Dialogues has translated and is in the process of translating this Text in Hindi so that every Hindu can understand and develop SHATRU BODH!
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'Bring pepper spray, sticks and rods, create ruckus at airport'
Supporter of AAP worker Abhijeet Dipke's Cockroach Janata Party provokes people to unleash violence
Follows the template of 2020 anti-Hindu riots
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So Rahul Gandhi's Soros funded deep state friends paid Wikipedia editors to defame Hindu organisations like American Hindu Foundation, but Soros & Deep State is a myth because someone trolled a Congress student activist!!!
कॉक्रोचों से अपील की जा रही है कि हवाई अड्डे पर डंडों और पेपर स्प्रे से लैस होकर आएं
“भारत को हर हाल में नेपाल बनाना है”
सोनम वांगचुक का नेतृत्व और अरविंद केजड़ीवाल की प्लानिंग ~ योजना है कि किसी भी तरह लड़कों को पुलिस के हाथों पिटवा दिया जाए
#CJP
झारखंड के आदिवासी इलाकों में चर्च की बढ़ती संख्या पर मेरे बयान से काफी हंगामा हुआ। अपना धर्म बदल चुके कई लोग इस बात से परेशान हैं कि मैने सिर्फ चर्च की बात की, मंदिरों की नहीं। चलिए, आज इस मुद्दे पर विस्तार से बात करते हैं।
झारखंड के अधिकतर गांवों में आदिवासी-मूलवासी एक साथ रहते हैं। हमारे गांवों में हजारों सालों से जाहेरस्थान/ सरना स्थल/ देशाउली/ मांझी थान है और सनातन समाज के मंदिर भी, जिनमें मूलवासी पूजा करते हैं। आदिवासी- मूलवासी दोनों समुदाय एक दूसरे के पूजा स्थलों में सिर झुकाते हैं, एक-दूसरे के पर्व - त्योहारों में शामिल होते हैं और दोनों सबकी आस्था का सम्मान करते हैं।
इसके अलावा दिउड़ी मंदिर, रंकिणी मंदिर जैसे कई मंदिर हैं, जहाँ आदिवासी समाज के पाहन पुजारी की भूमिका में होते हैं, और सनातनी लोग भी वहाँ पूजा करते हैंं। ठीक उसी प्रकार, हम भी उनके पर्व-त्योहारों में शामिल होते हैं। लेकिन एक दूसरे के धार्मिक स्थलों एवं परंपराओं का यह परस्पर सम्मान हमारी आस्था, हमारी जीवन शैली को कभी नहीं बदलता।
हम आदिवासी पेड़ के नीचे बैठ कर पूजा करने वाले लोग हैं, और जन्म से लेकर शादी-विवाह एवं मृत्यु तक, हमारी बिल्कुल स्पष्ट जीवनशैली है। बच्चे के जन्म, नामकरण, विवाह समेत जीवन के सभी महत्वपूर्ण पड़ावों पर, हमारी सामाजिक प्रक्रियाएं मांझी परगना/ नायके/ पाहन/ मानकी/ मुंडा/ पड़हा राजा आदि पूरी करवाते हैं। जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर हम जाहेरस्थान/ सरना स्थल/ देशाउली/ मांझी थान जाकर मरांग बुरु/ सिंगबोंगा की पूजा करते हैं।
हजारों सालों के इस सामाजिक सह-अस्तित्व में हम लोग एक-दूसरे के हर सुख-दुख के साथी बने, यथासंभव सहयोग किया, लेकिन उन्होंने कभी हमें हमारी आस्था या जीवनशैली बदलने के लिए मजबूर नहीं किया। अभी धर्मांतरण की रफ्तार देख कर लगता है कि अगर उन्होंने ऐसा किया होता, तो शायद हमारी संस्कृति बहुत पहले खत्म हो गई होती।
हजारों सालों के हमारे इतिहास में, आपको ऐसा कोई भी मूलवासी/ सनातनी नहीं मिलेगा, जिसने किसी मदद, सहायता या सहयोग के बदले, अथवा हमें लालच/ धमकी देकर हमारे लोगों का धर्म परिवर्तन करवाने की कोशिश की हो। वे कभी स्वयं को आदिवासी नहीं बताते। वे लोग आरक्षण समेत हमारे समाज को मिले अन्य अधिकारों को छीनने अथवा उसमें अतिक्रमण करने भी प्रयास नहीं करते, तो फिर उनसे कैसा बैर?
दूसरी तरफ, इस क्षेत्र में ईसाई मिशनरियों ने 1845 में धर्म प्रचार शुरू किया, लेकिन मात्र 180 वर्षों में इन्होंने हमारी परंपराओं एवं धार्मिक आस्था पर चोट पहुंचाई, आरक्षण पर कब्जा किया, भाषाओं/ लिपियों का विरोध किया तथा हमारे अस्तित्व को मिटाने की हर संभव कोशिश की। हमारे लाखों लोगों का धर्मांतरण कर के इन्होंने ऐसे हालात बना दिये हैं कि सिमडेगा समेत झारखंड के कई हिस्सों में हमारे जाहेरस्थानों/ सरना स्थलों पर ताला लग चुका है, क्योंकि वहाँ धर्मांतरण की वजह से पूजा करने वाला कोई नहीं बचा।
आदिवासी समाज की पहचान पारंपरिक जीवनशैली, विशिष्ट संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज एवं रूढ़िजन्य परम्पराओं से है, लेकिन ये लोग उसे मिटाने में लगे हुए हैं। ये लोग DNA की बात करते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि इन्हीं मिशनरियों की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में आदिवासी संस्कृति विलुप्त हो गई।
लैटिन अमेरिका की अयोरेओ जनजाति, केन्या की संबुरु जनजाति, ब्राजील की वाई वाई जनजाति, फिजी और पैसिफिक आइलैंड्स की जनजातियां धर्मांतरण के बाद अपनी मूल संस्कृति को भूल चुकी हैं। उनके पारंपरिक रीति-रिवाज, त्योहार, भाषा, नृत्य, पूजा-पाठ और सामाजिक संरचनाएं खत्म कर दिए गए। आप खुल कर क्यों नहीं कहते कि भारत में भी आपका असली मकसद यही है?
धर्मांतरण कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे समाज के अस्तित्व से जुड़ा मामला है। अगर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, वीर सिदो कान्हू, वीर पोटो हो, वीर टाना भगत, वीर तेलंगा खड़िया एवं अन्य मार्गदर्शकों के दिखाए राह पर चलते हुए अगर हम लोग अपनी परंपराओं को नहीं बचाएंगे तो भविष्य में हमारे जाहेरस्थानों, सरना स्थलों, देशाउली आदि में पूजा करने वाला कोई नहीं बचेगा। हमारा अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा। (Part 1/2)
@scribe9104 चौंकाने वाली खबर
एक Old वीडियो फिर से सामने आया है जिसमें अभिषेक बनर्जी JP नड्डा पर हुए हमले को जन आक्रोश बता रहे हैं
कहरहे है की “आज डायमंड हार्बर में नड्डा मुश्किल में पड़ गए
मैं इसमें क्या कर सकता हूँ? लोगों के आक्रोश का प्रकोप मेरी ज़िम्मेदारी नहीं है“
आज खुद पर बीती है
Here’s the video where Pakistani dancer Sheema Kermani is spreading misinformation that Odissi originated in Indus Valley. She is accusing Indians of “falsely claiming that Odissi originated in Odisha.” She had learnt Odissi in India on an ICCR scholarship.
Shocker from Saharanpur, UP❗️
Ambedkarites allegedly beating a Brahmin Pujari in order to encroach the land of a Hindu Temple.
They also booked the Pujari under a false case of the SC/ST Act & moIestation charges.
@myogiadityanath Is this Ram Rajya?
Calcutta was the world's largest provider of skeletons for medical programs until 1980, exporting 60,000 human skeletons yearly.
Guess who ran the largest hospice and orphanage in Calcutta at that time ?
एयरटेल ये कहना चाहता है क्लास के हिसाब से नेटवर्क मिलेगा भारत में ?
एक ही टावर लेकिन प्रीपेड और पोस्टपेड के लिए अलग अलग नेटवर्क?
VIP नेटवर्क? तो नेट न्यूट्रैलिटी का क्या होगा ?
प्रश्न ये है कि आख़िर चोल साम्राज्य से संबंधित हज़ार वर्ष पुराने ये ताम्रपत्र नीदरलैंड्स में क्या कर रहे थे
यूरोपीय देश पूरी दुनिया में चोरी और लूट से सम्पन्न हुए हैं और अब उनका पराभव उनके कुकर्मों का प्रतिफल है
सत्रहवीं शताब्दी के मध्य में नीदरलैंड्स (हॉलैंड) ने ब्रिटेन से पहले ही भारत को लूटने के लिये “डच ईस्ट इंडिया कम्पनी” के माध्यम से प्रवेश किया था
और पुर्तगालियों को हरा कर नागपट्टिनम, कोचीन, मालाबार पर क़ब्ज़ा कर लिया था
अठारहवीं शताब्दी के मध्य में त्रावणकोर के राजा मार्तंड वर्मा के हाथों करारी शिकस्त के बाद डच ईस्ट इंडिया कंपनी को ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत से निकाल बाहर किया
अंग्रेज़ अपनी लूट में किसी को हिस्सा देने के लिये तैयार नहीं थे
लगता है मंदिर देख कर अपना संतुलन खो बैठी ये एंकर महोदया। भाषा का अपना एक संदेश होता है और उसका आचार-विचार भी होता है। टीवी पर टीआरपी के लिए नाच-कूद सकते है लेकिन जैसे ही संस्कृति के सवाल सामने आता है तो जवाब में सेक्युलर लिबरल चेहरा आ जाता है ।