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आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर Dy. Station Manager नरेंद्र सिंह चाहर को कथित तौर पर घसीटने के मामले में रेलवे का बड़ा एक्शन
- घटना की निष्पक्ष जांच के लिए 3 सदस्यीय जांच समिति गठित
- समिति में ASC आगरा कैंट, स्टेशन डायरेक्टर आगरा कैंट और AOM आगरा शामिल
- मामला ट्रेन 20808 हीराकुंड एक्सप्रेस के ठहराव के दौरान हुए विवाद से जुड़ा
- चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रही महिला यात्री को सुरक्षित चढ़ाने के लिए गार्ड ने ट्रेन रुकवाई
⚠️ आरोप है कि बाद में RPF कर्मियों ने महिला को ट्रेन से उतारा, ₹1,000 मांगे और Dy. Station Manager से अभद्रता की
- आरोप है कि 5–6 RPF कर्मियों ने Dy. Station Manager को उनके कार्यालय से RPF कार्यालय तक घसीटा; घटना का वीडियो सामने आया
⛔प्रथम दृष्टया तथ्यों के आधार पर 4 RPF कर्मी तत्काल प्रभाव से निलंबित
- सस्पेंड कर्मी: ASI मेघराज मीणा, ASI बालकिशन, कांस्टेबल जितेंद्र और कांस्टेबल बदन सिंह
- रेलवे ने कहा- जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी
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RPF के जवानों ने स्टेशन मास्टर को गाली देने का आरोप लगाकर बुरी तरह पीटा।
स्टेशन मास्टर ने शिकायत पत्र के माध्यम से बताया कि ��लती ट्रेन के पीछे एक लड़की बैग लिए दौड़ लगा रही थी, उसकी जान बचाने के लिए गार्ड से प्रेशर लगाकर गाड़ी रोकने को कहा।
गाड़ी रुकने के बाद लड़की को गाड़ी में सुरक्षित बैठाया, उसके बाद, कांस्टेबल जितेंद्र कुमार उस लड़की को नीचे उतार लिया। और झूठा चैन पुलिंग का आरोप लगाकर उसका मोबाइल छीन लिया और 1000 रुपए ले लिया।
स्टेशन मास्टर ने बताया कि मैंने काफी कांस्टेबल को काफी समझाया, बताया कि गाड़ी हमनें र���कवाई है, लेकिन कांस्टेबल नहीं माना और मुझे ही गाली देने लगा कहा गाड़ी तुम्हारे बाप की है जो रुकवाए हो।
उसके बाद गाली गलौज करते हुए स्टेशन परिसर में सैकड़ों यात्रियों के सामने मुझे घसीटकर पीटा गया, किसी अपराधी जैसे व्यवहार किया गया, और जान से मारने की धमकी देते हुए कहा किसी दिन किसी ट्रैक पर पड़ा मिलेगा।
बीते कल 12 जुलाई 2026 आगरा रेलवे स्टेशन का मामला
महिला की मदद करना पड़ा भारी! स्टेशन उप प्रबंधक को ही घसीटकर ले गई RPF
उत्तर प्रदेश से रेलवे का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक महिला य��त्री चलती ट्रेन में सवार नहीं हो पाई थी। स्थिति को देखते हुए स्टेशन उप प्रबंधक ने वॉकी-टॉकी के जरिए सूचना देकर ट्रेन रुकवाई, ताकि महिला सुरक्षित ट्रेन में चढ़ सके। स्टेशन स्टाफ ने भी मानवता दिखाते हुए महिला की मदद की।लेकिन इसके बाद मामला अचानक पलट गया। ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ कर्मियों ने महिला को चैन पुलिंग के आरोप में पकड़ लिया। जब स्टेशन स्टाफ ने इसका विरोध किया और पूरी घटना की जानकारी दी, तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि आरपीएफ के जवानों ने अपने अन्य साथियों को बुला लिया और स्टेशन उप प्रबंधक को ही घसीटते हुए थाने ले गए।घटना का मामला सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए आरपीएफ के एएसआई मेघराज मीणा, एएसआई बालकिशन, कांस्टेबल बदन सिंह और कांस्टेबल जितेंद्र को निलंबित कर दिया है।यह घटना सवा�� खड़े करती है कि क्या ड्यूटी निभाने और यात्री की मदद करने वाले अधिकारी के साथ ऐसा व्यवहार उचित है? आपकी राय क्या है-कानून का पालन जरूरी है या पहले मानवता? कमेंट में जरूर बताइए।
गजब का मामला हो गया...
आगरा में ट्रेन स्टेशन पर रुकी। महिला उतरकर पेठा खरीदने लगी। इतने में ट्रेन चल दी। महिला ने स्टेशन उपाधीक्षक नरेंद्र चाहर से ट्रेन रोकने की रिक्वेस्ट की,तो उन्होंने वॉकी–टॉकी से बोलकर ट्रेन रुकवा दी।
RPF पुलिस ने चेन पुलिंग के आरोप में महिला को रोक लिया। उपाधीक्षक ने इसका विरोध किया था। मामला बढ़ा तो पुलिस ने उपाधीक्षक को पीटा और घसीटकर ले जाने लगे...
बाद में इस मामले में RPF के 4 पुलिसकर्मी मेघराज, बालकिशन मीणा, बदन सिंह और जितेंद्र को सस्पेंड कर दिया गया।
देख रहे हैं @DGPMaharashtra जी?
लातूर में तैनात यह ट्रैफिक पुलिसकर्मी कानून का रक्षक नहीं, बल्कि इसकी हरकतें गुंडों–मवालियों जैसी दिखाई दे रही है। कृपया इसके खिलाफ तत्काल हत्या के प्रयास सहित संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की जाए और बिना किसी देरी के इसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
ध्यान रहे कि –
कानून सबके लिए समान है,
वर्दी किसी को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं देती।
@LaturPolice