यह मध्य प्रदेश के खंडवा में तैनात अपर सत्र न्यायाधीश अक्षय कुमार द्विवेदी हैं। यह उन लोगों में से हैं जिन्हें हम सबको प्यार करना चाहिए।
जज साहब ने आलीशान सरकारी बंगला, वीआईपी कार और अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से इंकार कर दिया है। वे एक छोटे से कमरे में रहते हैं, अपना खाना खुद बनाते हैं और रोजाना पैदल ही कोर्ट जाते हैं।
जज अक्षय ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को आवेदन देकर अपनी सैलरी आधी करने की मांग भी की है। निजी संपत्ति के नाम पर उनके पास सिर्फ अपनी मां द्वारा दिया गया एक मोबाइल फोन है। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया है। तबादले पर उन्होंने विभाग से कहा है कि उन्हें देश में कहीं भी भेजा जाए, वे न्यूनतम सरकारी सुविधाएं ही लेंगे।
बचपन में अपनी मां को संपत्ति विवाद के दौरान अदालत के चक्कर लगाते देखकर उन्होंने जज बनने का निर्णय लिया था। इसी कारण वे अपनी अदालत में आने वाले मुकदमों, खासकर जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों का निपटारा बेहद तेजी से करते हैं ताकि आम लोगों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
सलाम जज साहब
कहा से भरे मेजर जनरल साहब ?
GEN Male = - 6 पद
OBC Male = -4 पद
EWS Male = 2 पद
MBC Male = -4 पद
धन्य हो आपने राजस्थान की पहली बैकलॉग भर्ती निकाली है! डिपार्टमेंट को बोलो कुछ करे ! मुख्यमंत्री से बात करो ।
#BCI_भर्ती_में_न्याय_दो
महिला आरक्षण का पूरा मामला समझें 👇
▪️2023 में महिला आरक्षण बिल लाया गया. इसमें मोदी सरकार ने कहा- पहले जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा, इसके बाद महिला आरक्षण लागू होगा.
▪️कांग्रेस और सारे विपक्ष ने महिला आरक्षण का पूरा समर्थन किया. ये भी कहा कि मोदी सरकार इतने नियम न लगाए और तत्काल महिला आरक्षण लागू करे.
▪️लेकिन मोदी सरकार नहीं मानी और जनगणना और परिसीमन वाले नियम के साथ महिला आरक्षण पास हुआ.
▪️मतलब महिला आरक्षण 2023 में पास हो गया.
🔹 यहां कहानी का एक हिस्सा खत्म हुआ
▪️इस बीच कांग्रेस लगातार जनगणना में जातिगत जनगणना को शामिल करने की मांग कर रही थी.
▪️2024 में मोदी ने इस मुद्दे को कमजोर करने के लिए जातिगत जनगणना को अर्बन नक्सल की सोच बताया.
▪️हालांकि इससे यह मुद्दा कमजोर नहीं हुआ और देश में ये मांग उठने लगी, खासकर दलितों, पिछड़ों की तरफ से.
▪️फिर विपक्ष और लोगों के दबाव के आगे मोदी सरकार को झुकना पड़ा और 2025 में जातिगत जनगणना कराने की बात कही गई.
🔹 यहां कहानी का दूसरा हिस्सा खत्म हुआ
▪️2024 में महिला आरक्षण पास हो चुका था, जिसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करना था.
▪️2025 में जातिगत जनगणना की बात भी हो गई थी.
▪️फिर कुछ खबरें आने लगीं कि जातिगत जनगणना में देर होगी और 2029 तक ये आ नहीं पाएगा.
▪️यहां ध्यान रखने वाली बात है. जनगणना 2021 में हो जानी चाहिए थी, जिसमें पहले ही बहुत देर हो चुकी है. देश में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी.
▪️जातिगत जनगणना में देर होने की खबरों के बीच मोदी सरकार ने मार्च 2026 में महिला आरक्षण लागू करने की बात शुरू कर दी.
▪️और अब मोदी सरकार संसद चलाकर, अपना ही नियम बदल रही है. यानी जनगणना और परिसीमन के बाद महिला आरक्षण वाला नियम बदला जा रहा है.
🔹अब क्या हो रहा है?
▪️2023 में पास हुआ महिला आरक्षण लागू किया जा रहा है.
▪️परिसीमन का बिल पास किया जा रहा है, जो कि 2011 की जनगणना के आधार पर होगा.
अब आप सोचिए... कौन सी बात पीछे रह गई?
जी हां, जातिगत जनगणना. ये वो चीज है जिसका कहीं जिक्र नहीं है.
आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता।
आदमी मरने के बाद कुछ नहीं सोचता।
कुछ नहीं बोलने, कुछ नहीं सोचने से आदमी मार जाता है!
@taapsee steals the show at the #Assi screening! All the best to @anubhavsinha & team!
This Venezuela take over by the US reminds me of the Indo Pak War.
In 1971, the US sent its 7th fleet to intimidate and scare India.
But India did not even shake, India stood strong, India stood firm and made it go back.
Coldest edit on Indira Gandhi🥶
एक स्त्री जिसने तानाशाही के अंधेरे में लोकतंत्र की मशाल जलाई🔥
वो जेल गईं। वो छुपीं। वो अपनों से बिछड़ीं। लेकिन झुकी नहीं।
नाम है — मारिया कोरीना माचाडो।
देश — वेनेज़ुएला।
और आज पूरी दुनिया उन्हें जान रही है… क्योंकि उन्हें मिला है 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार।
जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प तक ये सम्मान पाने की उम्मीद में थे, तब नॉर्वे की नोबेल कमेटी ने एक संदेश दिया —
“सच्ची शांति ताकत से नहीं, साहस से जन्म लेती है।”
मारिया वही ‘आयरन लेडी’ हैं जिन्होंने तानाशाह निकोलस मादुरो के सामने लोकतंत्र का झंडा थामे रखा।
उनके देश में चुनाव लूटे गए, आवाज़ें कुचली गईं, पत्रकार जेल में ठूंसे गए।
लेकिन माचाडो ने कहा — “लोकतंत्र कोई उपहार नहीं, ये संघर्ष से कमाया जाता है।”
वो छिपकर भी लड़ीं। वो टूटकर भी संभलीं।
और आज... दुनिया उनकी जिद को सलाम कर रही है।
मारिया कोरीना माचाडो, एक नाम जो याद दिलाता है —
तानाशाह चाहे जितना शक्तिशाली हो, एक सच्ची औरत का साहस हमेशा उससे बड़ा होता है। #घोरकलजुग
#MariaCorinaMachado
#NobelPeacePrize
⛔ सरकारी निःशुल्क दवा से बच्चे की मौत! दवा बनाने वाली कम्पनी पहले भी हो चुकी है बैन!
सीकर के रघुनाथगढ़ थाना क्षेत्र के गांव खोरी ब्राह्मणान के 5 वर्षीय बालक की निःशुल्क दवा योजना की सीरप पीने से मौत हो जाने की खबर है! बच्चे को आज सुबह सीकर के एसके अस्पताल में लाया गया, जहाँ मृत घोषित किया गया।
यह वही Dextromethorphan सीरप है जिसके सेवन से सीकर के ही 2 बच्चे जयपुर जयपुर के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती रहे और भरतपुर में भी एक बच्चे की हालत गम्भीर होने पर वहां उपस्थित डॉक्टर ने भी पीकर देखा तो उनकी भी हालत बिगड़ गयी थी! इस खबर को कई अखबारों ने प्रमुखता से छापा था! उक्त सीरप का निर्माण Kaysons Pharma कम्पनी द्वारा किया गया है जो कि पहले भी विवादों में रही है! यह कम्पनी जयपुर के पास ही एक गांव में दवा निर्माण करती है! कम्पनी की अधिकृत वेबसाइट के अनुसार ये 1984 से फार्मा सेक्टर में हैं लेकिन असल में यह कम्पनी (प्रोपराइटरशिप) रजिस्टर ही 2017 में हुई है और इसका बैलेंस भी स्थापित कम्पनियों के सामने कुछ भी नहीं है!
सरकारी डॉक्टर के हाथ लगे कुछ कागजातों के अनुसार इस कम्पनी को Anticold Syrup की आपूर्ति के विषय में वर्ष 2022 में एमडी आरएमएससीएल द्वारा दो साल के लिए प्रतिबंधित भी किया जा चुका है, यानी इसकी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और क्वालिटी निश्चित रूप से सन्देह के घेरे में है! आप निःशुल्क दवा/जांच योजनाओं की मैन्युफैक्चरिंग को देखेंगे तो पाएंगे कि कई कम्पनी जयपुर चौमू के आस पास दवा/किट बना रही हैं! यह गम्भीर विषय है! राजस्थान में हर साल एक हजार करोड़ से ऊपर की निःशुल्क दवा प्रदेश में वितरित की जा रही हैं लेकिन गुणवत्ता पर हमेशा सवाल खड़े होते हैं, सैंकड़ों सैम्पल फैल हो चुके हैं, लेकिन दवा है कि बंट रही है! मृतक बालक को शत शत नमन! क्या अब सरकार इस बालक को एक करोड़ मुआवजा या परिजन को सरकारी नौकरी देगी? किसी की कोई जिम्मेदारी तय होगी?
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