मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जनसेवा मित्रों और पेसा मोबलाईजर्स से बड़े-बड़े वादे किए थे। युवाओं को भरोसा दिलाया गया था कि उनकी सेवाओं को सम्मान मिलेगा और भविष्य सुरक्षित किया जाएगा। लेकिन चुनाव खत्म होते ही हकीकत सामने आ गई।
पहले करीब 9300 जनसेवा मित्रों को सेवामुक्त किया गया और अब पंचायत राज संचालनालय के आदेश से पेसा मोबलाईजर्स को भी तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिन युवाओं ने गांव-गांव जाकर पंचायत, ग्रामसभा और पेसा कानून को मजबूत करने का काम किया, आज वही युवा बेरोजगारी और असुरक्षा के संकट में धकेल दिए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या युवाओं का उपयोग सिर्फ चुनावी प्रचार और राजनीतिक लाभ के लिए किया गया था? यदि योजनाएं समाप्त हो रही थीं तो इन युवाओं के पुनर्वास, नियमितीकरण या वैकल्पिक रोजगार की कोई नीति क्यों नहीं बनाई गई?
यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक भागीदारी और युवाओं के भरोसे का भी सवाल है। सरकार को तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए पेसा मोबलाईजर्स और जनसेवा मित्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस निर्णय लेना चाहिए।
@JansamparkMP@RahulGandhi@INCMP
९३०० जन सेवा मित्रों के साथ फरेब और छल हुआ है। बीजेपी ने 2024 चुनाव के वक्त उनका पूर्ण उपयोग किया ; अब यह ९३०० युवा घर घर न्याय के लिए भटक रहे हैं। @ChouhanShivraj जी ने मुख्य मंत्री के हैसियत से सार्वजनिक वादे किए थे।
उन आश्वासनों की कोई कद्र नहीं। न्याय चाहते हैं।
9300 जनसेवामित्रों को पहले सपने दिखाए गए, फिर उन्हें बीच मंझधार में छोड़ दिया।
सरकार ने आश्वासन दिया,घोषणाएं कीं, वि.स. तक मुद्दा गूंजा आज वही युवा बेबस,बेसहारा खड़े हैं।
👉चुनाव समय“रोजगार”का ढोल पीटना आसान है,
👉लेकिन युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की असली जिम्मेदारी है।
9300 जनसेवा मित्रों की आवाज़ को मजबूती देने के लिए राज्यसभा सदस्य,वरिष्ठ अधिवक्ता आदरणीय @VTankha जी का हृदय से आभार।
आपने बेरोजगार जनसेवा मित्रों की पीड़ा, संघर्ष और न्याय की मांग को गंभीरता से सुना, यह हम सभी युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है
🙏🏻💐
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
जनसेवा मित्र आज भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं…
सरकार बताये — उनका कसूर क्या है❓
काम लिया, उम्मीदें जगाईं, और फिर छोड़ दिया… यही है रोजगार नीति❓ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी ने सही सवाल उठाया है।
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
जनसेवा मित्रों को रोजगार देने का वादा बड़े-बड़े मंचों से किया गया था, लेकिन आज वही युवा अपने भविष्य को लेकर असमंजस में खड़े हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार के लिए युवाओं के सपनों की कोई कीमत नहीं है❓
जब काम लिया गया, जिम्मेदारियां दी गईं, तब ये युवा सरकार के लिए महत्वपूर्ण थे… तो आज उन्हें नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है❓
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी ने बिल्कुल सही मांग उठाई है कि सरकार तुरंत पुनर्विचार करे और जनसेवा मित्रों को न्याय दे।
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
जनसेवा मित्रों की स्थिति आज प्रदेश की रोजगार व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही है। जिन युवाओं को उम्मीदों के साथ जोड़ा गया, उन्हें आज अस्थिरता और अनिश्चितता के बीच छोड़ दिया गया है।
सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर इन युवाओं का भविष्य क्या होगा❓ क्या ये सिर्फ आंकड़ों का हिस्सा बनकर रह जाएंगे❓
श्री जीतू पटवारी जी की मांग केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की चिंता और संघर्ष की आवाज़ है। अब निर्णय लेने का समय है।
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
ये वही शिवराज सिंह चौहान हैं जो मध्य प्रदेश में इतना झूठ बोलकर गए हैं कि जनसेवा मित्र और भांजे-भांजियां आज भी दर्द से तड़प रहे हैं!
फुल वीडियो 👇
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#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो#MadhyaPradesh
जनसेवा मित्र आज भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं…
सरकार बताये — उनका कसूर क्या है❓
काम लिया, उम्मीदें जगाईं, और फिर छोड़ दिया… यही है रोजगार नीति❓ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी ने सही सवाल उठाया है।
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
@jitupatwari सरकार को जन सेवा मित्रो को बहाल करना चाहिए क्यो की शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए ये वादा किया था की जन सेवा मित्रो के भविष्य की चिंता मे करूंगा न की व्यक्तिगत वादा किया था तो आज वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव जी को ये वादा पूरा करना चाहिए
मोहन सरकार अब पुराने जनसेवा मित्रों को हटाकर नए ‘CM यंग इंटर्न’ को नियुक्त करेगी।
मध्य प्रदेश में 9390 जनसेवा मित्रों को अचानक बाहर करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य के साथ सीधा अन्याय है।
ये वही युवा हैं जो प्रशिक्षित हैं, ज़मीनी अनुभव रखते हैं और वर्षों से जनता की सेवा कर रहे थे। ऐसे में उन्हें हटाकर नई भर्ती की बात करना सरकार की नीयत और नीति दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रोजगार के नाम पर ऐसे अस्थायी प्रयोग युवाओं के भरोसे को तोड़ते हैं। उन्हें स्थिरता, सम्मान और सुरक्षित भविष्य चाहिए, न कि बार-बार की अनिश्चितता।
मोहन सरकार को तुरंत इस फैसले पर पुनर्विचार कर जनसेवा मित्रों को बहाल करना चाहिए।
@DrMohanYadav51
मध्यप्रदेश मे बीजेपी सरकार ने जिस प्रकार 9000 जनसेवा मित्रो को ठगकर बेरोजगार कर दिया अब दुबारा उसी तर्ज पर प्रधानमंत्री युवा इंटर्नशिप योजना के नाम पर युवाओं को ठगने की तैयारी है
@CMMadhyaPradesh@IndianExpress@JansamparkMP
सरकार साफ बताए — यंग इंटर्न योजना रोजगार है या फिर चुनावी जुमला❓
पहले 9300 #जनसेवा_मित्रों से साल भर काम कराया, बड़े-बड़े मंचों से वादे किए और फिर उन्हें दूध में मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया।
आज वही सरकार 4865 यंग इंटर्न की नई फौज खड़ी कर रही है।
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए जा रहे CM Young Interns for Good Governance Programme का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति जानना बताया जा रहा है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार प्रदेश के 313 विकासखंडों में हर ब्लॉक से 15 युवाओं का चयन किया जाएगा, यानी कुल लगभग 4,695 से 4,865 इंटर्न को जोड़ा जाएगा और उन्हें 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इस योजना का संचालन Atal Bihari Vajpayee Institute of Good Governance and Policy Analysis के माध्यम से किया जाएगा।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश में पहले से करीब 9,300 जनसेवा मित्र वर्षों से योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने का अनुभव रखते हैं, तो उन्हें हटाकर नई भर्ती क्यों की जा रही है? जिन युवाओं ने गांव-गांव जाकर सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुँचाया, आज वही रोजगार से बाहर हैं।
मैं मांग करता हूँ कि सरकार पहले पुराने 9,300 जनसेवा मित्रों को बहाल करे, उनके अनुभव का उपयोग करे और उसके बाद नई इंटर्नशिप योजना लागू करे।
#जनसेवा_मित्रो_को_बहाल_करो — यह हजारों युवाओं की न्यायपूर्ण मांग है।
जनसेवा मित्रों और अतिथि शिक्षकों के भविष्य पर आज भी सवाल खड़े हैं। जिन युवाओं को @ChouhanShivraj जी ने बड़े-बड़े वादों घोषणाओं के साथ जोड़ा था, युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की बात कही गई थी। आज वो हजारों युवा बेरोजगार हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह सब सिर्फ चुनावी भाषण था?